प्रणव मुखर्जी को पत्र लिख टेक्स बढोतरी का निर्णय अव्यवहारिक .
सांसदों को चिट्ठी लिख दिल्ली में आवाज उठानें की मांग की .
रायपुर/26/03/2012/प्रदेश के लोकनिर्माण व शिक्षा मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने केंद्र सरकार द्वारा सराफा व्यवसाय पर लगाये गए उत्पादन शुल्क को वापस लेने एवं आयात शुल्क में पुर्निविचार करने केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी को पत्र लिखा है जिसमे उनके इस निर्णय को अव्यवहारिक करार दिया है, साथ ही लोकसभा की नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज,राज्यसभा के नेता प्रतिपक्ष अरुण जेठली सहित छत्तीसगढ़ के सभी सांसदों सर्वश्री दिलीप सिंह जुदेव,रमेश बैस,विष्णुदेव साय,दिनेश कश्यप,सोहन पोटाई,सुश्री सरोज पांडे,चरण दास महंत,श्रीमती कमला पाटले,मधुसूदन यादव,नंदकुमार साय, शिवप्रताप सिंह,मुरारीलाल सिंह,चंदूलाल साहू,गोपाल व्यास,मोतीलाल वोरा,मोहसिना किदवई,इंग्रिड मैक्लड को भी पत्र लिख इस महत्वपूर्ण विषय को सदन में रखनें की मांग उन्होंने की है.
श्री अग्रवाल ने पत्र में कहा है की प्रस्तावित टैक्स से छत्तीसगढ़ राज्य के सराफा व्यवसाय एवं कारीगरों पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ेगा । छत्तीसगढ़ जैसे छोटे एवं विकासशील राज्य के छोटे कारीगर एवं व्यापारियों को व्यापार करना मुश्किल हो जायेगा ।
श्री अग्रवाल ने कुछ वास्तविक तथ्य भी पत्र में लिखे जिसमे कहा की इस टेक्स वृद्धि से पूरे देश में लगभग 2 करोड़ स्वर्ग कारीगरों की जीविका पर प्रश्न चिन्ह लग जायेगा । पूरे देश में लगभग 1 करोड़ व्यापारी इस कर प्रावधान से प्रभावित होंगे । सेल्सटैक्स एवं इंकमटैक्स के साथ-साथ अब नया प्रस्तावित एक्साइज टैक्स से कागजी कार्यवाही बढ़ेगी न कि इंकम ? टैक्स की दर अधिक होने से अवैध व्यापार बढ़ेगा उपभोक्ताओं का नुकसान बढ़ जायेगा और इन्वेस्टमेंट की मानसिकता टूटने लगेगी ।
साथ ही उन्होंने कहा की विदेशों से आ रही अर्थ शक्ति सम्पन्न कंपनियों को इससे फायदा होगा ।हमारे देश के छोटे-छोटे व्यापारियों एवं कारीगरों का व्यापार समाप्त हो जायेगा । पिछले 3 वर्षों में सोने के भाव बढ़ने से पहले से ही व्यापार में मंदी छाई है । कारीगर खाली बैठे हैं, एक्साईज ड्यूटी लगने से वे अपने पांरपरिक व्यवसाय से पलायन कर जायेंगे ।
उन्होंने कहा की ब्राण्डेड ज्वेलरी पर एक्साईज ड्यूटी उनके वृहत पूंजी निवेश की क्षमता के हिसाब से तो ठीक है, परंतु छोटे व्यापारी एवं कारीगरों को भी ब्राण्डेड ज्वेलरी के समकक्ष रखते हुए उन पर भी एक्साईज ड्यूटी लगाना उचित नहीं है, यह पूर्णतः अव्यवहारिक है ।
इंर्पोट ड्यूटी भी बढ़ाये जाने पर सोने के मूल्य में वृद्धि हो गई है । अर्थात् कोई 10 ग्राम सोना खरीदता है तो पहले ढाई सौ रूपये देनी पड़ती थी, अब पन्द्रह सौ रू. देनी पड़ेगी। मतलब कोई सोना आज खरीदता है और कल बेचता है, तो रखे-रखे उसे पन्द्रह सौ रू. का नुकसान उठाना पड़ेगा । चूंकि सोने के जेवर का उत्पादन एक कमरे में या कह सकते हैं कि छोटी-छोटी यूनिटों में होता है, परिवहन में भी किसी बड़े साधन की जरूरत नहीं होती । छिपाई यूनिट, पॉलिश यूनिट, घिसाई यूनिट, डाइस एवं ढप्पा यूनिट, मीना एवं कलर यूनिट आदि । इन यूनिटों से पास होता हुआ एक हार, कंगन या टाप्स तैयार होता है । इन सभी यूनिटों का कार्य स्वतंत्र होता है, यह अत्यंत लघु एवं सूक्ष्म, कामगार या कारीगरी करने वाले होते हैं । ऐसे लोग खाता-बही कैसे रखेंगे, टैक्स लगने पर लागत बढ़ जायेगी एवं उपभोक्ताओं को अधिक मूल्य चुकाना होगा । तात्पर्य यह है कि सोने के उत्पादन पर एक्साईज ड्यूटी लगाना न केवल अव्यवहारिक है, बल्कि इसे सूचीबद्ध रखना कारीगरों के लिये असंभव है ।
उन्होंने कहा की सोना अत्यंत बहुमूल्य एवं तुरंत नगद प्रदान करने वाली धातु है, इसलिये ऐसे मूल्यवान धातु पर टैक्स कम से कम लगाना चाहिये । अब यह शौक या फैशन के लिये नहीं, बल्कि इन्वेस्टमेंट का भी प्रतीक बन गया है ।
उन्होंने वित्त मंत्री को पत्र लिख कहा की दस लाख की बिक्री पर ही पेन कार्ड आवश्यक किया जाये, न कि दो लाख की बिक्री पर नगद् खरीदी की सीमा बीस हजार से बढ़ाकर एक लाख किया जावे । जब सोने का भाव चार हजार रू. प्रति दस ग्राम था, तब नगद खरीदी की सीमा 20 हजार निर्धारित की गयी थी, अब जब सोने का भाव तीस हजार के आसपास है, तब भी नगद खरीदी की सीमा 20 हजार रू. ही है । सोने के बढ़ते भाव के हिसाब से यह अव्यवहारिक है। कम से कम एक लाख रू. नगद खरीदी पर छूट दी जानी चाहिये ।
श्री अग्रवाल ने कहा की किसानों, मजदूरों को भी अपनी छोटी-छोटी बचतों को टैक्स के रूप में देना पड़ेगा ।सन् 1990 में एक्साईज ड्यूटी को समाप्त किया गया था । अब पुनः 22 वर्षों बाद इसे लागू किया जा रहा है । अर्थात् सोने के व्यवसाय में विकास वाली बात की बजाय पीछे हटने की बात हो रही है ।