रायपुर, 19 नवम्बर 2010।छत्तीसगढ़ के पर्यटन और संस्कृति मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल ने कहा है कि हाथ करघा बुनकरों का कुटीर उद्योग भारत की समृध्द प्राचीन परम्परा और संस्कृति का एक अभिन्न अंग है। इसमें रोजगार के साथ-साथ अतिरिक्त आमदनी की भी अच्छी संभावनाएं हैं इसे ध्यान में रखकर पूरे देश में हाथ करघा बुनकरों के परम्परागत व्यवसाय को संरक्षण और प्रोत्साहन के साथ नया जीवन देने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि बुनकरों की कलात्मक कारीगरी के और ज्यादा विकास के लिए उन्हें बेहतर प्रशिक्षण मिलना चाहिए और उनके द्वारा तैयार वस्त्रों तथा कपड़ों के लिए व्यापक स्तर पर बाजार भी दिलाना चाहिए। छत्तीसगढ़ में राज्य सरकार इसके लिए हर संभव प्रयास कर रही है।
श्री अग्रवाल ने आज यहां हाथ करघा निर्मित कपड़ों की राष्ट्रीय विक्रय प्रदर्शनी-नेशनल हैण्डलूम एक्सपो-2010 का शुभारंभ करते हुए इस आशय के विचार व्यक्त किए। स्थानीय शंकर नगर स्थित बी.टी.आई. मैदान में यह प्रदर्शनी आगामी नौ दिसम्बर तक चलेगी। इसका आयोजन प्रदेश सरकार के ग्रामोद्योग विभाग, छत्तीसगढ़ राज्य हाथ करघा विकास एवं विपणन सहकारी संघ तथा केन्द्रीय कपड़ा मंत्रालय के हाथ करघा प्रभाग द्वारा संयुक्त रूप से किया गया है। शुभारंभ समारोह को सम्बोधित करते हुए संस्कृति मंत्री श्री अग्रवाल ने आगे कहा कि नेशनल हेण्डलूम एक्सपो 2010 परम्परा और आधुनिकता का संगम है, जहां देश के विभिन्न्न राज्यों के हाथ करघा बुनकरों द्वारा तैयार कपड़ों के प्रदर्शन और विक्रय के लिए स्टाल लगाए गए हैं। एक्सपो में छत्तीसगढ़ के लोगों को किफायती दरों पर कपड़े मिलेंगे और उन्हें विभिन्न राज्यों के कपड़ों के डिजाइनों को समझने एवं जानने का मौका मिलेगा।
श्री अग्रवाल ने दीप प्रज्जवलित कर एक्सपो 2010 का शुभारंभ किया। छत्तीसगढ़ सरकार के ग्रामोद्योग मंत्री श्री पुन्नूलाल मोहले की अध्यक्षता में आयोजित शुभारंभ समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में संसदीय सचिव डॉ. सियाराम साहू, नगर निगम रायपुर की महापौर श्रीमती किरणमयी नायक, छत्तीसगढ़ राज्य हाथ करघा विकास एवं विपणन सहकारी संघ के अध्यक्ष श्री कमल लाल देवांगन और संचालक मंडल के सभी सदस्य उपस्थित थे। प्रदर्शनी में ग्राहकों को बीस प्रतिशत की विशेष छूट दी जा रही है। यह प्रदर्शनी प्रतिदिन दोपहर एक बजे से रात नौ बजे तक आम जनता के लिए खुली रहेगी।
शुभारंभ समारोह में संस्कृति मंत्री श्री अग्रवाल ने एक्सपो 2010 में शामिल होने वाले विभिन्न राज्यों के हाथ करघा बुनकरों का स्वागत करते हुए कहा कि जिस रूप में हाथ करघा वस्त्रों का प्रदर्शन किया जा रहा है। यह निश्चित ही हेण्डलूम को नई पहचान दिलाने में सहायक सिध्द होगा। उन्होंने कहा कि हाथ करघा से जुड़े बुनकरों के परम्परागत व्यवसाय को पुनर्जीवित करने और उनकी कला को सुरक्षित एवं संरक्षित करने के लिए हाथ करघा बुनकरों के बच्चों को पढ़ाई लिखाई के लिए प्रोत्साहित करने के साथ-साथ उन्हें प्रशिक्षित करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ शासन द्वारा बुनकरों के जीवन में खुशहाली लाने के लिए विभिन्न योजनाओं का संचालन किया जा रहा है जिसके कारण हाथ करघों की संख्या बढ़कर 10 हजार हो गयी है, जिसके माध्यम से बुनकरों को उनके घर पर ही रोजगार उपलब्ध हो रहा है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए छत्तीसगढ़ के ग्रामोद्योग मंत्री श्री मोहले ने कहा कि छत्तीसगढ़ सहित भारत की ग्रामीण अर्थ व्यवस्था को बेहतर बनाने में हाथ करघा की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने कहा कि बुनकरों के उत्थान के लिए हाथ करघा से निर्मित वस्त्रों को बेहतर बाजार दिलाने की जरूरत है। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ में नेशनल हैण्डलूम एक्सपो 2010 का आयोजन किया जा रहा है, जहां एक ही छत के नीचे विभिन्न राज्यों के हाथ करघा से निर्मित वस्त्रों का प्रदर्शन एवं विक्रय किया जा रहा है। श्री मोहले ने कहा कि नेशनल हेण्डलूम एक्सपो 2010 में छत्तीसगढ़ की प्रसिध्द कोसा साड़ियों के साथ ड्रेस मटेरियल, मध्यप्रदेश की चंदेरी और महेश्वर की साड़िया, महाराष्ट्र की पैठनी साड़ियां, गुजरात में निर्मित लहंगे, उत्तरप्रदेश की बनारसी साड़ियां, बिहार की भागलपुरी और खादी सिल्क, आसाम की प्रसिध्द मूंगा सिल्क, हरियाणा के फर्निशिंग वस्त्र और गलीचे, जम्मू कश्मीर के प्रसिध्द पश्मीना शॉल, राजस्थान की जयपुर रजाई, पंश्चिम बंगाल से कांथा और तांत साड़िया, पंजाब की कशीदाकारी पर आधारित कपड़े एवं हिमाचल प्रदेश और दिल्ली के प्रसिध्द हाथ करघा निर्मित कपड़ों के प्रदर्शन और विक्रय के लिए स्टाल लगाए गए है।
श्री मोहले ने कहा कि हाथ करघा से निर्मित वस्त्रों में बुनकराें के हाथों की हुनर के साथ उनकी
भावनाएं जुड़ी होती है। इससे उन्हें एक दूसरे की कारीगरी को जानने – समझने का मौका मिलेगा। श्री मोहले ने कहा कि राज्य में हाथ करघा वस्त्रों को बढ़ावा देने के लिए विगत वर्ष राज्य के प्रमुख शहरों में भी नेशनल हेण्डलूम एक्सपो का आयोजन किया गया, जहां हाथ करघा बुनकरों द्वारा तैयार वस्त्रों को अच्छा प्रतिसाद मिला। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की परम्परागत कोसा साड़ियां देश-विदेश में प्रसिध्द है। उनकी विशेष गुणवत्ताा के लिए हाल ही में केन्द्र सरकार द्वारा भौगोलिक संकेतक (जी.आई.) प्रमाण पत्र दिया गया है। उन्होंने कहा कि हाथ करघा से जुड़े लगभग 50 हजार बुनकरों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है और राज्य शासन इनके विकास के लिए भी कृत-संकल्पित है।
राज्य सरकार के संसदीय सचिव डॉ. सियाराम साहू ने कहा कि राज्य शासन द्वारा बुनकरों के विकास के लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इसी कड़ी में हाथ करघा से जुड़े बुनकरों के बच्चों को शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष प्रतिभावान छात्र-छात्राओं को प्रोत्साहन पुरस्कार स्वरूप नगद राशि, गणवेश और प्रशस्ति-पत्र दिया जाता है। वर्ष 2009-10 में 590 छात्र-छात्राओं को पुरस्कृत किया गया है। उन्होंने बताया कि प्रावीण्यता के आधार पर प्रोत्साहन पुरस्कार में 501 रूपये से लेकर पांच हजार 501 रूपये तक नगद पुरस्कार दिया जाता है।
नेशनल हेण्डलूम एक्सपो 2010 को नगर निगम रायपुर के महापौर श्रीमती किरणमयी नायक और छत्तीसगढ़ राज्य हाथ करघा विकास एवं विपणन सहकारी संघ के अध्यक्ष श्री कमल लाल देवांगन ने भी संबोधित किया। ग्रामोद्योग विभाग के सचिव श्री पी. रमेश कुमार ने विभाग द्वारा संचालित योजनाओं की जानकारी दी। विभाग के संयुक्त संचालक श्री एन.पी. देवांगन ने आभार व्यक्त किया।
Mr. Agarwal launched national sales exhibition of hand loom fabrics