रायपुर 30 जून 2011

छत्तीसगढ़ के स्कूल शिक्षा मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल ने विदेश प्रवास के दौरान संयुक्त राज्य अमेरिका के सिएटल में स्कूल बोर्ड ऑफ डायरेक्टर श्री माइकल डे बेल से मुलाकात कर उन्हें छत्तीसगढ़ के आदिवासी बहुल क्षेत्रों के स्कूली बच्चों को उनकी बोलियों में प्रभावी ढंग से शिक्षा देने के लिए राज्य शासन द्वारा की गई विभिन्न तैयारियों एवं व्यवस्थाओं की जानकारी दी। 
श्री अग्रवाल ने उन्हें बताया कि छत्तीसगढ़ के आदिवासी बहुल क्षेत्रों में बहुभाषा की समस्या है। इन क्षेत्रों में एक ही कक्षा में अलग अलग बोली -भाषा के बच्चे पढ़ते हैं। इस समस्या को दूर करने के लिए शिक्षकों को समुचित प्रशिक्षण देने के साथ-साथ इन बच्चों के लिए बहुभाषी अध्ययन सामग्रियों का निर्माण कार्य किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ में राजभाषा छत्तीसगढ़ी के साथ ही स्थानीय बोलियों गोंड़ी, हल्बी, कुडुक, सादरी, सरगुजिया और छत्तीसगढ़ी पर आधारित अध्ययन सामग्रियां तैयार की गई है। आदिवासी बहुल क्षेत्रों के स्कूलों में कक्षा तीन से पांच तक स्थानीय बोलियों में तैयार शिक्षण सामग्रियों से भी पढ़ाई करायी जाती है। इसी प्रकार उन क्षेत्रों के मिडिल स्कूलों में छत्तीसगढ़ की राजभाषा छत्तीसगढ़ी पर आधारित अध्ययन सामग्रियों का भी उपयोग किया जाता है।
स्कूल बोर्ड के डायरेक्टर श्री माइकल डे बेल ने इस अवसर पर बताया कि बहुभाषा की समस्या अमेरिका जैसे विकसित राज्य में भी बढ़ गई है। अमेरिका में अनेक देशों के लोग पलायन कर बेहतर रोजगार के अवसर की तलाश में आते हैं और वहीं बस जाते हैं। नवप्रवासियों के बच्चों को स्कूलों में पढाने के लिए भाषा की समस्या सामने आती है। इन बच्चों को उनकी अपनी भाषा में अध्ययन के लिए मल्टीमीडिया सामग्रियों का भी इस्तेमाल किया जाता है। छत्तीसगढ़ के स्कूल शिक्षा विभाग प्रमुख सचिव श्री एम. के. राउत ने छत्तीसगढ़ के स्कूलों में आदिवासी बच्चों को आने वाली भाषा से संबंधित समस्याओं एवं उनके शालात्यागी बनने के कारणों के बारे में बताया।










































