राज्य निर्माण के विगत एक दशक में छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए काफी महत्वपूर्ण कार्य हुए हैं। राज्य की न्यायधानी के नाम से प्रसिध्द इस जिले में सैलानियों के देखने के लिए बहुत कुछ है। पर्यटन सुविधाओं के विकास साथ ही जिले के विकास में तेजी आयी है। जिले के अनेक पुरातात्विक धार्मिक और प्राकृतिक स्थल जो उपेक्षित से थे, उनके पुनरूद्वार की ओर ध्यान दिया गया और पर्यटन के अनुकूल विकास कार्य किए गए है।
पर्यटन के दृष्टि से देखे तो सर्वप्रथम ताला पर ध्यान जाता है। रूद्र शिव प्रतिमा, देवरानी जेठानी मंदिर के इस प्रसिध्द पुरातात्विक स्थल के विकास के लिए विभिन्न योजनाओं के तहत राशि मंजूर की
गई। सड़क पेयजल एवं छाया दार स्थलों का निर्माण, आसपास के स्थल पर आकर्षक उद्यान, फव्वारे, समीप ही बहने वाली मनियारी नदी पर एनीकट बनाकर पानी को रोकने और उसमें नौकायन की सुविधा उपलब्ध कराई गई। सिंचाई विभाग द्वारा 30 लाख की लागत से उद्यान तथा एक करोड़ की लागत से मनियारी नदी के दोनों ओर 150-150 मीटर घाट निर्माण हेतु एक करोड़ व्यय किये गये। तथा 117 लाख की लागत से मनियारी नदी पर ताला एनीकट बनाया गया। आसपास के मंदिरों के जीर्णोद्वार के कार्य किये गये। ताला पहुंच मार्ग के दोनों ओर वृक्षारोपण कर हरियाली लाने का प्रयास किया गया। ताला से कुछ दूरी पर प्रसिध्द ऐतिहासिक स्थल मदकुद्वीप स्थित है। जहां प्रतिवर्ष मसीही मेला का आयोजन किया जाता है। द्वीप तीन ओर से शिवनाथ नदी और मनियारी नदी के संगम से घिरा हुआ है। वन विभाग द्वारा द्वीप में स्थित प्राचीनतम शिव मंदिरों का जीर्णोद्वार कराया गया है। विश्राम गृह का निर्माण तथा हरियाली के लिए वृक्षारोपण किये गये है। द्वीप के चारों ओर एक करोड़ की लागत से पीचिंग कर नदी के कटाव को रोका गया। द्वीप के समीप शिवनाथ नदी पर 15 करोड़ की लागत से एनीकट का निर्माण प्रगति पर है। साथ ही नदी के दोनों ओर 50-50 मीटर तक घाट निर्माण किया गया है।
जिले के प्रसिध्द धार्मिक स्थल रतनपुर के विकास के लिए चरणबध्द रूप से कार्य किया जा रहा है। प्राचीन नगरी और हैहय वंशीय राजाओं की राजधानी रतनपुर में पुरासंपदा यत्रतत्र बिखरे पड़े हुए है जिनके संरक्षण और संवर्धन के लिए कार्य किया जा रहा है। वन विभाग द्वारा यहां के प्रसिध्द लखनीदेवी मंदिर के सौंदर्यीकरण, सीमेंट कांक्रीट करण रोड, चबूतरा, मंदिर परिसर व सीढ़ियों में शेड निर्माण, उद्यान, पेयजल, शौचालय के कार्य कराये गये । लखनीदेवी से बादल महल, बैरागवन से महामाया मंदिर, रामटेकरी तक सर्कुलर रोड का निर्माण कराया जा रहा है। जहां एक स्थान से शुरू कर यात्री चारों स्थलों का भ्रमण एक ही सड़क पर चलते हुए कर सकेंगे। तालाबों की नगरी रतनपुर में लगभग 100 छोटे-बड़े तालाब है जिनमें बड़े तालाबों के सौंदर्यींकरण के लिए योजनाएं बनाई गई है। गिरजावन के बिकमा तालाब जो 53 एकड़ क्षेत्र में फैला है वहां मेड़, घाटो का मरम्मत, नये घाट निर्माण, वाटर स्पोर्टस, म्यूजिकल फाउटेन, बाल उद्यान, कैफेटेरिया आदि योजना पर कार्य चल रहा है। डिंडेश्वरी देवी की ऐतिहासिक व धार्मिक, पुरातात्विक स्थलीय मल्हार में भी सौदर्यीकरण एवं विकास के लिए लगभग एक करोड़ के कार्य चल रहे है। अंग्रेजों द्वारा 70 से 80 वर्ष पूर्व निर्मित खुड़िया व खूटांघाट को भी पर्यटन की दृष्टि से विकसित किया गया । यहां विश्रामगृह, उद्यान, सड़क निर्माण कार्य, पूर्ण कर लिया गया है।
अचानकमार अभ्यारण जिले को एक खास पहचान दिलाता है जहां शेरों की बहुलता है। यहां पाये जाने वाले शेरों के संरक्षण के लिए इसे 14वां टाईगर रिर्जव क्षेत्र घोषित किया गया है। जिले के उत्तरपश्चिम एवं सतपुड़ा के मैकलहिल के पूर्वी भाग में स्थित यह अभ्यारण लहरदार पहाड़ियों से घिरा हुआ है। यहां की जैव विविधता एवं सांस्कृतिक विरासत के कारण यह अचानकमार-अमरकंटक बॉयों स्फीयर रिजर्व कोर क्षेत्र भी है। कोर ऐरिया का गांवों का विस्थापन कार्य चल रहा है। बैगा बाहुल्य इस क्षेत्र में बैगा परिपथ केन्द्रीय निर्माण योजना के तहत टंगड़ी पठार, कबीर चबूतरा, तथा ऑरापानी में पर्यटन सुविधाओं के लिए रिसोर्ट निर्माण कार्य प्रगति पर है। अमरकंटक से लगे राजमेरगढ़ पहाड़ियों से लेकर पेण्ड्रा तक के क्षेत्र में इको पर्यटन स्थल विकसित करने की योजना पर कार्य जारी है। पहाड़ी स्थल राजमेरगढ़, आमाडोब, धरममुड़ा छपरवा में पर्यटक कुटीरो का निर्माण वन विभाग द्वारा किया गया है। जहां ठहरकर यात्री प्राकृतिक विषयों का आनंद ले सकते है। अमरकंटक के समीप जिले की सीमा में स्थित जलेश्वर धाम का जीर्णोद्वार एवं सौंदर्यीकरण का कार्य किया गया है। जहां प्रतिवर्ष हजारों श्रध्दालु विभिन्न नदियों का जल चढ़ाने आते है।
जिला मुख्यालय बिलासपुर से लगभग 15 किमी की दूरी पर कानन पेण्डारी उद्यान स्थित है। जिसे केन्द्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण नई दिल्ली द्वारा वर्ष 2005 में चिड़ियाघर का दर्जा दिया गया था। 106 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले कानन पेण्डारी में शेर, तेन्दुआ एवं भालू के लिए प्राधिकरण के निर्धारित मापदण्डों के अनुसार सेल व इनक्लोजर बनाया गया है। चिड़ियाघर में मनोरम उद्यान, बच्चों के लिए पार्क, झूले, टॉय ट्रेन आदि की व्यवस्था है। वृध्दजनों एवं नि:शक्तों की सुविधा के लिए बैटरीचलित वाहन की व्यवस्था की गई है।
बिलासपुर में पर्यटन की दृष्टि से किये जा रहे इन विकास कार्यों के द्वारा निश्चित ही जिला पर्यटन के लिए विशेष रूप से जाना जायेगा।











































