Wednesday, February 22, 2012

DSCF1738 14 दिवसीय राजीम कुंभ का समापन आज

शंकराचार्य निश्चलानंद जी का पावन सानिध्य और राज्यपाल शेखर दत्त होंगे मुख्य अतिथि

शाही स्नान के पूर्व अखाड़ों ने शस्त्र-निशानों को पूजा

महानाट्य “मर्यादा पुरषोत्तम” का हजारों ने उठाया आनंद

 

DSCF1632 300x225 14 दिवसीय राजीम कुंभ का समापन आजराजिम. त्रिवेणी संगम पर अंतिम दिन होने वाले शाही स्नान की तैयारियां पूर्ण हो चुकी है. देश भर से पहुंचे हजारों साधु संतो और अखाडों ने विधि विधानपूर्वक शास्त्रों की पूजा अर्चना की. जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती जी के पावन सानिध्य, राज्यपाल शेखर दत्त के मुख्य आतिथ्य, नेता प्रतिपक्ष रवीद्र चौबे की अध्यक्षता और संस्कृति एवं धर्मस्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल के विशिष्ट आतिथ्य मे गौवंश की रक्षा और प्रदेश मे राम राज्य की कल्पना साकार होने के संदेश के साथ ही 14 दिवसीय राजिम कुंभ 2012 का समापन आज शाम मुख्य मंच राजिम मे होगा। लाखों श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना के मद्देनजर देर रात्री संस्कृति मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने तैयारियों का जायजा लेकर अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश दिये।     

अखाडों ने किया शस्त्र पूजन…

कल 20 फरवरी को होने वाले शाही स्नान के पूर्व आज प्रातःकाल अखाडों ने शस्त्रों-निशान की पूजा अर्चना की. इस अवसर पर देश भर से पहुंचे अखाडों के महंतों सहित प्रेमानंद महाराज, प्रज्ञानंद महाराज सहित सैकडों साधु संतों ने हिस्सा लिया साथ ही अखाडों के महंतों ने अनेक शास्त्रों का प्रदर्शन भी किया. समारोह में श्रद्धालुओं और  संस्कृति विभाग के ओएसडी गिरीश बिस्सा, सुधीर दुबे, प्रताप पारख ने पूजा अर्चना में हिस्सा लिया. आज प्रातः होने वाले शाही यात्रा में इन अस्त्रों शस्त्रों और निशानो की शोभा यात्रा हाथी, घोड़ों, ढ़ोल ढमाके, बाजे गाजे के साथ निकाली जायेगी. प्रति वर्ष होने वाले इस कुंभ मे महाशिवरात्री को ब्रह्म मुहर्त मे निकलने वाली इस शोभा यात्रा को देखने देश प्रदेश से हजारों की संख्या मे लोग रात्रि से ही राजिम पहुँचने लगे है। त्रिवेणी संगम के संत समागम स्थल से निकलकार शहर के मुख्य मार्गो से होकर यह यात्रा निकलती है जिसका जगह-जगह भव्य स्वागत किया जाता है।    

समापन समारोह के विशिष्ट अतिथि के रूप में  कृषि मंत्री श्री चन्द्रशेखर साहू, खाद्य मंत्री पून्नूलाल मोहिले, लोकसभा सांसद श्री रमेश बैस, श्री चन्दूलाल साहू,  संसदीय सचिव श्री युद्धवीर सिंह जूदेव, छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के अध्यक्ष श्री कृष्ण राय, पूर्व सांसद श्री पवन दीवान, राजिम विधायक श्री अमितेष शुक्ल और कुरूद विधायक श्री लेखराम साहू, पर्यटन मण्डल के उपाध्यक्ष श्री विजय तिवारी उपस्थिति रहेंगे. इसके अलावा जिला पंचायत रायपुर की अध्यक्ष श्रीमती लक्ष्मी वर्मा, पूर्व शिक्षा मंत्री श्री अजय चन्द्राकर, पूर्व जिला पंचायत सदस्य संतोष उपाध्याय, नगर पालिका गोबरा नवापारा की अध्यक्ष श्रीमती देहुती साहू, भण्डार गृह निगम के अध्यक्ष श्री अशोक बजाज, नगर पंचायत राजिम की अध्यक्ष श्रीमती अंजना महाडि़क, जनपद पंचायत फिंगेश्वर की अध्यक्ष श्रीमती अन्नपूर्णा साहू, श्रीमती गिरिजा साहू श्री माधव सिंह ध्रुव सदस्य जनपद पंचायत मगरलोड के साथ-साथ देशभर से आये साधु संत और महामण्डलेश्वर भी उपस्थिति रहेंगे.

महानाट्य मर्यादा पुरषोत्तम का हजारों ने उठाया आनंद  

DSC 1314 14 दिवसीय राजीम कुंभ का समापन आज

श्री गंगा आरती व भगवान राजीव लोचन की पुजा अर्चना  एवं साधु संतो के आशीर्वचन और प्रवचन के बाद सांस्कृतिक कार्यक्र्रम प्रारंभ हुए. आचार्य संतोष व नागरिको के व्दारा गंगा आरती कर श्री राजीव लोचन का पूजन के पश्चात सांस्कृतिक आयोजन हुए जिसमे देर रात हुए भगवान राम पर आधारित महानाटक “मर्यादा पुरूषोत्तम” ने पूरे दो घंटे तक श्रद्धालुओं को बांधे रखा. ध्वनि, प्रकाष और 100 से ज्यादा कलाकारों के अभिनय पर केंिद्रत इस नाटयलीला का आनंद हजारों लोगों ने उठाया. विषेष तौर पर पर्यटन, संस्कृति और धर्मस्व मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल ने इस महानाटय को देखा और इसके डायरेक्टर सहित कलाकारों को सम्मानित भी किया. लगभग दो घंटे के इस महानाट्य में भगवान राम के सम्पूर्ण जीवन को उतारा गया है. खासतौर पर श्रवणकुमार और राजा दशरथ का दृष्य, सीता की अग्निपरीक्षा, जटायु गरूण का अनूठा चित्रण, हनुमान की पूंछ से लंका का दहन, भावनाओं को छूने वाले सुरीले गीत, डिजीटल ध्वनि मुद्रण और आधुनिक तकनीक से सजे संगीत, अतिभव्य रंगमंच, सेंटस, तीस हजार वाटस का साउंड, स्पेशल लाईट इफेक्टस, तत्काल बदलने वाला भव्य सेटस आदि ने महानाटय को सफल बनाने में पूरा योगदान दिया। इसके साथ ही साथ गोवर्धन देवांगन की पंडवानी, रजत दत्ता के सुगम गायन, ममता चंद्राकार,रायपुर, शिवकुमार तिवारी, बिलासपुर के लोकमंच को भी दर्शकों ने काफी सराहा।    

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आज के सांस्कृतिक आकर्षण:

त्रिवेणी संगम के सांस्कृतिक मंच पर कल 20 फरवरी को देश की सुप्रसिद्ध सुगम गायिका अनुराधा पौडवाल, मुंबई के साथ-साथ आंचलिक कलाकार कार्यक्रम देंगे जिनमें प्रमुख रूप से  राजकुमारी खुटैल, पहडोर का पंडवानी, प्यारे यादव, तुलसी का राऊत नाचा, सुरूज़ बाई खाँड़े, बिलासपुर, का भरथरी, रजनी रजक, भिलाई का ढोलामरु, सुनील तिवारी, रायपुर का छत्तीसगढ़ी फिल्मी संगीत और नृत्य का कार्यक्रम प्रमुख आकर्षण होंगे.

rajim kumbh सर्वधर्म समभाव का संदेश देता राजिम कुंभ   बृजमोहन

रायपुर/18/02/2012/संस्कृति मंत्री बृजमोहन अग्रवाल से उनके शंकर स्थित निवास पर मुलाकात कर आज सामाजिक कार्यकर्ता रेहाना खान के नेतृत्व में 50 मुस्लिम महिलाओं का समूह राजिम कुंभ दर्शन हेतु रवाना हुआ.

इस दौरान श्री अग्रवाल ने कहा की सर्वधर्म-समभाव का संदेश देता राजिम कुंभ इन दिनों आस्था का केंद्र बना हुआ है.देश भर के पांच हज़ार संत यहाँ पहुंचे हुए है .देश-विदेश से लोग त्रिवेणी संगम में स्नान हेतु राजिम कुंभ पहुँच रहे है. मानवीय संवेदनाओं को आत्मसात किये हुए संत-महात्माओं
के प्रवचन से यहाँ हर कोई प्रभावित हो रहा है. वैसे तो कुंभ को हिंदू आस्था का प्रतिबिम्ब माना जाता है परन्तु यहाँ सम्पूर्ण मानव प्रजाति के उत्थान के लिए प्रार्थना की जाती है.

उन्होंने कहा की भारत में विभिन्न धर्म और संप्रदाय के लोग निवास करते है .यहाँ सभी को पूरी तरह से धार्मिक स्वतंत्रता है.यहाँ सबसे अच्छी बात है की सभी धर्मों के लोग एक दूसरें के धर्मों का पूरा सम्मान करते है .यही विविधता में एकता है भारत की विशेषता है. खुशी की बात है मुस्लिम बहनें
राजिम कुंभ दर्शन करनें जा रही है.

राजिम कुंभ जाने वालो में शहनाज़ बेगम,कमरूनिशा,फरहा,चुन्नी,राना बेगम,आयशा बेगम,शैली परवीन आदि शामिल थी .

DSC04187A तीसरा पर्व स्नान, हजारों ने त्रिवेणी मे डुबकी लगा पुण्य लाभ कमायाDSC04188A तीसरा पर्व स्नान, हजारों ने त्रिवेणी मे डुबकी लगा पुण्य लाभ कमायाDSC04195A तीसरा पर्व स्नान, हजारों ने त्रिवेणी मे डुबकी लगा पुण्य लाभ कमायाDSC04200A तीसरा पर्व स्नान, हजारों ने त्रिवेणी मे डुबकी लगा पुण्य लाभ कमाया

राजिम कुंभ 2012 ग्यारहवाँ दिन लोकमंच और जगराता के नाम

DSC04184 225x300 तीसरा पर्व स्नान, हजारों ने त्रिवेणी मे डुबकी लगा पुण्य लाभ कमायारायपुर 17-2-2012। राजिम कुंभ 2012 के तीसरे पर्व स्नान विजया एकादशी मे हजारों लोगों ने अल सुबह त्रिवेणी संगम मे डुबकी लगाकर पुण्य लाभ कमाया। साधु संतो ने सबसे पहले ब्रह्म मुहर्त मे स्नान किया। मुख्य मंच राजिम मे गोधुली बेला से ही संतो, महामंडलेश्वरों, साधु, साध्वियों ने भक्तो को आशीर्वचन दिया। रात्रि सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शाम बाबी  मण्डल रायपुर के भजन, मोना सेन रायपुर के लोकमंच और मुंबई के प्रसिद्ध भजन गायक चरन जीत सिंह के नाम रही।

फागुन मास के कृष्ण पक्ष की यह विजया एकादशी समस्त एकादषी में तीसरे नम्बर की मानी गई है जो मनुष्य जीवन में विजय और सफलता की कामना चाहते हैं, उन्हें एकादशी का व्रत जरूर करना चाहिये. विशेषकर राजनीतिक और प्रशासनिक क्षेत्र के लोगो के लिए इसका बड़ा महत्तव है।  इसी महत्व को ध्यान में रखकर आज के पर्व स्नान में देर रात से ही हजारों श्रद्धालु आसपास के ग्रामों से राजिम पहुंचे और अल सुबह ही स्नान कर पुण्य लाभ कमाया। पर्व स्नान को लेकर राजिम-कुंभ प्रशासन ने भी संपूर्ण तैयारियां की थी   साधु-संतो के आश्रमों की व्यवस्था तथा मंदिरों में उमडने वाली भीड़ के मददेनजर सुरक्षा प्रबंध भी चाक चौबन्द किए गए थे।

कामधेनु यज्ञ प्रारंभ

DSC04290A 300x225 तीसरा पर्व स्नान, हजारों ने त्रिवेणी मे डुबकी लगा पुण्य लाभ कमायासंत समागम परिसर में 17 फरवरी से 19 फरवरी तक चलने वाला तीन दिवसीय कामधेनु यज्ञ स्वामी ज्ञान स्वरूपानंद ‘‘अक्रियजी‘‘ के सानिध्य में प्रारंभ हो गया है .

यज्ञ की शुरूआत सुबह 9ः15 बजे भव्य जलकलश यात्रा से हुई, जिसमें हजारों की संख्या में साधू-संतगण एवं श्रद्धालुगण शामिल हुए । संगम का जल लाने के लिए संत-समागम परिसर का भ्रमण करते हुए विशाल शोभा यात्रा का आयोजन किया गया था। शोभा यात्रा में परम्पूज्य डाॅ. बिन्दू जी महाराज, परम्हृदय बालयोगी बलराम दास जी, श्री महंत विनोदगिरी जी महाराज, दण्डी स्वामी जी सहित हजारों की संख्या में साधू-संत एवं गणमान्य नागरिक शामिल थे । शोभा यात्रा में छत्तीसगढ़ की ग्रामीण जनता ने अधिक संख्या में भाग लिया ।

कामधेनु समिति के अध्यक्ष नवीन अग्रवाल कार्यकारी अध्यक्ष सेन कुमार बोथरा एवं भुनेश्वर साहू ने बताया कि यज्ञ में बैठने वाले यजमान छत्तीसगढ़ के हर जिले से आयेंगें । उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ से 15 जिलों से श्रद्धालुगण सपत्नीक भाग ले रहे हैं । 17 फरवरी को प्रारंभिक यज्ञ में इक्कीस जोड़े भाग लिये, जबकि 18 फरवरी से अंतिम दिन तक इनक्यावन जोड़े यज्ञ में बैठेगें ।

स्वामी ज्ञानस्वरूपानंद अक्रियजी ने कहा कि कामधेनु महायज्ञ भगवान राम के पूर्वज राजा दिलीप ने त्रेता युग में कराया था ।

सरस्वती यज्ञ में चार सौ छात्र-छात्राएं शामिल हुये

प्रतिवर्ष महामेरू पीठ के दण्डी स्वामी सच्चिदानंद महाराज  द्वारा विभिन्न प्रकार के यज्ञ का आयोजन किया जाता हैं। इस वर्ष भी संत समागम के अवसर पर प्रत्येक दिन अलग-अलग यज्ञ उनके कुंभ स्थल स्थित उनकी कुटियां में संपन्न हो रही हैं। इसी क्रम में 17 फरवरी को सरस्वती यज्ञ का आयोजन किया गया। जिसमें कुंभ में पधारें सभी संत-महात्मागण शामिल हुये।

महामेरू पीठ के दण्डी स्वामी सच्चिदानंद महाराज ने सरस्वती यज्ञ केे उद््देश्यों के बारे में बताया कि भारतीय संस्कृति का अनुकरण बच्चों के माध्यम से होनी चाहिये। यदि सनातन धर्म को बचाना है तोे बच्चों में धर्म का संस्कार डालना ही होता हैं। उन्हेंाने बताया कि प्रतिवर्ष कुंभ के दौरान कक्षा 5वी औंर 8वी मेें प्रथम तीन प्रावीण्यता क्रम प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं को प्रोत्साहन धन राशि एवं प्रमाण पत्र उनके द्वारा प्रदान की जाती हैं।

सरस्वती यज्ञ का आयोजन सुबह 9ः00 बजे संत दण्डी स्वामी के सानिध्य में शुरू हुआ, जिसमें विभिन्न स्कूलों के चार सौ बच्चें तथा बड़ी संख्या में साधु-संत व गणमान्य नागरिक शामिल हुये। उन्होंने बताया कि 18 फरवरी को उमावती यज्ञ संपन्न किया जायेगा। 

पत्रकारों और उद्योगपतियों भी शामिल हुए

राजधानी रायपुर से प्रसिद्ध उद्योगपति और पत्रकार संस्कृति मंत्री बृजमोहन अग्रवाल के साथ आज शाम राजिम कुंभ पहुंचे। मुख्य मंच मे श्री अग्रवाल ने सभी का स्वागत स्मृति चिन्ह देकर किया। इसमे प्रमुख रूप से कौशल मिश्रा, रामचंद नचरानी, शंकर पांडे, प्रशांत शर्मा,  रामवतार तिवारी, सलमान रवि, राजेश अग्रवाल, अरुण खेतान, सुनील नामदेव, धनवेंद्र जायसवाल, प्रियंका कौशल, विकास शर्मा सहित अनेक पत्रकार और उद्योगपति उपस्थित थे।

आज के आकर्षण

लोमेश पटेल भोथीडिह का जसगीत, लक्ष्मीकांत सेन रायपुर का त्रिव्त बैंड, डी. एन. नंबदूरी खैरागढ़ का तालकचहरी, अश्वनी शर्मा भिलाई का भजन, अमर श्रीवास भिलाई का लोकमंच, दुकालु यादव रायपुर का जगराता, सहित विशेष आकर्षण ‘मर्यादा पुरषोत्तम’ लाईट एंड साउंड का कार्यक्रम होगा।

DSCN6559A तीसरा पर्व स्नान, हजारों ने त्रिवेणी मे डुबकी लगा पुण्य लाभ कमाया

DSC 0511 विजया एकादशी पर तीसरा पर्व स्नान आज   राजिम कुम्भ 2012 DSC 0536 विजया एकादशी पर तीसरा पर्व स्नान आज   राजिम कुम्भ 2012

देर रात तक बांधे रखा स्थानीय कलाकारों और चंदन दास के भजनो ने

रायपुर 16-2-2012। ’राजिम कुंभ’ 2012 का तीसरा स्नान पर्व कल 17 फरवरी विजया एकादशी को ब्रम्हमुहुर्त में संपन्न होगा। छत्तीसगढ़ के प्रयाग राज राजिम के त्रिवेणी संगम मे स्नान कर पुण्य लाभ कमाने हजारों की संख्या मे श्रद्धालुओं के आने की संभावना है। भगवान राजीव लोचन और कुलेश्वर महादेव के दर्शन और स्नान के लिए सपरिवार दूरदराज से भक्तों का राजिम पहुंचने का सिलसिला देर रात तक जारी रहा. दूसरी ओर, पर्यटन व संस्कृति मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल ने स्नान-पर्व की तैयारियों का जायजा लिया तथा संत समागम से लेकर श्रद्धालुओं के आवास, भोजन, प्रसाद व अन्य तैयारियों के साथ-साथ राजिम-कुंभ स्थल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अधिकारियों को निर्देशित किया. 

     राजिम के विद्वान पं. ब्रह्मदत्त शास्त्री ने बताया कि राजिम-कुंभ का यह तीसरा पर्व स्नान है. कल की विजया एकादशी समस्त एकादषी में तीसरे नम्बर की एकादशी मानी गई है जो फागुन मास के कृष्ण पक्ष में आती है. शास्त्री जी के अनुसार जो मनुष्य जीवन में विजय और सफलता की कामना चाहते हैं, उन्हें एकादशी का व्रत जरूर करना चाहिये. इसी महत्व को ध्यान में रखकर कल के पर्व स्नान में शामिल होने के लिये देर रात हजारों श्रद्धालु आसपास के ग्रामों से राजिम पहुंचे और उनके आने का सिलसिला जारी था. पर्व स्नान को लेकर राजिम-कुंभ प्रशासन ने भी संपूर्ण तैयारियां की जिसमें जलकुण्ड में पानी की सुनिश्चितता, साधु-संतो के आश्रमों की व्यवस्था तथा मंदिरों में भीड़ उमडने के मददेनजर सुरक्षा प्रबंध पर विशेष ध्यान रखा गया है.

संत समागम

मुख्य मंच में आज शाम आयोजित संत समागम की अध्यक्षता बीकानेर राजस्थान से पधारे महामंडलेश्वर राजगुरु स्वामी विशोकानन्द जी महाराज ने की. इस अवसर पर उपस्थित महामंडलेश्वर स्वामी आनंद चैतन्य सरस्वती जी हरिद्वार, महामंडलेश्वर श्री स्वामी प्रेमानंद जी महाराज हरिद्वार, महामंडलेश्वर स्वामी शिव प्रेमानंद जी महाराज हरिद्वार, आचार्य श्री जालेश्वर जी महाराज अयोध्या, स्वामी नारायनानंद जी महाराज माटुंगा मुंबई महाराष्ट्र, तांत्रिक योगी श्री रमेश जी महाराज इलाहबाद, पू. माता दर्शना ज्योति जी हरिद्वार, साध्वी अरुणा भारती जी छतरपुर, ब्रह्म कुमार श्री नारायण भाई, साध्वी रंजना दीदी उत्तरकाशी, डॉ.स्वामी जीवनानंद चैतन्य जी महाराज आदि ने भी अपने प्रवचनो का लाभ उपस्थित भक्तों को दिया.        

सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ

DSC 05251 300x199 विजया एकादशी पर तीसरा पर्व स्नान आज   राजिम कुम्भ 2012 स्थानीय और राष्ट्रीय स्तर के कलाकारों की प्रस्तुतियाँ शाम से लेकर देर रात तक श्रद्धालुओं को बांधे रख रही है। आज की प्रस्तुतियों मे दीपक साहू, बोंदल का जसगीत, भारती बंधू रायपुर का भजन, जाकिर हुसैन कोरबा का जसगीत/फिल्म संगीत, भारत भूषण, परगनिया भिलाई का लोकमंच, डॉ. पीसी लाल यादव, गंडई का लोकमंच और मुंबई के प्रसिद्द भजन और गजल गायक चंदन दास प्रमुख रही।

आज के सांस्कृतिक आयोजन

शत्रुघन नेताम, चैकी का पंडवानी, भगत साहू, रायपुर का लोकगीत, रमादत्त जोशी रायपुर की  पंडवानी, बाबी मण्डल, रायपुर का संगीत एवं भजन, चरन जीत सिंह, मुंबई का जगराता भजन मुख्य मंच के प्रमुख आकर्षण होंगे. 

DSC 0532 विजया एकादशी पर तीसरा पर्व स्नान आज   राजिम कुम्भ 2012

 

छत्तीसगढ़ का नाम माता कौशल्या के नाम पर हो – कपिलानंद जी

रायपुर. राजिम कुंभ के त्रिवेणी संगम पर स्थित मुक्ताकाशी मंच पर देर रात तक चलने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों में हजारों की संख्या में आस पास और दूर दराज से आने वाले भक्त नृत्य, गीत, लोकमंच और भजनों का लुफ्त उठा रहे है वहीं बड़ी संख्या में  श्रद्धालु गोधुली बेला से प्रारंभ होने वाले देश के प्रख्यात साधू संतो के प्रवचन का श्रवण कर पुण्य लाभ भी अर्जित कर रहे है.

प्रवचनों की श्रंखला में आज शाम कपिलानंद महाराज ने कहा की ऋषि मुनियों की तपः स्थली और राम के जननी की जो जन्म भूमि को  छत्तीसगढ़ के बजाय कौशल्या राज्य होना चाहियें. सांस्कृतिक कार्यक्रमों में छत्तीसगढ़ की अन्तराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त पंडवानी गायिका तीजन बाई, लोकमंच कलाकार और लोकगीत गायिका सीमा कौशिक के साथ साथ धनबाद के भजन गायक सुशील बाजेजा की प्रस्तुति प्रमुख रही.

दिल्ली से पधारें कपिलानंद जी महाराज ने कहा कि राजिम कंुभ की शुरूआत और प्रतिवर्ष का यह आयोजन छत्तीसगढ़ सरकार का अहम् कदम हैं। उन्होंने राजिम की महत्ता बताते हुये कहा कि जो भूमि ऋषि मुनियों की तपः स्थली रही, भगवान राम के जननी की जो जन्म भूमि हैं, महानदी का जहाॅ संगम हैं और जहां प्रतिवर्ष संतो का समागम होता हैं उसे छत्तीसगढ़ के नाम से क्यों पुकारा जाता हैं। यह धर्म, प्रेम, भक्ति की भूमि हैं। इसका नाम तो कौशल्या राज्य होना चाहियें। उन्होंने तर्क देते हुये कहा कि जब बंबई का नाम मुंबई, कलकत्ता का नाम कोलकाता, मद्रास का नाम चेन्नई हो सकता है तो छत्तीसगढ़ का नाम कौशल्या के नाम पर क्यों नहीं हो सकता..

वृंदावन से पधारें पुरूषोत्तम जी महाराज ने कहा कि जहां संतों का समागम हो वही कुंभ होता हैं। उन्होंने ने बताया छत्तीसगढ़ माता कौशल्या के अलावा एक और माता की जन्म भूमि हैं और वह माता शबरी हैं, जिसके नाम पर शिवरीनारायण नगर बसा हुआ हैं। उन्होंने कहा कि शबरी का नाम कोई नहीं लेता। दरअसल छोटे का नाम कोई नही लेता। सभी बड़े का नाम लेना पसंद करते हैं। शबरी को भगवान का जो भक्ति -प्रेम मिला वह अतुलनीय हैं । उन्होंने कहा कि माता कौशल्या का मंदिर बनाने के साथ-साथ माता शबरी का भी छोटा-सा मंदिर बनाया जाना चाहिये।

संत प्रेमानंद जी महाराज ने कार्यक्रम का संचालन करते हुये कहा कि प्रत्येक मनुष्य के मन में कामना होती हैं कि हमारे जीवन में सुख-शंाति और आनंद बना रहे और इसलिये प्रयास भी करते हैं, फिर भी अनेक प्रकार के दुःख, क्लेश जीवन में आते रहते हैं, तब हम इन कष्टों से मुक्ति का उपाय खोजते रहते हैं। इसलिये ऐसी स्थिति में महापुरूषों की शरण में जाना चाहिये, तभी कष्टों का निवारण होगा और मुक्ति मिल सकेगी।यह शाश्वत सत्य है कि जब दुख और तकलीफें आती हैं, तब ईश्वर का स्मरण आता है, और तब हम ईश्वर का ध्यान करते हैं। काशी से पधारे ब्रम्हचारी विवेकचेतन जी महाराज कहते हैं कि धर्म, अर्थ, काम तथा मोक्ष व्यक्ति को सहज उपलब्ध हो जाता हैं। उन्होने अर्थ शब्द के और भी 5 अर्थ बताये जिनमें अर्थ, शब्दाशय, प्रयोजन, वित्त तथा इन्द्राशय है.

पण्डोखर दरबार में उमड़ी भीड़

DSCN0152A तीजन की पंडवानी और सुशील बजेजा के सुरमयी भजनों के नाम रही आज की शाम

राजिम कुंभ में त्रिकालदर्शी अनंत विभूषित युवा संत श्री गुरूशरण जी महाराज ’’पण्डोखर सरकार’’ का त्रिकालदर्शी दिव्य दरबार 14 फरवरी से प्रारंभ हो गया हैं। श्रद्धालुगण बड़ी संख्या मे दरबार शुरू होने से बहुत पहले ही पहुंच रहे है। आज से यह दरबार नियमित रूप से प्रतिदिन सुबह 11.00 बजे से प्रारंभ  होकर रात्रि 9.00 बजे तक संपन्न होगा।

उल्लेखनीय है कि अनन्त श्री विभूषित त्रिकालदर्शी संत श्री गुरूशरण जी महाराज के दरबार में आने वाले दुखी पीडि़त जनों की दैविक एवं भौतिक समस्याओं का समाधान अपनी दिव्य दृष्टि से जानकर बताते हैं। महाराज श्री किसी भी व्यक्ति या दुखित पीडि़त व्यक्ति से पूछे बिना पहले से ही उसकी भावनाओं, बाधा व्याधियों और अन्य समस्त प्रकार की परेशानियों के बारे में अर्जी पत्र पर लिखकर रख लेते है। जो भी व्यक्ति अपनी जिस पीड़ा को दरबार में व्यक्त करता हैं, वह सब सत्य रूप में महाराज श्री पण्डोखर सरकार द्वारा लिखें अर्जी पत्र में उल्लेखित रहता हैं।

श्री पण्डोखर सरकार का कहना है कि सदकार्य में सहयोगी की प्रशंसा होनी चाहिये । साथ ही साथ विघ्न संतोषी नही होंगे तो चेतना नही होगी और कोई कार्य बगैर चेतना के भव्य और दिव्य नही हो सकता।

‘‘छत्तीसगढ़ के कौशल्यानंदन राम‘‘ – बिंदू जी महाराज द्वारा विमोचित

DSCN0144 तीजन की पंडवानी और सुशील बजेजा के सुरमयी भजनों के नाम रही आज की शाम

राजिम महाकुंभ में संत डाॅ. बिंदू महाराज ने ‘‘छत्तीसगढ़ के कौशल्या नंदन राम‘‘ नामक पुस्तक का विमोचन किया। राम वन गमन शोध संस्थान के अध्यक्ष एवं छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम के अध्यक्ष श्याम बैस, प्रधान संपादक डाॅ. मन्नूलाल यदु के साथ अशोक गंगवाल एवं अनेक साधु-संतों व राजिम कुंभ टास्कफोर्स समिती की उपस्थिति में लोकार्पण हुआ।पुस्तक में कौशल्या माता की जन्मभूमि चंदखुरी आरंग आदि क्षेत्र के बारे में विस्तार से बताया गया है वहीं भगवान राम लोमश ऋर्षि आश्रम में भी काफी समय तक रहे। वनवास काल में ऋर्षि आश्रम, छत्तीसगढ़ के मूल निवासी और राक्षसों के त्रिकोण से यहां आसुरी शक्ति का नाश हुआ था। छत्तीसगढ़ के सरगुजा, दक्षिण कोसल और बस्तर क्षेत्र के लोगों ने राम जी के वनवास में अहम भूमिका निभाई थी।

शांति की राह- योगेंद्र साहेब

संत समागम के मुख्य मंच पर आज कबीर साहेब के इलाहाबाद प्रयाग के संस्थान पारख संस्थान के संत श्री अभिलाष दास जी के संत साहेब श्री योगेंद्र साहेब जी ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा- कि आज मानव दुखित और दुःख कारण है उसकी अन्नत इच्छायें दुःखों से निवृत्त पाने का मनुष्य जीवन ही एक साधन है परन्तु मुनष्य जीवन को पाकर दुःखों से निवृत का काम नहीं करता और दुःख ही बटोरता है, सुख चाहता है, लेकिन चाहत के साथ का नहीं करता आखिर सुख मिलेगा कैसे सुख चाहते है तो सुख देने वाला कर्म करना पड़ेगा । यही दुःख निवृत का प्रयास है । भटका हुआ मन यह समझता है कि कोई दूसरा हमें दुःख देता है जबकि सच्चाई है कोई दूसरा उसे दुःख या सुख नहीं देता परन्तु अपने ही कर्मो का फल उसे दुःख या सुख के रूप में मिलता है।

सांस्कृतिक कार्यक्रम

सांस्कृतिक कार्यक्रम में सीमा कौशिक के लोकमंच व सुशील बाजेजा के भजनों नें श्रध्दालुओं का मन मोह लिया। पद्मभूषण तीजन बाई की पण्डवानी को लोगों ने काफी सराहा। स्थानीय कलाकार परशुराम चन्द्राकर एवं नवलदास मानिकपुरी ने राजीवलोचन पर भजनों की शानदार प्रस्तुति से दर्शकों की वाहवाही लुटी। वहीं स्कूली बच्चों ने भी सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश किये।

16 फरवरी के मुख्य कार्यक्रम

दीपक साहू, बोंदल का जसगीत, भारती बंधू रायपुर का भजन, जाकिर हुसैन कोरबा का जसगीत/फिल्म संगीत, भारत भूषण, परगनिया भिलाई का लोकमंच, डॉ. पीसी लाल यादव, गंडई का लोकमंच और मुंबई के प्रसिद्द भजन और गजल गायक चंदन दास की प्रस्तुतियाँ होगी १६ फरवरी का सांस्कृतिक आकर्षण.

DSCN0141 जानकी जयंती पर हजारों ने किया त्रिवेणी संगम में स्नान राजिम कुंभ २०१२DSCN0129 जानकी जयंती पर हजारों ने किया त्रिवेणी संगम में स्नान राजिम कुंभ २०१२

नागा साधुओं की पेशवाई रही आकर्षण का केंद्र

जय प्रकाश के भजन और अनु सिन्हा के फ्यूजन कत्थक ने समां बांधा

रायपुर. साधु-संत व दर्जनभर अखाड़ों के साथ साथ लाखों श्रद्धालुओं ने राजिम के पवित्र त्रिवेणी संगम में डुबकी लगा कर पुण्य लाभ अर्जित किया.संत समागम का शुभारंभ होने के बाद कुंभ की शेष गतिविधियां तेज हो गयी है। इसी क्रम में आज नागा साधुओं ने स्थानीय दत्तात्रेय मंदिर में भगवान श्री दत्तात्रेय की पूजा अर्चना कर अपनी पेशवाई दी। इसके पूर्व त्रिवेणी संगम के मुक्ताकाशी मुख्य मंच पर संत समागम किया गया जिसमे साधू संतो ने ओजस्वी प्रवचन दिए. सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में जय प्रकाश के भजन और अनु सिन्हा के फ्यूजन कत्थक ने समां बांधा.

संगम में डुबकी लगाने  तथा मंदिरों में पूजा-अर्चना कर भगवान राजीवलोचन व कुलेष्वर महादेव के दर्षन कर सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मांगने दूरदराज से आये भक्तों का आना अल सुबह से है प्रारंभ हो गया था.  साधु-संतों और नागा बाबाओं ने ब्रहम मुहुर्त में ही स्नान किया. उल्लेखनीय है कि जानकी जयंती के दिन ‘राजिम कुंभ‘ में दूसरा स्नान पर्व होता है. मान्यता है कि यह दिन मां जगदम्बा जानकी के प्राकट्य की पावन तिथि है. आज के दिन मिथिला नरेष राजा जनक के खेत में हल से भूमि के जोते जाने के समय उसके सीत से स्पर्ष करके जो देवी प्रकट हुईं उन्हंें सीता कहा गया और जनकदुलारी होने से ये मां जानकी के नाम से जानी जाती हैं. इसी किवदती को मान्यकर पौराणिक काल से जानकी जयंती मनाई जा रही है. इसी तादात्मय में आज का स्नान पर्व बिना किसी विध्न बाधा के साथ संपन्न हुआ. राजिम कुंभ प्रशासन  द्वारा सुरक्षा के चाक चौबंद प्रबंध किये गये थे.

वही नागा साधुओं ने बैड बाजों की धुनों के साथ दत्तात्रेय मंदिर परिसर में लगभग तीन घंटे तक पूजा अर्चना करते रहे. इस दौरान उन्होंने अखाड़े का पदर्शन भी किया .उनकी पूजा अर्चना एवं सेवा में मंदिर के सर्वराकार कमलनारायण पुरी गोस्वामी के सुपुत्र रामकुमार गोस्वामी, दिलीप गोस्वामी, किशोरी गोस्वामी तथा सहयोगी शंकरलाल और गोपी अवसरिया ने सहयोग प्रदान किया।

सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रंखला में नागपुर के सुप्रसिद्ध भजन गायक जय प्रकाश शर्मा के भजनों ने जंहा श्रद्धालुओं को भक्ति सागर में गोते लगवाए वहीँ दिल्ली की अनु सिन्हा ने अपने कत्थक नृत्य से समां बांधा. आज की अन्य प्रस्तुतियों में अश्वनी दुबे हाथ खोज का भजन, सुनीता भाले, खैरागढ़ भजन, चेतन देवांगन, पाहादा पंडवानी, दीपक चंद्राकर, अर्जुन्दा लोकमंच, ममता शिंदे, दुर्ग लोकमंच प्रमुख रही.

आज के सांस्कृतिक कार्यक्रम  

कुंभ २०१२ के आठवें दिन पद्म भूषण तीजन बाई, भिलाई की पंडवानी, सुशील बाजेजा, धनबाद का भजन सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में मुख्य आकर्षण होगा साथ ही साथ परसुराम चंद्राकर, जाता की पंडवानी, नवल दास मानिकपुरी भिलाई, भजन, सीमा कौशिक रायपुर, लोकमंच होगा.  

श्री सांई की निकली भव्य पालकी यात्रा

स्थानीय श्री शिरडी सांई दरबार से भव्य पालकी यात्रा गीत नृत्य एवं बैड बाजों की धुनो के साथ नगर भ्रमण कर कुलेश्वर मंदिर पहंुची। पालकी यात्रा की सुबह 6 बजे गरियाबंद मार्ग स्थित श्री संाई दरबार में विशेष पूजा अर्चना की गई इसके पश्चात दोपहर 12 बजे विधिवत मध्यान आरती की गई आरती के पश्चात भक्तों के लिए आम भंडारा की व्यवस्था की गई थी। श्रीसांई बाबा के लिये सुसज्जित पालकी बनाया गया था। जिस पर बाबा को आसीन कर पालकी यात्रा निकाली गई । यह यात्रा सर्वप्रथम भगवान दत्तात्रेय मंदिर जल टंकी चैक, बस स्टैण्ड, शिवाजी चैक, गायत्री मंदिर, श्रीराजीवलोचन होते हुए संत समागम परिसर होते हुए श्री कुलेश्वर महादेव मंदिर पहुंची। पालकी यात्रा में हजारों की संख्या में श्रीसांई भक्त श्रद्धालु शामिल हुए पालकी यात्रा में कृष्णा यादव नृत्य (सेमरा-चम्पारण्य) आर्कषण का केेंद्र रहा, उल्लेखनीय है कि प्रतिवर्ष कुंभ महोत्सव के अवसर पर श्रीसांई सेवा संस्थान राजिम द्वारा बाबा की पालकी यात्रा निकाली जाती है।

गाय बचेगी तो, संस्कृति बचेगी

सांस्कृतिक एवं पर्यटन मंत्री माननीय बृजमोहन अग्रवाल के द्वारा गौ सेवा-गौ रक्षा रथ का पूजन किया गया था। यह रथ पूरे छत्तीसगढ़ में भ्रमण करते हुये आज दोपहर राजिम पहुंचा। वर्तमान राजिम कंुभ मेला में रथ भ्रमण करते हुये जन-जन को गौ सेवा-गौ रक्षा का प्रेरणा दे रही हैं। एवं गौ माता पर भव्य व विशाल प्रदर्शनी भी लगायी गयी। साथ ही कामधेनु महायज्ञ का प्रदर्शन स्थल पर आयोजन किया जा रहा हैं। वृंदावन मथुरा से पधारें कार्यक्रम के आयोजक- संत श्री सुभाष जी महाराज ने बताया, गाय हमारी संस्कृति की मूल आधार हैं। और इसकी रक्षा के लिये तन, मन, धन से समाज को संगठित होना चाहिये  और आगे आना चाहिये।

विजया एकादशी पर सरस्वती पूजन

 दण्डीस्वामी श्री सच्चिदानंद तीर्थ जी महाराज (बिलासपुर) द्वारा राजिम कुंभ 2012 के अवसर पर विजया एकादशी के पावन पर्व पर सरस्वती पूजन किया जायेगा, जिसमें रायपुर एवं राजिम सहित अंचल भर के विभिन्न स्कूलों के छात्र-छात्राऐं शामिल होंगें । आयोजक  दंडी स्वामी ने बताया कि विद्यार्थियों के उत्साहवर्धन के लिये यह आयोजन पिछले छः वर्षो से किया जा रहा है, इस आयोजन का उद्देश्य विद्यार्थियों में धर्म एवं अध्यात्म के संस्कार उत्पन्न करना है । आज के व्यस्त एवं दूषित पर्यावरण से बच्चों को दूर रखकर उनके मनोमस्तिष्क स्वस्थता एवं उज्जवल भविष्य विकास के लिए यह आयोजन प्रतिवर्ष कुंभ महोत्सव के दौरान किया जाता है । बच्चों का बौद्धिक व चारित्रिक निर्माण के लिये आज के परिप्रेक्ष्य में इस तरह के आयोजन की महती आवश्यकता है ।

DSC 0495a राजिम कुंभ २०१२ के आंठवे दिन अनु सिन्हा एवं ग्रुप दिल्ली के फ्यूजन कत्थक नृत्य ने समां बांधाDSC 0499a राजिम कुंभ २०१२ के आंठवे दिन अनु सिन्हा एवं ग्रुप दिल्ली के फ्यूजन कत्थक नृत्य ने समां बांधाDSC 0500a राजिम कुंभ २०१२ के आंठवे दिन अनु सिन्हा एवं ग्रुप दिल्ली के फ्यूजन कत्थक नृत्य ने समां बांधा

DSC 0469A छत्तीसगढ़ में रामराज्य की कल्पना साकार हुई जगद्गुरू शंकराचार्यDSC 0186A1 छत्तीसगढ़ में रामराज्य की कल्पना साकार हुई जगद्गुरू शंकराचार्य

राजिम कुंभ 2012 – मीडिया सेंटर

जगद्गुरू शंकराचार्य ज्योतिष एवं द्वारकापीठाधीश्वर श्री स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती का संदेश.

हजारों साधुओं की उपस्थिति में ‘संत-समागम‘ की गरिमामय शुरूआत

दूसरा पर्व स्नान जानकी जयंती आज, रविन्द्र जैन के भजनों ने रंग जमाया

DSC 0475 300x199 छत्तीसगढ़ में रामराज्य की कल्पना साकार हुई जगद्गुरू शंकराचार्यरायपुर. हजारों साधु-संत व दर्जनभर अखाड़ों की मौजूदगी में आज विराट ‘संत समागम‘ का शुभारंभ हुआ. इस अवसर पर जगद्गुरू शंकराचार्य ज्योतिष एवं द्वारकापीठाधीश्वर श्री स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने अपने संदेश में कहा कि अब तक देश में चार कुंभ ही आयोजित होते हैं लेकिन प्रतिवर्ष आयोजित होने वाला राजिम-कुंभ देश का पहला कुंभ है. उन्होंने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि साधु-संतों ने जिस रामराज्य की कल्पना देखी थी, उसे छत्तीसगढ़ सरकार ने साकार किया है जहां धर्म की गंगा बह रही है और साधु-संतों के सम्मान में पूरी सरकार खड़ी रहती है. उन्होंने कहा कि जैसा कर्म करेंगे, वैसा फल मिलेगा. छत्तीसगढ़ के लोगों ने अच्छे कर्म किये हैं तभी उन्हें राजिम-कुंभ के माध्यम से साधु-संतों का आर्शीवाद मिल रहा है.

बताते चलें कि अस्वस्थता के चलते जगद्गुरू शंकराचार्य संत समागम में शामिल नहीं हो सके लेकिन उनके आर्शीवाद संदेश का पाठन उनके प्रतिनिधि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने किया. कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे धर्मस्व, संस्कृति व पर्यटन मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि कुंभ में संत समागम की शुरूआत सात साल पहले हुई थी. कुंभ के आयोजन की सफलता ही है कि राजिम अब गरियाबंद जिला बन गया और विकास की धुरी बन गया है. त्रिवेणी संगम में 20 करोड की लागत से एनीकट बनाया गया जिससे पानी की समस्या खत्म हुई है. इसी तरह महानदी के उपर करोडों की लागत से नया पुल बनाया गया है जिससे कुंभ में आवागमन और सरल हुआ है. यह सब उपलब्धियां राजिम-कुंभ की देन है और हम साधु संतांे ंके आर्शीवाद से प्रगति कर रहे हैं. श्री अग्रवाल ने बताया कि जगतगुरू शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती और मुख्यमंत्री डॉ. रमनंिसह खराब स्वास्थ्य के चलते संत समागम में शामिल नंहंी हो सके.

अंचल के विधायक अमितेष शुक्ल ने राजिम को धार्मिक नगरी बताते हुए कहा कि देशभर से आये साधु-संतों ने इसकी गरिमा और महत्ता बढ़ाई है. राजिम महोत्सव अब कुंभ में तब्दील हो गया है जिसके लिये बृजमोहन अग्रवाल बधाई के पात्र हैं. उन्होंने मांग रखी कि राजीवलोचन की नगरी से शराबबंदी व सटटेबाजी पर पूरी रोक लगाई जाये. सांसद चंदूलाल साहू ने कहा कि राजिम-कुंभ साधु-संतों के दर्शन व आर्शीवाद पाने का माध्यम बना है और उनके मार्गदर्शन से हम अपने को पहचान पाये हैं. उन्होंने कहा कि देश-प्रदेश निरंतर प्रगति करे और विश्व गुरू बने, हम सदमार्ग पर चलें, यही इस अवसर पर भगवान से प्रार्थना है. कृषि मंत्री श्री चंद्रशेखर साहू ने सभी साधुसंतों का स्वागत किया और प्रदेश की तरक्की के लिये आर्शीवाद मांगा. खाद्य मंत्री पुन्नूलाल मोहिले ने साधु-संतों का अभिनंदन करते हुए कविता में अपनी भावना रखते हुए कहा कि साधु संतों की उपस्थिति से हम धन्य हो गये हैं और उनके आर्शीवाद से राजिम-कुंभ दिन प्रतिदिन ख्याति अर्जित कर रहा है.

इसके पूर्व संत समागम की शुरूआत त्रिवेणी संध्या आरती व भगवान राजीवलोचन की आरती व पूजा अर्चना के साथ हुई. पं. ब्रहमदत्त शास्त्री ने अपनी पंडित परिषद के साथ आरती एवं पूजन का विधान संपन्न कराया. पाटेश्वर धाम के संत श्री बालकदास जी महाराज ने अपने आर्शीवचन में कहा कि जहां संत समाज है, वहंी कुंभ हो सकता है. राजिम-कुंभ इसका प्रतीक बना है. लोग यहां से शांति और सात्विकता का संदेश लेकर जाते हैं जहां मन के पाप धुल जाते हैं तथा मोक्ष और सुख की कामना पूरी होती है. छत्तीसगढ राज्य की सरकार संतों की सेवा में समर्पित रही है, वहंी साधु-संत भी उदारता के साथ इसमें शिरकत करते हैं. इसी के चलते प्रदेश खुशहाली की ओर अग्रसर है. यहां की जनता में शांति, अपनत्व और बंधुभाव बना रहे, यही कामना है. इस अवसर पर परम् श्रद्धेय महाण्डलेश्वर श्री स्वामी प्रज्ञानंद जी महाराज (दिल्ली) ने भी संबोधित किया.
साधु संतों में प्रमुख रूप से मंच पर परम श्रद्धेय महामंडलेश्वर बालयोगी श्री मोहन दास दी महाराज रामायणी (हरिद्वार), परम श्रद्धेय महामंडलेश्वर स्वामी प्रेमानंद जी महाराज (मुम्बई), संत कवि श्री पवन दीवान जी महाराज, तपस्वी सत महात्यागी श्री बालकदास जी महाराज (पाटेश्वरधाम), त्रिकालदर्शी संत श्री गुरूशरण दास जी पंडोखर सरकार जी (झॉसी), आचार्य श्री स्वामी कपिलानंद जी महाराज (दिल्ली), श्रद्धेय आचार्य श्री जालेश्वर जी महाराज (अयोद्धया), डॉ. स्वामी श्री बिंदु जी महाराज (हैदराबाद), दण्डिस्वामी श्री सच्चिदानंद तीर्थ जी महाराज (बिलासपुर), श्री महंत स्वामी दयानंद गिरीजी महाराज (काशी), श्रद्धेय स्वामी जीवानंद जी महाराज (इंदौर), श्री ब्रम्हाचारी विवेकानंद जी महाराज (काशी), श्रद्धेय स्वामी पुरूषोत्तमाचार्य जी महाराज (वृंदावन), महंत श्री साधवी रंजना देवी जी (हरिद्वार), ब्रम्हकुमारी पूज्य पुष्पा बहनजी (नवापारा), श्री महंत माता दर्शना ज्योति जी (हरिद्धार), श्री महंत पुरी बेन (हरिद्धार), श्री महंत राधा रश्मि माता (हरिद्वार), श्री महंत ललिता गिरी जी माता (हरिद्वार), श्री श्रद्धेय गोपाल शास्त्री जी (वाराणसी) आदि संत प्रमुख रूप से संत समागम के साक्षी बने.

संत समागम समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में पूर्व सांसद पवन दीवान, छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के अध्यक्ष श्री कृष्ण राय, भण्डार निगम के अध्यक्ष अशोक बजाज, उपाध्यक्ष विजय तिवारी, जिला पंचायत रायपुर की अध्यक्ष श्रीमती लक्ष्मी वर्मा, पूर्व जिला पंचायत सदस्य संतोष उपाध्याय, नगर पालिका गोबरा नवापारा की अध्यक्ष श्रीमती देहुती साहू, नगर पंचायत राजिम की अध्यक्ष श्रीमती अंजना महाड़िक, जनपद पंचायत फिंगेश्वर की अध्यक्ष श्रीमती अन्नपूर्णा साहू,, श्री गिरिजा साहू, व श्री माधव सिंह धु्रव सहित गरियाबंद जिले के कलेक्टर दिलीप वासनीकर, एसडीएम श्री के.पी. ओगरे, अपर कलेक्टर व मेला अधिकारी रमेश शर्मा उपस्थित थे.

हजारों साधु-संत राजिम-कुंभ पहुंचे

दूरस्थ प्रदेशों से आने वाले नागा साधुओं का आगमन क्रमशः प्रतिदिन होने लगा है. इस वर्ष अन्य वर्षो से अधिक भीड़ होने के कारण कुंभ के शेष धार्मिक पर्व एवं अन्य कार्यक्रम बड़ी धूमधाम एवं गरिमामय ढ़ंग से पूरे होंगे. संत संमागम की पूर्व संध्या तक लगभग 527 नागा बाबाओं का दल यहा पहुंच चुका है. अनुमान है कि अब तक पांच हजार से ज्यादा साधु संत रािजम-कुंभ पहुंच चुके हैं जिसमें प्रमुख तौर पर निर्वाणी अखाडा, श्री पंचायती अखाडा पडाव, पंचायती अखाडा महानिर्वाणी, श्री पंचायती अखाडा आनंद, श्री पंचायती अखाडा आवाहन, श्री जूना अखाडा निर्मला पंचायती अखाडा, श्री अखिल भारतीय पंच रामानंदी निर्मोही अखाडा, श्री पंच रामानंदी संतोषी अखाडा, पंच रामानंदी निर्वाणी अखाडा, पंच रामानंदी महानिर्वाणी अखाडा, पंच रामानंदी निरालंबी अखाडा, खाकी अखाडा आदि के साधु संत शामिल हैं.

उल्लेखनीय है कि राजिम-कुंभ का विशेष आकर्षण संत समागम होता है जिसमें प्रदेश और देश के दस हजार से ज्यादा साधु-संत हिस्सा लेते हैं. इसकी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं. दस लाख वर्गफीट से ज्यादा के स्थल पर दर्जन भर से ज्यादा आश्रम, कुटियां और आवास तैयार किये गये हैं साथ ही मुख्य प्रवचन मंच, सांस्कृतिक मंच जैसे विशालकाय पंडाल तैयार किये गये है. प्रसाद और भोजन के लिये विशालकाय डोम तैयार हुआ है. धर्मस्व व संस्कृति मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल ने देर रात तक पूरे मेले स्थल का भ्रमण किया और संत समागम पहुंचकर तैयारियांे व व्यवस्था के संबंध में दिशा निर्देश देते रहे.

दंडी स्वामी का सरस्वती यज्ञ 17 को

प्रतिवर्ष की तरह इस वर्ष भी राजिम कुंभ में दंडी स्वामी जी का 17 फरवरी को सरस्वती यज्ञ का आयोजन किया जाना है. जिसमें रायपुर जिले एवं धमतरी, गरियाबंद के 500 से अधिक बच्चे इस यज्ञ में भाग लेगे. 18 फरवरी को श्रीराजीवलोचन मंदिर में एकादशी के अवसर पर वे छग के निवासी व पूरे प्रदेश के सुख समृद्धि की कामना हेतू पूजा अर्चना करेंगें. 19 फरवरी को भारत के कोने कोने से आये संतों द्वारा ज्योतिष एवं आध्यात्मिक कांन्फें्रस आयोजित की गई हैं. 20 फरवरी को 108 औषधियों तथा स्वर्ण आभूषण के साथ संस्कृति मंत्री बृजमोहन अग्रवाल द्वारा पूर्णाहूति के साथ यज्ञ का समापन किया जावेगा.
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DSC 1280 शंकराचार्य की उपस्थिति में विराट ‘संत समागम‘ का आज शुभारंभ  राजिम कुंभ का छठवां दिन: DSC 1373 शंकराचार्य की उपस्थिति में विराट ‘संत समागम‘ का आज शुभारंभ  राजिम कुंभ का छठवां दिन:  

संत आसाराम जी का प्रवचन सुनने व आर्शीवाद लेने लाखों की भीड़ उमड़ी

आज  विराट ‘संत समागम‘ का शुभारंभ

मुख्यमंत्री सहित देश-प्रदेश के साधु संत शामिल लेंगे

DSC 1268 300x199 शंकराचार्य की उपस्थिति में विराट ‘संत समागम‘ का आज शुभारंभ  राजिम कुंभ का छठवां दिन: रायपुर. राजिम-कुंभ 2012 के विराट संत समागम की शुरूआत कल 13 फरवरी को त्रिवेणी संगम पर होगी जिसका शुभारंभ ज्योतिष एवं द्वारका शारदापीठाधीश्वर जगतगुरू शंकराचार्य श्री स्वरूपानंद सरस्वती की उपस्थिति और उनके आर्शीवचन के साथ होगा. देश-प्रदेश से पधारे हजारों साधु संतों की मौजूदगी संत समागम समारोह को अभिनंदित करेगी. कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री डाॅ. रमन सिंह होंगे जबकि अध्यक्षता धर्मस्व व संस्कृति, पर्यटन मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल करेंगे.

संत समागम के विशिष्ट अतिथि खाद्य मंत्री पुन्नूलाल मोहिले, कृषि मंत्री चंद्रशेखर साहू,, सांसद चन्दूलाल साहू, संसदीय सचिव युद्धवीर सिंह जूदेव, पूर्व सांसद पवन दीवान, विधायक अमितेष शुक्ल, कुरूद विधायक लेखराम साहू, राज्य वित आयोग के अध्यक्ष अजय चंद्राकर, छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के अध्यक्ष श्री कृष्ण राय, भण्डार निगम के अध्यक्ष अशोक बजाज, उपाध्यक्ष विजय तिवारी, जिला पंचायत रायपुर की अध्यक्ष श्रीमती लक्ष्मी वर्मा, पूर्व जिला पंचायत सदस्य संतोष उपाध्याय, नगर पालिका गोबरा नवापारा की अध्यक्ष श्रीमती देहुती साहू, नगर पंचायत राजिम की अध्यक्ष श्रीमती अंजना महाडि़क, जनपद पंचायत फिंगेश्वर की अध्यक्ष श्रीमती अन्नपूर्णा साहू,, श्री गिरिजा साहू,, श्री माधव सिंह धु्रव, उपस्थित रहेंगे.

महाशिवरात्रि पर ‘बं‘ का जाप करें: संत आसाराम

DSC 1409 शंकराचार्य की उपस्थिति में विराट ‘संत समागम‘ का आज शुभारंभ  राजिम कुंभ का छठवां दिन:

दूसरी ओर आज रविवार को संत आसाराम जी बापू के प्रवचनों को सुनने व उनका आर्शीवाद लेने के लिये लाखों श्रद्धालु राजिम-कुंभ में उमड पडे. दूरदराजBapuji12 1 300x212 शंकराचार्य की उपस्थिति में विराट ‘संत समागम‘ का आज शुभारंभ  राजिम कुंभ का छठवां दिन: से बापू के भक्तजन अपने परिवार के साथ पहुंचे और उनके प्रवचन का रसपान किया. अनुमान है कि आज तीन लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने तथा पूरे चार दिन में पन्द्रह लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने संत आसाराम जी के प्रवचनों का लाभ उठाया. श्री बापूजी ने आज अपने संदेश में कहा कि आगामी महाशिवरात्रि में लाखों मंत्रों का जाप करें आपकी मनोकामना पूरी होगी. अपने चिरपरिचीत अंदाज में बापूजी ने खेल-खेल में हसते-हंसाते अध्यात्म ज्ञान प्रदान करते हुए कहा कि जैसे सांप, बीन का आवाज सुनकर अपना जहरीला स्वभाव छोड देता है उसी प्रकार ओम कार जपने वाला अपना स्वभाव छोडकर ईश्वरी स्वभाव में अपना स्वभाव विलय कर देता है. ओमकार के दीर्घ उच्चारण से रोग शोक,चिन्ता मिटकर ईश्वरीय चेतना का संचार होता है. बापूजी ने ओमकार मंत्र का वैज्ञानिक विश्लेषण व प्रयोगो का संदर्भ देते हुए कहा कि ओमकार मंत्र का गुंजन करने से मरी हुई कोशीकाए भी जीवीत हो जाती हैं. मस्तिष्क जिगर व पेट के विभिन्न अंग सक्रीयता से कार्य करने लगते हैं. सात बार ओम कार का गुंजन करने से जापक का चित्त इस ब्रम्हाण्ड को पार कर अनन्त ब्रम्हाण्डों के साथ तदाकार कर देता है. यदि कोई व्यक्ति प्रति दिन गुरू उपदिष्ट मार्ग से 120 माला ओमकार की जप करे और निषिध्द कर्मो का त्याग करे तो उसे एक वर्ष मंे ही परमात्म प्राप्ति हो सकती है.

नागा साधुओं ने लहराई धर्म ध्वजा

 

DSCN2525 शंकराचार्य की उपस्थिति में विराट ‘संत समागम‘ का आज शुभारंभ  राजिम कुंभ का छठवां दिन:

DSCN2531 300x225 शंकराचार्य की उपस्थिति में विराट ‘संत समागम‘ का आज शुभारंभ  राजिम कुंभ का छठवां दिन: संत समागम स्थल पर देश के विभिन्न अखाड़ों से आये 300 से ज्यादा नागा साधुओं ने आज लोमस ऋषि आश्रम में धर्म ध्वजा फहराई और राजिम-कुंभ का शंखनाद किया. ऐसा माना जाता है कि नागा साधुओं की धर्मध्वजा फहरने के बाद ही कुंभ की शुरूआत होती है. धर्मस्व व संस्कृति मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल ने नागा साधुओं के बीच पहुंचकर उनसे मुलाकात की तथा सारी व्यवस्थाओं का जायजा लेते हुए साधुओं के लिये पर्याप्त सुविधाएं देने के निर्देश आयोजन समिति को दिये. दूरस्थ प्रदेशों से आने वाले नागा साधुओं का आगमन क्रमशः प्रतिदिन होने लगा है. इस वर्ष अन्य वर्षो से अधिक भीड़ होने के कारण कुंभ के शेष धार्मिक पर्व एवं अन्य कार्यक्रम बड़ी धूमधाम एवं गरिमामय ढ़ंग से पूरे होंगे. संत संमागम की पूर्व संध्या तक लगभग 527 नागा बाबाओं का दल यहा पहुंच चुका है.

अनुमान है कि कल तक पांच हजार से ज्यादा साधु संत रािजम-कुंभ पहुंचेंगे जिसमें प्रमुख तौर पर निर्वाणी अखाडा, श्री पंचायती अखाडा पडाव, पंचायती अखाडा महानिर्वाणी, श्री पंचायती अखाडा आनंद, श्री पंचायती अखाडा आवाहन, श्री जूना अखाडा निर्मला पंचायती अखाडा, श्री अखिल भारतीय पंच रामानंदी निर्मोही अखाडा, श्री पंच रामानंदी संतोषी अखाडा, पंच रामानंदी निर्वाणी अखाडा, पंच रामानंदी महानिर्वाणी अखाडा, पंच रामानंदी निरालंबी अखाडा, खाकी अकाडा के अलावा तंत्र मंत सम्राह डाॅ बिन्दु जी महाराज भी पधार रहे हैं. इसके अलावा श्री जडेश्वर महाराज अयोध्या, श्री पंडोखर सरकार व श्री महामण्डलेष्वर प्रज्ञानंद जी संत समागम में उपस्थित होंगे. छत्तीसगढ के सुप्रसिद्ध संत राम बालकदास जी महराज का आश्रम भी सज-धज चुका है. वे अपने भक्तों के साथ संत समागम में उपस्थित रहेंगे. संत समागम का शुभारंभ आज: राजिम-कुंभ का विशेष आकर्षण संत समागम होता है जिसमें प्रदेश और देश के दस हजार से ज्यादा साधु-संत हिस्सा लेते हैं. इसकी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं. दस लाख वर्गफीट से ज्यादा के स्थल पर दर्जन भर से ज्यादा आश्रम, कुटियां और आवास तैयार किये गये हैं साथ ही मुख्य प्रवचन मंच, सांस्कृतिक मंच जैसे विशालकाय पंडाल तैयार किये गये है. प्रसाद और भोजन के लिये विशालकाय डोम तैयार हुआ है. धर्मस्व व संस्कृति मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल ने आज देर रात तक पूरे मेले स्थल का भ्रमण किया और संत समागम पहुंचकर तैयारियांे व व्यवस्था के संबंध में दिशा निर्देश देते रहे.

दंडी स्वामी का सरस्वती यज्ञ 17 को

प्रतिवर्ष की तरह इस वर्ष भी राजिम कुंभ में दंडी स्वामी जी का 17 फरवरी को सरस्वती यज्ञ का आयोजन किया जाना है. जिसमें रायपुर जिले एवं धमतरी, गरियाबंद के 500 से अधिक बच्चे इस यज्ञ में भाग लेगे. 18 फरवरी को श्रीराजीवलोचन मंदिर में एकादशी के अवसर पर वे छग के निवासी व पूरे प्रदेश के सुख समृद्धि की कामना हेतू पूजा अर्चना करेंगें. 19 फरवरी को भारत के कोने कोने से आये संतों द्वारा ज्योतिष एवं आध्यात्मिक कांन्फें्रस आयोजित की गई हैं. 20 फरवरी को 108 औषधियों तथा स्वर्ण आभूषण के साथ संस्कृति मंत्री बृजमोहन अग्रवाल द्वारा पूर्णाहूति के साथ यज्ञ का समापन किया जावेगा.

पंडवानी और भजन ने श्रोताओं का मनोरंजन किया

राजिम-कुंभ में एक तरफ जहां आशाराम बापू के भक्ति संदेश की रसधार बही, वहीं मुक्ताकाशी सांस्कृतिक मंच पर श्रोताओं को कई मनमोहक प्रस्तुतियां देखने को मिली. सायं से ही स्थानीय कलाकारांे ने रोचक प्रस्तुतियां दी जिसमें खेमबाई की पंडवानी, खुशीदास मानिकपुरी का चैका, टोमिनबाई की पंडवानी, भिलाई के प्रभंजय चतुर्वेदी का भजन, रायपुर के दुकालु यादव का जगराता, कोलका के डाॅ. पुनुराम साहू का लोकमंच, रायपुर के मनोज सेन का लोकमंच तथा दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र नागपुर के कलाकारों ने धार्मिक और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं.
भजन गायक रविन्द्र जैन की सांस्कृतिक संध्या कल

कल संत समागम के अवसर पर देश के सुप्रसिद्ध भजन गायक रवीन्द्र जैन शाम को 6 बजे भजनों की प्रस्तुति देंगे. इसके अलावा बागबाहरा के किशुन लाल पाटले का पंथी नृत्य, रामदास कुर्रे का लोकमंच, खुमान साहू का डंडा नृत्य, उडीसा के कलाकारों की गीत व नृत्यों की प्रस्तुति तथा दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र नागपुर के कलाकारों का अभिनय व नृत्य विशेष आकर्षण लिये होगा. 

 

DSC 05011 लाखों भक्तों पर चढ़ा संत आसाराम जी का सम्मोहन राजिम कुंभ का पांचवा दिन

लाखों श्रद्धालु प्रवचन सुनने व आर्शीवाद लेने कुंभ पहुंचे, बापू के प्रवचन का आज अंतिम दिन.

पं. विजयशंकर मेहता की ‘महाभारत‘ ने दिया जीवन-संदेश

2 199x300 लाखों भक्तों पर चढ़ा संत आसाराम जी का सम्मोहन राजिम कुंभ का पांचवा दिनरायपुर. राजिम-कुंभ के पांचवे दिन प्रख्यात संत आसाराम बापू ने आत्मा और परमात्मा के बीच के संबंधांे की व्याख्या करते हुए कहा कि जगत में परमात्मा का ही प्रकाश व्याप्त है. आत्मा का प्रकाश वास्तव में परमात्मा का ही प्रकाश है. परमात्मा का प्रकाश देखने के लिये मन का प्रकाश जरूरी है. दूसरी ओर प्रसिद्ध प्रवचनकार पं. विजयशंकर मेहता ने कहा कि जिस भक्त को भगवान का आर्शीवाद मिल जाये, उसके अमर हो जाने की सोच गलत है क्योंकि मृत्यु इस संसार का सबसे बड़ा सत्य है.

राजिम-कुंभ 2012 इस वर्ष ज्यादा प्रभावी होकर उभरा है. अभी मात्र पांच दिन ही हुए हैं और कुंभ में श्रद्धालुओं का तांता उमड़ चुका है. आज शनिवार होने के कारण स्थिति यह थी कि संत समागम से लेकर मुख्य सांस्कृतिक मंच तक श्रद्धालुओं के सिर ही सिर नजर आ रहे थे. इसकी वजह देश के प्रख्यात संत आसाराम बापू की प्रवचनमाला है जो पिछले तीन दिन से जारी है. आज उन्हें सुनने तीन लाख से ज्यादा भक्तों की भीड़ राजिम-कुंभ पहुंची तथा उनके प्रवचन और आर्शीवाद का लाभ उठाया. लाखों वर्गफीट के खचाखच भरे दरबार में भक्तों को संबोधित करते हुए संत आसाराम जी ने कहा कि आत्मा को रस चाहिये. ये रस तीन प्रकार के होते है: आदि भौतिक रस, सात्विक रस जिसमें भक्ति तथा शांति आते है. तीसरा रस भगवान में लीन रहता हैं. परम रस का संबंध सीधा अंतरमन से है. इसमें बुरी आदतें छूट जाती है. अंतर्यामी भगवान का मंत्र ऊँ प्रभु है. इस मंत्र के उच्चारण से 72 लाख नाडि़यों में चेतना का संचार हो जाता है.

भक्ति-संगीत से सजी प्रवचनमाला में संत आसाराम जी ने भक्तों को संदेश देते हुए कहा कि ताली दोनों हाथों से धीरे-धीरे बजाना चाहिये. जोर से ताली बजाने से शक्ति का ह्ास होता है. उन्होंनें रस के आनंद पर कहा कि शराब का प्याला छलकाने के बजाए हरि नाम का प्याला पीयें. इससे सारी जिंदगी सुधर जायेगी. यह अंतरात्मा का रस है. ओंकार का गूंजन करने से मन मधुर हो जाता हैं. इस स्थिति में हिलना-ढुलना भी नहीं चाहिये. भगवान ऊँ कार की शांति में डूबते जाने से रग-रग शांत और पवित्र होते जायेगा. बापू के प्रवचनों को सुनने और उनका आर्शीवाद लेने के लिये आज शनिवार को भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा. संत समागम से लेकर मुख्य सांस्कृतिक मंच तक सिर ही सिर दिखाई दे रहे थे और सभी आसाराम जी को सुनने को आतुर थे.

राजिम-कुंभ में पहली बार सानिध्य दे रहे संत आसाराम जी को सुनने के लिये ग्राम्य, अंचल, प्रदेश और देश से श्रद्धालु सपरिवार यहां पहुंचे हैं जिनके आवास और प्रसाद की पर्याप्त व्यवस्था मेला समिति द्वारा की गई है. राजधानी से भी हजारों परिवार आज कुंभ स्थल पहुंचे तथा आसाराम जी को सुनने का इंतजार करते रहे. उनका आर्शीवाद लेने के लिये भक्त आतुर दिखाई दिये. श्री आसाराम जी ने आगे कहा कि आत्मा-परमात्मा को अपना मानस जो जीता है, वह उदार होता है. वह जगत की भलाई करता है. आदमी जब बुरा और नीरस होत जाता है, वह कठोर और निर्दय स्वभाव का बन जाता है. ऐसी स्थिति में हम रसपान करने पड़ोसी के यहा जाते हैं अथवा अन्य कई मनोरंजन का रास्ता खोजते है ताकि उनकी नीरसता दूर हो सके.

संत आसाराम जी को सुनने का अंतिम मौका: संत आसाराम जी बापू की प्रवचनमाला का कल 12 फरवरी को अंतिम दिन होगा. रविवार होने के चलते लाखों श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है. उनके प्रवचनों को लाइव प्रसारण के जरिये सौ से ज्यादा देशों में सुना जा रहा है. आज शनिवार को उन्हें तीन लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने सुना. अनुमान है कि कल रिकार्डतोड़ भीड़ उमड़ सकती है. पर्यटन एवं संस्कृति विभाग ने इस विशाल आयोजन की व्यवस्था में कोई कोर-कसर बाकी नहीं रखी है.

कथाकार पं. विजयशकर मेहता

DSC 06121 300x248 लाखों भक्तों पर चढ़ा संत आसाराम जी का सम्मोहन राजिम कुंभ का पांचवा दिनएक तरफ संत आसाराम जी के प्रवचन जारी हैं तो दूसरी ओर प्रसिद्ध कथाकार पं. विजयशकर मेहता ने राजिम-कुंभ में महाभारत और भगवान कृष्ण पर ज्ञानवर्द्धक व्याख्यान दिया. उन्होंने महाभारत की कथा को सामने रखते हुए समझाया कि यदि भगवान आपके साथ हैं तो यह नहीं समझना चाहिये कि आपकी मृत्यु नहीं होगी क्योंकि मृत्यु तो अटल सत्य है जिससे भगवान भी नहीं बच पाये. अभिमन्यु की मौत के बाद द्रौपदी ने भगवान कृष्ण से पूछा कि आपका साथ मिलने के बावजूद उसकी मृत्यु कैसे हो गई! श्री मेहता ने आगे कहा कि युद्ध लडते हुए भी सत्य असत्य, अधिकार नियम और मान अपमान का ख्याल कैसे रखा जाये, इसे महाभारत पढ़कर समझा जा सकता है.

श्रेष्ठ कार्यक्रमों ने समा बांधा

 

DSC 1088 लाखों भक्तों पर चढ़ा संत आसाराम जी का सम्मोहन राजिम कुंभ का पांचवा दिन

राजिम-कुंभ में एक तरफ जहां आशाराम बापू के भक्ति संदेश की रसधार बही, वहीं मुक्ताकाशी सांस्कृतिक मंच पर श्रोताओं को कई मनमोहक प्रस्तुतियां देखने को मिली. सायं से ही स्थानीय कलाकारांे ने रोचक प्रस्तुतियां दी जिसमें ईश्वरी साहू की पंडवानी, रविशंकर व्यास का गीत रामायण, कांति बरलोटा व कविता देशमुख का भजन, इकबाल खां का भजन, मीना साहू की पंडवाणी, खुमान साव व ननकी ठाकुर का लोकमंच, राजेश मिश्रा का देशभक्ति गीत के साथ-साथ दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र नागपुर के सौजन्य से विभिन्न राज्यों के कलाकारों द्वारा लोकनृत्य की प्रस्तुति दी गई. आंचलिक और प्रादेशिक कलाकारों ने सधे हुए अभिनय और मंझे हुए संगीत के साथ मंत्रमुगध कर देने वाली प्रस्तुतियां दीं.

कल 12 फरवरी के सांस्कृतिक आकर्षण: कल रविवार को जो सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देखने-सुनने को मिलेंगी, उनमें प्रमुख रूप से खेमबाई की पंडवानी, खुशीदास मानिकपुरी का चैका, टोमिनबाई की पंडवानी, भिलाई के प्रभंजय चतुर्वेदी का भजन, रायपुर के दुकालु यादव का जगराता, कोलका के डाॅ. पुनुराम साहू का लोकमंच, रायपुर के मनोज सेन का लोकमंच तथा दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र नागपुर के कलाकार रोचक प्रस्तुतियां देंगे.
संत समागम का शुभारंभ 13 को, तैयारियां पूर्ण: राजिम-कुंभ का विशेष आकर्षण संत समागम होता है जिसमें प्रदेश और देश के दस हजार से ज्यादा साधु-संत हिस्सा लेते हैं. इसकी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं. दस लाख वर्गफीट से ज्यादा के स्थल पर दर्जन भर से ज्यादा आश्रम, कुटियां और आवास तैयार किये गये हैं साथ ही मुख्य प्रवचन मंच, सांस्कृतिक मंच जैसे विशालकाय पंडाल तैयार किये गये है. प्रसाद और भोजन के लिये विशालयकाय डोम तैयार हुआ है. धर्मस्व व संस्कृति मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल ने आज देर रात तक पूरे मेले स्थल का भ्रमण किया और संत समागम पहुंचकर तैयारियांे व व्यवस्था के संबंध में दिशा निर्देश देते रहे.

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श्री असाराम बापू श्री बृजमोहन अग्रवाल को राजिम कुम्भ में आशीर्वाद देते हुए | 

IMG 0686 राजिम मेला में मानव अधिकार आयोग का प्रचार प्रसार

राजिम, 10 फरवरी 2012,

छत्तीसगढ़ राज्य मानव अधिकार आयोग की टीम ने आज एक दिवसीय प्रचार-प्रसार कार्यक्रम के अन्तर्गत राजिम, जिला रायपुर (छ.ग.) में मानव अधिकार जन जागृति एवं आयोग की कार्यशैली के संबंध में जनसामान्य को जानकारी दी है।

आयोग द्वारा बताया गया कि ऐसे सभी अधिकार जो व्यक्ति के जीवन, स्वतंत्रता एवं प्रतिष्ठा से जुडे हैं तथा भारतीय संविधान की धारा 3 में मूलभूत अधिकारों के अन्तर्गत आते है और इन विधिसम्मत मानव अधिकारों का संरक्षण आयोग के कार्यक्षेत्र में आता है, से संबंधित प्रकरण आवेदक द्वारा पूर्ण पता लिखकर आयोग को संबोधित करते हुये प्रेषित कर सकते हैं। मानव अधिकार से संबंधित जानकारी जन सामान्य तक सरलता से पहुॅच सके, इस हेतु आयोग द्वारा पोस्टर चस्पा एवं पाम्पलेट मेला स्थल पर वितरित किये गये, इसके अतिरिक्त मेला स्थल पर आये कोटवारों को और समिति के अधिकारियों को कुछ पोस्टर उनके क्षेत्र में मानव अधिकार का प्रचार-प्रसार व्यापक पैमाने पर हो सके, इस हेतु प्रदाय किये गये। आयोग की टीम द्वारा मेला परिसर में यह भी जानकारी दी गई कि कोई भी पीडि़त व्यक्ति आयोग में स्वयं उपस्थित होकर, डाक द्वारा अथवा इलेक्ट्रानिक माध्यम से अपना आवेदन निःशुल्क प्रस्तुत कर सकता है।

आयोग द्वारा बताया गया कि गत वर्ष डोगरगढ़ एवं भोरमदेव मेले में भी प्रचार-प्रसार किया गया था, जनसामान्य की रूचि को ध्यान में रखते हुये राजिम मेले में आयोग के कार्यकलाप एवं मानव अधिकारों के प्रति जागरूकता हेतु जानकारी दी जा रही है। आयोग की छह सदस्यीय टीम के उप-पुलिस अधीक्षक श्री सुभाषचन्द्र चैधरी, शोध अधिकारी, मनीष मिश्रा, पुलिस निरीक्षक श्री के. बी. द्विवेदी, श्रीमती माया शर्मा, आरक्षक शब्रीनाथन मेनन एवं आयोग के कर्मी विनय शुक्ला द्वारा मेला स्थल पर मानव अधिकार के संबंध में जानकारी जनसामान्य को दी गई।

DSC 3538A  सौ से ज्यादा देशों में ‘राजिम कुंभ‘ की गूंज राजिम कुंभ का चैथा दिन

DSC 3535A सौ से ज्यादा देशों में ‘राजिम कुंभ‘ की गूंज राजिम कुंभ का चैथा दिन

वेलेंटाइन-डे, अब ‘माता-पिता दिवस‘ के रूप में मनेगा
संत आशाराम जी के सुझाव पर मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री की घोषणा.

आसाराम बापू की प्रवचन माला का कई देशों में हो रहा है सीधा प्रसारण.

853A 300x213 सौ से ज्यादा देशों में ‘राजिम कुंभ‘ की गूंज राजिम कुंभ का चैथा दिनरायपुर. महानदी के त्रिवेणी तट राजिम-कुंभ के संत समागम स्थल पर देश के प्रख्यात संत और प्रवचनकार संत आशाराम जी के प्रवचनों को सुनने के लिये आज जनसैलाब उमड़ पड़ा. लाखों लोगों को संबोधित करते हुए श्री बापू ने कहा कि उनके प्रवचनों का प्रसारण सौ से ज्यादा देशों में हो रहा है इसलिए यह माना जाये कि राजिम-कुंभ की ख्याति विदेशों तक जा पहुंची है. उन्होंने कहा कि राजा जनक ने सत्संग सुनने-सुनाने का जो कर्तव्य निभाया था, वही कर्तव्य आज के समय में छत्तीसगढ़ सरकार निभा रही है. बापू के प्रवचनों को सुनने के लिये मुख्यमंत्री डाॅ. रमनसिंह और धर्मस्व व संस्कृति मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल विशेष तौर पर उपस्थित थे.

आयोजन की तारीफ करते हुए संत आशाराम जी ने कहा कि ऐसा सत्संग धर्म, देश के किसी और राजा को निभाते हुए उन्होनें नहीं देखा. उन्होंने मुख्यमंत्री डाॅ. रमनसिंह और धर्मस्व व संस्कृति मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल को राम-लक्ष्मण की संज्ञा दी और अपने आर्शीवचन में कहा कि आप जैसे धर्मप्रेमी और गुणी नेताओं की जरूरत केन्द्र में भी है जहां वर्तमान में बैठे लोग ऐसे फैसले कर रहे हैं जिससे मन द्रवित होता है. संत आशाराम जी के प्रवचनों का आज दूसरा दिन था जिसमें आश्चर्यजनक भीड़ उमडी. भक्तजन अपने परिवार के साथ बापू के प्रवचनों को सुनने पहुंचे तथा राजिम-कुंभ में अपनी उपस्थिति दी. अनुमान है कि अब तक दस लाख से ज्यादा श्रद्धालु संत आशाराम जी को सुनने पहुंचे.

संत आशाराम जी ने कृष्णावतार और रामावतार चरित्र को सामने रखते हुए कहा कि राम यदि खून से सने जटायु को गोद में लेते हैं तो कृष्ण ने सुदामा के पैर खुद धोये और पूतना के जहर को पीकर माता यशोदा को मुक्ति देते हैं. यानि दोनों का ही व्यवहार करूणामयी है. हमें भगवान की तरह ही प्रेमी, गंभीर, करूणामयी, उदार, क्षमाशील और शूर्यवीर होना चाहिये. लाखों वर्गफीट के खचाखच भरे सभागृह में उपस्थिति श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए संत आशाराम जी ने कहा कि जो व्यक्ति भक्तिमय और अध्यात्मवादी है, उसे ही संसार चाहता है. आप में यदि करूणा, उदारता, शांति या रसता नहीं है तो आपको परिवार भी पसंद नहीं करेगा. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान और छत्तीसगढ़ की जनता मे एक बडी समानता यह है कि दोनों ही सत्संग्रप्रेमी हैं. उन्होंने कहा कि जिस तरह समुद्र की गहराई में पानी स्थिर रहता है वैसा ही हमारा मन होना चाहिये जो चित्त के साथ स्थिर हो. इस अवसर पर राज्य भंडार गृह निगम के अशोक बजाज तथा संस्कृति संचालक एस.के. शुक्ला उपस्थित थे.

बताते चलें कि इन दिनों देश के प्रख्यात संत और प्रवचनकार संत आशाराम बापू की प्रवचनमाला का लाभ श्रद्धालु उठा रहे हैं जो 9 फरवरी से प्रारंभ होकर 12 फरवरी तक चलेगी. भक्ति संगीत में डूबे प्रवचनों को सुनने के लिये दूरदराज से छत्तीसगढ़वासी राजिम-कुंभ पहुंच रहे हैं तथा बापू के प्रवचनों का श्रवण-लाभ कर रहे हैं. अनुमान है कि दो दिनों में ही 25 लाख से ज्यादा श्रद्धालु आशाराम जी के प्रवचनों को सुनकर खुद को धन्य महसूस कर रहे हैं. बापू के प्रवचनों को सबेरे 9.30 से तथा सायं 3.30 से सुना जा सकता है.

वैलेंटाइन-डे, अब माता-पिता पूजन दिवस के रूप में मनेगा

संत आशाराम जी ने वैलेंटाइन-डे को लेकर समाज में फैलती अपसंस्कृति पर चिंता जाहिर करते हुए सुझाव दिया कि इस दिवस को माता-पिता पूजन दिवस के रूप में मनाया जाना चाहिये जिसके बाद मुख्यमंत्री डाॅ. रमनसिंह ने इस पर अपनी सहमति दी और धर्मस्व व संस्कृति मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल ने घोषणा करते हुए कहा कि शिक्षा विभाग यह सुनिश्चित करेगा कि वैलेंटाइन-डे के दिन सभी घरों में अब माता-पिता पूजन दिवस मनाया जाये. इस घोषणा पर उपस्थित लाखों श्रद्धालुओं ने ताली बजाकर स्वागत किया. बापू के प्रवचनों को सुनने के लिये कई स्कूलों के बच्चे भी उपस्थित थे जिन्हें बापू ने शांति मंत्र और ओम का जाप करने की प्रेरणा दी ताकि जीवन में मनचाही सफलता अर्जित की जा सके. बापू ने बच्चों को बताया कि हरिओम का उच्चारण करने वाला व्यक्ति जीवन की सफलताओं में दूसरों से ज्यादा गति पाता है. उन्होंने कुछ वीडियो फुटेज भी दिखाये जिसमें आपातकालीन परिस्थितियों में साहस के साथ फैसले लेने का संदेश बच्चों को प्राप्त हुआ. उन्होंने अभिभावकों से आग्रह किया कि वे अपने बच्चों को समयानुकूल साहसपूर्ण फैसले लेने के लिये प्रेरित करें.

कलाकारों ने पेश किये मंत्रमुग्ध कर देने वाले कार्यक्रम

राजिम-कुंभ में एक तरफ जहां आशाराम बापू के भक्ति संदेश की रसधार बही, वहीं मुक्ताकाशी सांस्कृतिक मंच पर श्रोताओं को कई मनमोहक प्रस्तुतियां देखने को मिली. सायं से ही स्थानीय कलाकारांे ने रोचक प्रस्तुतियां दी जिनमें पदमिनी निषाद की पंडवानी, राजिम के संतोष शर्मा के भजन, नवापारा की प्रेमिनबाई का जसगीत, कबीरधाम की प्रतिमा बारले की पंडवानी को ग्रामीणों खूब सराहा तथा तालियां बजाते हुए उत्साहवर्धन किया. रायपुर से आये प्रसिद्ध भजन गायक मदन चैहान ने भजनों की सुरमयी श्रृंखल पेश कर माहौल को भक्तिमय बना दिया. जबकि अलका चंद्राकर ने जगराता पेश किया. वहीं बारूका के भूपेन्द्र साहू ने लोकमंच की प्रस्तुति दी तथा दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र नागपुर के कलाकारों ने विविध लोकनृत्यों की प्रस्तुति दी. इसी तरह एक अन्य सांस्कृतिक संध्या में पूनाबाई की पंडवाणी, कालेश्वर प्रसाद तिवारी के भजन, कविता वासनिक का लोकमंच का आनंद उपस्थितजनों ने उठाया. 

कल 11 फरवरी के सांस्कृतिक आकर्षण:

ईश्वरी साहू की पंडवानी, रविशंकर व्यास का गीत रामायण, कांति बरलोटा व कविता देशमुख का भजन, इकबाल खां का भजन, मीना साहू की पंडवाणी, खुमान साव व ननकी ठाकुर का लोकमंच, राजेश मिश्रा का देशभक्ति गीत के साथ-साथ दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र नागपुर के सौजन्य से विभिन्न राज्यों के कलाकारों द्वारा लोकनृत्य की प्रस्तुति दी जायेगी.

DSC 0847A सौ से ज्यादा देशों में ‘राजिम कुंभ‘ की गूंज राजिम कुंभ का चैथा दिन

ASHA RAM bapu रामराज लाना है तो छत्तीसगढ़ सरकार का अनुसरण करेः बापू

आसाराम के प्रवचन में उमड़ा भक्तों का सैलाब

बृजमोहन अग्रवाल, रामप्रताप ने सत्संग का लाभ लिया

bapu रामराज लाना है तो छत्तीसगढ़ सरकार का अनुसरण करेः बापूराजिम 09.02.2012ः- देश में अगर रामराज लाना है, तो भारत के अन्य प्रदेश छत्तीसगढ़ सरकार का अनुसरण करें । यहां की सरकार को भगवान ने ऐसी सूझबूझ दी है, कि सतसंग से उनका भी भला हो रहा और प्रजा का भी भला हो रहा है। सत्संग के प्रभाव से भाग्य के कुसंग मिट जाते है ।

 उक्त विचार आध्यात्मिक क्रांति के प्रणेता संत श्री आराराम बापू ने योग साधना शिविर के दौरान भक्तों को दी । राजिम कुंभ में पहली बार पधारें हजारों भक्तों कों संबोधित करते हुऐ उन्होनें कहा कि जीवन की अनियमितता से लोगों में व्यास अवसाद से उबरने की युक्ति बताते हुये कहा कि अनियमित खान-पान से प्राप्त हो रहे है । जब कि संयम से जीवन की आयु लंबी होती है । अति अभिमान, अधिक बोलना, अधिक चलना, गलत निर्णय लेना विनाश की खाई की ओर ढकेल देती है । जो क्रोधी है, उसका स्वभाव भी क्रोधित हो जाता है । अधिक खाना, अधिक बोलना, अधिक चलना ये बाते भविष्य को कष्ट पहुॅचाता है । जो मौन रहता है, उनका जीवन सुखद और मन को शांति प्रदान करने वाली होती है । वैज्ञानिकों ने भी इस बात को स्वीकारा है कि जो ओंकार का जप करता है, अतिबुद्धिमान होता है, जो संयम का महत्व रखता है, उसकी आयु बढ़ती है । जो महापुरूषों से प्रेरणा प्राप्त करता है, वह मन की निरसता मिटाकर बुद्धिमान बनता है । जो अल्पाहार करता है, उपवास करता है, वह अधिक आयु भोगने वाला बनता है ।

 श्री बापू ने कहा कि कलयुग में भगवान हरि नाम जप से सभी कार्यों से सफलता मिलती है । हरिनाम के जप करने मात्र से मुक्ति की यात्रा शुरू हो जाती है । धन से, सत्ता से, पद से मनुष्य के सभी दुःख नहीं मिटते इन चाजों से कोई सदा के लिये निर्दुख नहीं हो सकता । निर्दुख उस अंर्तआत्मा के प्रसाद से होते है उस परमात्मा के प्रसाद से सभी दुःख मिट जाते है । निर्दोष मन, निर्वासनिक सत्संग से बनता है । ओमकार मंत्र जप से 19 प्रकार की आध्यात्मिक शक्तियां जागृत होती है । इससे मन की मलीनता दूर होती है और बुद्धिदाता का प्रकाश होने लगता है ।

 उन्होनें कहा कि जो भगवान को साधना से मानता है वह वास्तविक उन्नति का धनी है आत्म निरिक्षण करके महापुरूषों के विचारों को आत्मसात करने से तथा जीवन में सत्यता लाने से ही शांति का अनुभव होता है । यदि कोई भी सरकार ऐसा अनुभव करती है तो वहां पर रामराज आता है । असली उन्नति सत्संग से ही होती है । संत बापू ने प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह और संस्कृति मंत्री बृजमोहन अग्रवाल को कंुभ आयोजन के लिये सरकार की प्रशंसा करते हुए कहा कि सभी प्रकार की उन्नति राजिम कुंभ के माध्यम से पूरे प्रदेश का हो रहा है । आज के सत्संग के माध्यम से राजिम कुंभ का नाम देश सहित विदेशों के प्रमुख दो सौ देशों में हो गया ।

संत्संग का लाभ लेने संस्कृति मंत्री बृजमोहन अग्रवाल, भाजपा संगठन मंत्री राम प्रताप सिंह, वेयर हाउस कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष अशोक बजाज, टास्क फोर्स सदस्य आशीष शिंदे, ओएसडी गिरीश बिस्सा, रमेश पहाड़िया, अरूण लुथरा एवं  महाराष्ट्र, उड़ीसा, पंजाब सहित अन्य राज्यों से उनके हजारों अनुयायी उपस्थित थे ।

ASHA RAM रामराज लाना है तो छत्तीसगढ़ सरकार का अनुसरण करेः बापू

DSC 0911 आसाराम बापू की प्रवचन माला आज से राजिम कुंभ का दूसरा दिन

जसगीत और छत्तीसगढ़ी नृत्य से निखरी सांस्कृतिक संध्या

DSC 0948 300x253 आसाराम बापू की प्रवचन माला आज से राजिम कुंभ का दूसरा दिनदूसरी ओर ग्रामीणों ने आज सुबह पवित्र संगम में स्नान किया तथा मंदिरों में पूजा अर्चना की तथा मेले का आनंद उठाया. जबकि शाम होते ही श्रद्धालुओं को संतों की अमृत वाणी यानि प्रवचन आर्शीवचन सुनने का मौका मिला तो दूसरी ओर श्रद्धालु सांस्कृतिक कार्यक्रम का आनंद लेते रहे. विशेष तौर पर राजेश भटनागर का जसगीत, खैरागढ़ के सुरेश दुबे का भजन, देउरगांव साजा के गौतम चैबे का कार्यक्रम व जगवंदन श्रद्धालुओं को खूब पसंद आया. ठेठ छत्तीसगढी गीतों की श्रंृंखला ने रसिकों को भावविभोर करके रख दिया. विशेष तौर पर जग वंदन, लग जायी जियरा राम के नाम पे, भोले दरबार आदि ने भक्तिपूर्ण माहौल बनाया. कड़कती ठंड में भी श्रद्धालु दर्शक संतों की वाणी औंर एक से बढ़कर एक लोकप्रिय भजनोें का लुत्फ रात तक उठातेे रहे.

कल का दिन भजनों की संध्या के नाम रहा. तथा भजन सम्राट अनूप जलोटा के भक्तिमय सुमधुर भजनों के साथ देर रात तक सम्पन्न हुआ. संतों की वाणी तथा पहंुचे मुख्य अतिथियोे के उद्बोधन पश्चात मंुबई से पंहुचें देश के भजन सम्राट अनूप जलोटा एंड पार्टी का कार्यक्रम संगीत की लय के साथ शुरू हुआ, जिसमें सर्वप्रथम उन्होंने अपनी सुप्रसिद्ध भजन ‘‘ऐसी लागी लगन, मीरा हो गई मगन वो तो गली-गली हरि गुन गाने लगी‘‘ सुनकर लोगो की खूब वाहवाही लूटी और श्रोताओ ने भी तालियो की जमकर गड़गड़ाहट के साथ इस प्रथम प्रस्तुति का आनंद से स्वागत किया.

कुंभ के उदघाटन अवसर पर प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों की विविध श्रृंखला में DSC 09241 300x224 आसाराम बापू की प्रवचन माला आज से राजिम कुंभ का दूसरा दिनसांस्कृतिक मंच पर पंचराम देवदास की प्रथम प्रस्तुति मोहनी वादन रही, जिसमें उन्होंने अपनी पारंगत शैली से अरपा पैरी के धार, महानदी हे अपार जैसे छत्तीसगढ़ी गीत पर शहनाई वादन की मधुरतम प्रस्तुति दी और लोगों की वाहवाही बटोरी. इसके अलावा नाचा, गम्मत जैसे नृत्यों ने लोगों को खूब झुमाया. इधर, अनूप जलोटा की भजन संध्या मंे गूंजे भजनों ने रसिकों को भावविभोर करके रख दिया. श्री जलोटा ने मेरे मन में श्याम, तन मे श्याम, रामनाम रटते रहो, जब तक घट में प्राण, जग में संुदर है दो नाम, चाहे कृष्ण कहो या राम, तथा रंग दे चुनरिया व सूरज की गर्मी जलते हुय तन को, पायो जी राम मैन रामरतन धन पायो के अलावा कई चर्चित व कर्णप्रिय भजनों को पेश किया.  इस दौरान उन्होंने शास्त्रीय गायन की बेहतरीन जुगलबंदी भी दिखाई दी. विशेष तौर पर हारमोनियम, सितार, गिटार और तबले के एकरस ने अतिथियों को मंत्रमुगध करके रख दिया.

कल 9 फरवरी के सांस्कृतिक आकर्षण: पुनाबाई, खट्टी की पंडवानी, पं. कालेश्वर प्रसाद तिवारी, जेंजरा का भजन, उषा बारले भिलाई की पंडवानी, राजिम के संतोष शर्मा का भजन और राजनांदगांव की कविता वासनिक का लोकमंच प्रस्तुत होगा.

DSC 0937 आसाराम बापू की प्रवचन माला आज से राजिम कुंभ का दूसरा दिन

DSC 0452B संत श्री असाराम बापू राजिम कुंभ में भाग लेने हेतु रायपुर पहुँचे

प्रख्यात संत आशाराम बापू आज शाम रायपुर पहुंचे. प्रदेश के लोकनिर्माण स्कूल शिक्षा  मंत्री  बृजमोहन अग्रवाल ने माना विमानतल में प्रदेश शासन की और से उनकी अगवानी की. बापूजी ने उन्हें पुष्पहार पहना कर आशीर्वाद प्रदान किया. उल्लेखनीय है की त्रिवेणी संगम राजिम में संत श्री  आशाराम बापू  जी का गुरूवार से  चार दिवसीय ध्यान योग शिविर  लगाया जा रहा है.

DSC 0438 गौवंश बचाने के संकल्प के साथ शुरू हुआ ‘राजिम कुंभ 2012‘

DSC 0426 गौवंश बचाने के संकल्प के साथ शुरू हुआ ‘राजिम कुंभ 2012‘

राजिम-कुंभ धर्म, संस्कार और विचारों की त्रिवेणी का अविरल प्रवाह: धरमलाल कौशिक

कुंभ की शुरूआत के बाद छत्तीसगढ़ में अकाल नहीं: बृजमोहन अग्रवाल

अनूप जलोटा के भजनों ने रंग जमाया

रायपुर. महानदी के त्रिवेणी तट पर गौवंश बचाने के संकल्प के साथ आज से चौदह दिवसीय राजिम-कुंभ 2012 की गरिमामय शुरूआत हुई. इस अवसर पर अमरकंटक के आचार्य महामण्डलेश्वर अग्नि पीठाधीश्वर श्री रामकृष्णानंद महाराज, शद्दाणी दरबार के संत श्री युधिष्ठिरलाल महाराज तथा गुरूशरण महाराज पण्डोखर सरकार की उपस्थिति में उदघाटन समारोह संपन्न हुआ. अपने विशेष उदबोधन में अग्नि पीठाधीश्वर ने कहा कि छत्तीसगढ कौशल्या मां की जन्मस्थली है जो भगवान राम की माता हैं इसलिये मनुष्य के अंतिम समय में यदि मन में राम होंगे तो वह सदगति प्राप्त करता है. सभी संतों ने अपने उदबोधन में राजिम-कुंभ की सफलता के लिये आर्शीवाद दिया तथा श्रद्धालुओं से धर्म और संस्कृति की रक्षा करने की अपील की.

समारोह की शुरूआत भगवान् राजीवलोचन की पूजा अर्चना और आरती के साथ हुई. इस अवसर पर कुंभ की सफलता और प्रदेश की प्रगति का आर्शीवाद मांगा गया. तत्पश्चात उपस्थित साधु-संत और राजनेताओं का पुष्प गुच्छ से स्वागत किया गया. उदघाटन समारोह के मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ विधानसभा के अध्यक्ष श्री धरमलाल कौशिक थे. अपने उदबोधन में उन्होंने कहा कि धर्म, संस्कार और विचारों की त्रिवेणी का अविरल प्रवाह राजिम-कुंभ से निकला है जिसे खुद में ढालने तथा उसे समाज जीवन में कार्यान्वित करने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ राज्य बनने के बाद हमारी दो प्रमुख उपलब्धि राजिम-कुंभ तथा सिरपुर महोत्सव के रूप में सामने आई है. श्री कौशिक ने संस्कृति मंत्री श्री अग्रवाल की तारीफ करते हुए कहा कि राजिम सहित छत्तीसगढ़ के जितने भी धार्मिक क्षेत्र हैं, श्री अग्रवाल ने कठिन प्रयासों से उन्हें देश के नक्शे में स्थापित किया है, जिसके लिये वे बधाई के पात्र हैं.

समारोह की अध्यक्षता धर्मस्व एवं संस्कृति मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल ने की. छत्तीसगढी में दिये गये अपने स्वागत भाषण में श्री अग्रवाल ने कहा कि भगवान राजीवलोचन व कुलेश्वर महादेव तथा संतो ंके आर्शीवाद के बिना कुंभ का आयोजन संभव नहंी. जब से राजिम-कुंभ की शुरूआत हुई है तब से इस क्षेत्र में अकाल नहीं पडा. उन्होंने सभी अतिथियों का स्वागत किया और कंुभ की सफलता के लिये सभी का सहयोग व संतों का आर्शीवाद मांगा. कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि तथा कृषि मंत्री श्री चंद्रशेखर साहू ने अपने उदबोधन में राजिम को प्रणम्य धरती बताया तथा महत्ता गिनाते हुए कहा कि संतों की उपस्थिति और आर्शीवाद से ही राजिम-कुंभ की पहचान देश-विदेश में हुई हैं. उन्होंने गौवंश बचाने की प्रतिबद्धता जताते हुए कहा कि छत्तीसगढ सरकार ने नया कानून बनाते हुए गौहत्या पर कडा दण्ड और अर्थदण्ड का प्रावधान रखा है तथा इसका कठोरता से पालन होगा ताकि गौवंश बचाया जा सके.

उदघाटन समारोह के विशिष्ट अतिथि खाद्य मंत्री पुन्नूलाल मोहिल व सांसद चन्दूलाल साहू ने राजिम-कुंभ को धर्म और संस्कृति का अनूठा संगम बताया और उम्मीद जताई कि इसके माध्यम से छत्तीसगढ की संस्कृति, आस्था और ज्यादा बलवती होगी. इस अवसर पर छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के अध्यक्ष श्री कृष्ण राय, पाठयपुस्तक निगम के अध्यक्ष अशोक शर्मा, भण्डार निगम के अध्यक्ष अशोक बजाज, जिला पंचायत रायपुर की अध्यक्ष श्रीमती लक्ष्मी वर्मा, पूर्व जिला पंचायत सदस्य संतोष उपाध्याय, नगर पालिका गोबरा नवापारा की अध्यक्ष श्रीमती देहुती साहू, नगर पंचायत राजिम की अध्यक्ष श्रीमती अंजना महाड़िक, जनपद पंचायत फिंगेश्वर की अध्यक्ष श्रीमती अन्नपूर्णा साहू, श्री गिरिजा साहू, श्री माधव सिंह धु्रव, युधिष्ठिर चंद्राकर के साथ-साथ देशभर से आये साधु संत और महामण्डलेश्वर उपस्थित थे.

जलोटा के भजनों पर झूमे श्रद्धालु
आज के सांस्कृतिक कार्यक्रम की शुरूआत देश के सुप्रसिद्ध भजन गायक अनूप जलोटा के सुरमयी भजनों से हुई. उनके साथ आये कलाकारों ने संगत देते हुए जलोटा के भजनों को जीवंत बनाया. इस दौरान जलोटा ने कई भजन प्रस्तुत किये. इसके अलावा भरतहरी गायन रेखादेवी जलक्षत्रीय एवं साथी, पण्डवानी गायन विष्णुप्रसाद साहू एवं साथी, मोहरी वादन पंचराम देवदास तथा लोक नाट्य नाचा की प्रस्तुति का मजा श्रद्धालु देररात तक लेते रहे.

DSC 0423 गौवंश बचाने के संकल्प के साथ शुरू हुआ ‘राजिम कुंभ 2012‘

snankepahle21 धर्म, संस्कृति और कला की त्रिवेणी राजिम कुंभ आज से

अग्नि पीठाधीश्वर श्री रामकृष्णानंद महाराज, पण्डोखर सरकार तथा युधिष्ठिरलाल महाराज करेंगे उद्घाटन, अनूप जलोटा के भजन, नाचा और पण्डवानी लुभाएंगे

snan2 धर्म, संस्कृति और कला की त्रिवेणी राजिम कुंभ आज सेरायपुर / भगवान् राजीवलोचन और कुलेश्वर महादेव के आशीर्वाद से राजिम-कुंभ 2012 की शुरूआत कल 7 फरवरी से होन जा रही है, इसका उद्घाटन अमरकंटक के आचार्य महामण्डलेश्वर अग्नि पीठाधीश्वर श्री रामकृष्णानंद महाराज, शद्दाणी दरबार के संत श्री युधिष्ठिरलाल महाराज, गुरूशरण महाराज पण्डोखर सरकार तथा महामण्डलेश्वर श्री प्रज्ञानंद महाराज की उपस्थिति और आशीर्वचन से होगा. मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ विधानसभा के अध्यक्ष श्री धरमलाल कौशिक होंगे जबकि अध्यक्षता धर्मस्व एवं संस्कृति मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल करेेंगे.

 देश में प्रतिवर्ष होने वाले कुंभ के रूप में अपनी पहचान बना चुके राजिम-कुंभ 2012 के उद्घाटन समारोह के विशिष्ट अतिथि के रूप में कृषि मंत्री श्री चन्द्रशेखर साहू, खाद्य मंत्री पून्नूलाल मोहिले, लोकसभा सांसद श्री चन्दूलाल साहू, संसदीय सचिव श्री युद्धवीर सिंह जूदेव, छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के अध्यक्ष श्री कृष्ण राय, पूर्व सांसद श्री पवन दीवान, राजिम विधायक श्री अमितेष शुक्ल और कुरूद विधायक श्री लेखराम साहू उपस्थिति रहेंगे. इसके अलावा जिला पंचायत रायपुर की अध्यक्ष श्रीमती लक्ष्मी वर्मा, पूर्व शिक्षा मंत्री श्री अजय चन्द्राकर, पूर्व जिला पंचायत सदस्य संतोष उपाध्याय, नगर पालिका गोबरा नवापारा की अध्यक्ष श्रीमती देहुती साहू, भण्डार गृह निगम के अध्यक्ष श्री अशोक बजाज, नगर पंचायत राजिम की अध्यक्ष श्रीमती अंजना महाडि़क, जनपद पंचायत फिंगेश्वर की अध्यक्ष श्रीमती अन्नपूर्णा साहू, श्री गिरिजा साहू श्री माधव सिंह धु्रव सदस्य जनपद पंचायत मगरलोड के साथ-साथ देशभर से आये साधु संत और महामण्डलेश्वर भी उपस्थिति रहेंगे.
 महानदी, पैरी और सोंढूर नदी के त्रिवेणी संगम राजिम में आयोजित होने जा रहे राजिम कुंभ-का यह सातवां वर्ष है जो आगामी 20 फरवरी यानि पूरे 14 दिनों तक चलेगा. कुंभ में चार शाही स्नान होंगे जिसमें 07 फरवरी को माद्य पूर्णिमा, 14 फरवरी को श्री जानकी जयंती, 17 फरवरी को विजया एकादशी और 20 फरवरी को महाशिवरात्रि का शाही स्नान विशेष महत्व लिये होगा. संत आसाराम बापू के ध्यान योग साधना शिविर की शुरूआत 9 फरवरी से होगी जिसमें लाखों लोग शिरकत करेंगे. यह 12 फरवरी तक चलेगा. राजिम कुंभ में आर्शीवचन देने तथा उपस्थिति के संदर्भ में जिन संतों और महात्माओं की सहमति मिल चुकी है. उनमें पं. विजयशंकर मेहता, महामण्डलेश्वर अद्वेतानंद गिरी जी महाराज, महामण्डलेश्वर अभेदानंद गिरी जी महाराज, आचार्य महामण्डलेश्वर विशोकानंद जी महाराज, महामण्डलेश्वर आनंद चैतन्य जी महाराज, महंत बिन्दु जी महाराज हैदराबाद, दण्डीस्वामी सच्चिदानंद जी महाराज, महाप्रभु वल्लभाचार्य प्राकट्य बैठक चम्पारण्य पीठाधीश्वर जगतगुरू द्वारकेश लाल जी महाराज का सान्निध्य राजिम कुंभ में प्राप्त होगा.

 राजिम-कुंभ की सुरक्षा में 300 जवान तैनात होंगे तथा चिकित्सा सुविधा के लिये डाॅक्टर और स्टाॅफ रखा गया है. श्रद्धालुओं के लिये दालभात सेंटर, प्रसाद और आवास की व्यवस्था मेला आयोजन समिति की तरफ से की गई है. जबकि स्वास्थ्य की दृष्टि से 108 संजीवनी वाहन उपलब्ध रहेगा. दूसरी ओर पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल ने राजिम पहुंचकर देर रात तक कुंभ की तैयारियों का जायजा लिया तथा अधिकारियों को दिशा निर्देश दिये. श्री अग्रवाल ने शाही स्नान से लेकर संतों के आवास, भोजन, पेयजल, अतिथि व्यवस्था, मंच व्यवस्था, सुरक्षा व्यवस्था, श्रद्धालुओं के स्थल-मंदिर आदि की सुरक्षा को लेकर विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिये. श्री अग्रवाल ने उम्मीद और विश्वास जताया कि इस बार का राजिम-कुंभ ज्यादा सफल और कीर्तिदायी होगा.

शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती और निश्चलानंद सरस्वती आयेंगे

धर्मस्व एवं संस्कृति मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल ने बताया कि ज्योतिष एवं द्वारका शारदापीठाधीश्वर जगत्गुरू शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती 13 फरवरी को विराट संत समागम का उद्घाटन करेंगे. कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री डाॅं. रमन सिंह होंगे। जबकि समापन समारोह में पुरी के शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती का आर्शीवाद प्राप्त होगा.

आज के मुख्य कार्यक्रम

कल 07 फरवरी से सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरूआत प्रसिद्ध भजन गायक, अनूप जलोटा के सुरमयी भजनों से होगी. इसके अलावा भरतहरी गायन रेखादेवी जलक्षत्रीय एवं साथी, पण्डवानी गायन विष्णुप्रसाद साहू एवं साथी, मोहरी वादन पंचराम देवदास तथा लोक नाट्य नाचा की प्रस्तुति होगी.

DSC 2756 ‘राजिम कुंभ 2012‘ का शुभारंभ सात फरवरी सेDSC 2732 ‘राजिम कुंभ 2012‘ का शुभारंभ सात फरवरी से

DSC 0336 300x199 ‘राजिम कुंभ 2012‘ का शुभारंभ सात फरवरी सेसंत आषाराम बापू की प्रवचन माला और शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद जी सरस्वती का सान्निध्य प्राप्त होगा. प्रसिद्ध गायिका अनुराधा पौड़वाल, अनूप जलोटा और रवीन्द्र जैन के भजन विषेष आकर्षण होंगे.
रायपुर. धर्म, कला और संस्कृति की त्रिवेणी के रूप में देषभर में ख्यात हो चुके राजिम-कुंभ 2012 की षुरूआत आगामी 7 फरवरी मंगलवार से होने जा रही है जिसका उद्घाटन आचार्य महामण्डलेष्वर अग्नि पीठाधीष्वर श्री रामकृस्णानंद जी महाराज अमरकंटक, संत श्री युधिस्ठिरलाल जी महाराज षद्दाणी दरबार रायपुर के सान्निध्य में होगा. जिसके मुख्य अतिथि छत्तीसगढ विधानसभा के अध्यक्ष श्री धरमलाल कौषिक होंगे तथा अध्यक्षता संस्कृति मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल करेंगे.
छत्तीसगढ़ के प्रयागराज के रूप में प्रसिध्द तीर्थ नगरी राजिम मे प्रतिवर्ष होने वाला राजिम-कुंभ मेले का यह सातवां वर्ष है. माघ पूर्णिमा से प्रांरभ होने वाले इस धार्मिक और सांस्कृतिक महोत्सव का प्रमुख आकर्षण शाही स्नान होगा. पवित्र नदियों सोंढूर, पैरी और चित्रोत्पला के पावन तट पर 07 फरवरी को माघ पूर्णिमा, 14 फरवरी को श्री जानकी जयंती, 17 फरवरी को विजया एकादशी और 20 फरवरी को महाशिवरात्रि का शाही स्नान विशेष महत्व लिये होगा. संत समागम का षुभारंभ 13 फरवरी को शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद जी सरस्वती की उपस्थिति में होगा. स्वामी निश्चलानंद जी सरस्वती 19 व 20 फरवरी को  समापन समारोह में उपस्थित रहेंगे.
आगामी 20 फरवरी तक चलने वाले बारह दिवसीय महोत्सव में देशभर से आये साधु-संतों की उपस्थिति और विभिन्न प्रदेशों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आकर्षण का कें्रद होंगी. राजिम कुंभ में आर्षीवचन देने तथा उपस्थिति के संदर्भ में जिन संतों और महात्माओं की सहमति मिल चुकी हैं, उनमें आचार्य महा. म. अग्नीपीठाधीश्वर रामकृष्णानंद जी, संत श्री पण्डोखर सरकार गुरूशरण जी महाराज, प्रज्ञानंद जी महाराज, संत श्री युधिष्ठिर लाल जी महाराज षामिल हैं. राजिम-कुंभ में इस बार देष के प्रख्यात संत श्री आशाराम बाबू के प्रवचनों का लाभ भी 9 से 12 फरवरी तक श्रद्धालु ले सकेंगे. उनके लिये नौ लाख वर्गवे यहां पर कैम्प करेंगे तथा ध्यान योग साधना शिविर का लाभ श्रद्धालु ले सकेेंगे. इसके अलावा पं. विजयशंकर मेहता, महा. मण्डलेश्वर अद्वेतानंद गिरी जी महाराज, महा. मण्डलेश्वर अभेदानंद गिरी जी महाराज, आचार्य महाण्डलेश्वर विशोकानंद जी महाराज, महामण्डलेश्वर आनंद चैतन्य जी महाराज, महंत बिन्दु जी महाराज हैदराबाद, दण्डीस्वामी सच्चिदानंद जी महाराज, महाप्रभु वल्लभाचार्य प्राकट्य बैठक चम्पारण्य पीठाधीश्वर जगतगुरू द्वारकेश लाल जी महाराज का सान्निध्य राजिम कुंभ में प्राप्त होगा. इसके अलावा दस हजार से ज्यादा साधु संत देष के विभिन्न राज्यों से आकर हिस्सा लेंगे.
सांस्कृतिक कार्यक्रम के मुख्य आकर्सण में भजन सम्राट अनूप जलोटा 7 फरवरी को षुभारंभ करेंगे. विराट संत समागम के दिन प्रसिद्ध भजन गायक रविन्द्र जैन अपनी प्रस्तुति देंगे तथा सुप्रसिद्ध गायिका अनुराधा पौडवाल सुगम संगीत पेष करेंगी. इसके अलावा क्षेत्रीय, प्रादेषिक और रास्ट्रीय स्तर के कलाकार भी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देंगे जिनके कार्यक्रम तय किये जा रहे हैं. मुक्ताकाशी मंच पर विभिन्न प्रदेशों के सांस्कृतिक दलों द्वारा दी जाने वाली आकर्षक प्रस्तुतियां, लोक संस्कृति और छत्तीसगढी संस्कृति के दर्शन का लाभ भी प्राप्त होगा. संत समागम, शाही स्नान, पंचकोशी यात्रा, अखाड़ों का प्रदर्शन और विख्यात संतों के प्रवचन आकर्षण का केन्द्र होंगे और 25 लाख से ज्यादा श्रद्धालु पुण्य लाभ हासिल करेंगे जिसमें पर्व-स्नान, जानकी जयंती और महाशिवरात्रि पर विशेष स्नान शामिल है.

राजिम-कुंभ में विशेष अतिथि के रूप में कृषि मंत्री श्री चन्द्रशेखर साहू, खाद्य मंत्री पुन्नूलाल मोहिले,  लोकसभा सांसद श्री चन्दूलाल साहू, छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के अध्यक्ष श्री कृष्णकुमार राय, पूर्व सांसद श्री पवन दीवान, राजिम विधायक श्री अमितेष शुक्ला और कुरूद विघायक श्री लेखराम साहू समारोह में उपस्थित रहेंगे. जिला पंचायत रायपुर की अध्यक्ष श्रीमती लक्ष्मी वर्मा, पूर्व शिक्षा मंत्री श्री अजय चन्द्राकर, पूर्व जिला पंचायत सदस्य श्री संतोष उपाध्याय, नगर पालिका गोबरा नवापारा की अध्यक्ष श्रीमती देहुती साहू, भंडार गृह निगम के अध्यक्ष अषोक बजाज, नगर पंचायत राजिम की अध्यक्ष श्रीमती अंजना महाडि़क, जनपद पंचायत फिंगेश्वर की अध्यक्ष श्रीमती अन्नपूर्णा साहू, श्री गिरिजा साहू, सदस्य जनपद पंचायत अभनपुर, श्री माधव सिह ध्रुव सदस्य जनपद पंचायत मगरलोड तथा साधु.संतों की गरिमामय उपस्थिति भी समारोह में रहेगी. दूसरी ओर, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल ने राजिम पहुंचकर अधिकारियों से कुंभ की तैयारियों का जायजा लिया. शाही स्नान से लेकर संतों के आवास, भोजन, पेयजल, अतिथि व्यवस्था, मंच व्यवस्था, सुरक्षा व्यवस्था, श्रद्धालुओं के स्थल-मंदिर आदि की सुरक्षा को लेकर उन्होंने विशेष निर्देश दिये. श्री अग्रवाल ने उम्मीद और विश्वास जताया कि इस बार का राजिम-कुंभ ज्यादा सफल और कीर्तिदायी होगा.

DSC 0344 ‘राजिम कुंभ 2012‘ का शुभारंभ सात फरवरी से

4582 राजिम कुंभ 2012 : पर्यटन मंत्री श्री अग्रवाल ने की तैयारियों की समीक्षा

सभी जरूरी व्यवस्थाएं 30 जनवरी तक पूर्ण करने के निर्देश

रायपुर 14 जनवरी 2012

    छत्तीसगढ़ के प्रयागराज के रूप में प्रसिध्द तीर्थ नगरी राजिम के त्रिवेणी संगम पर इस साल 07 फरवरी से 20 फरवरी तक लगने वाले राजिम कुम्भ के लिए व्यापक स्तर पर तैयारियां शुरू हो गयी है। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल ने कल राजिम में साधु-संतों की उपस्थिति में कुंभ मेले की तैयारियों से विभागों के अधिकारियों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की बैठक लेकर अभी तक हुई तैयारियों की समीक्षा की।

    श्री अग्रवाल ने बैठक में कहा कि राज्य शासन द्वारा छह वर्ष पूर्व राजिम के वार्षिक परम्परागत पुन्नी मेला को भव्य स्वरूप प्रदान करते हुए राजिम कुंभ मेले की शुरूआत की गयी। साधु-संतों के आशीर्वाद और जनसहयोग से राजिम कुंभ मेले की भव्यता साल दर साल बढ़ती जा रही है। इस वर्ष राजिम कुंभ मेले का सातवां साल है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की देवभूमि राजिम प्रदेश की तरक्की का माध्यम बनेगी। पर्यटन मंत्री श्री अग्रवाल ने बैठक में सिलसिलेवार विभागीय तैयारियों की जानकारी अधिकारियों से ली। बैठक में लोकसभा सांसद श्री चन्दूलाल साहू, पूर्व सांसद एवं संत कवि श्री पवन दीवान, विधायक सर्वश्री महंत रामसुन्दर दास, अमितेष शुक्ल, लेखराम साहू, पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के सचिव श्री मनोहर पाण्डेय, धमतरी जिले के कलेक्टर श्री एस. प्रकाश, गरियाबंद जिले के कलेक्टर श्री दिलीप वासनीकर, छत्तीसगढ़,पर्यटन मण्डल के प्रबंध संचालक श्री तपेश झा, मेला अधिकारी श्री रमेश शर्मा सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।

    श्री अग्रवाल ने लोक निर्माण विभाग, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, स्वास्थ्य विभाग, जल संसाधन, विद्युत मण्डल, पुलिस विभाग, परिवहन विभाग, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग सहित अन्य विभागों द्वारा की जा रही तैयारियों की जानकारी ली। उन्होंने संत समागम स्थल, मुख्य सांस्कृतिक मंच सहित पूरे मेला स्थल पर पर्याप्त साफ-सफाई, पेयजल, सुरक्षा, चिकित्सा व्यवस्था, पार्किंग, शौचालय और प्रकाश व्यवस्था करने के निर्देश दिए। श्री अग्रवाल ने राजिम के पुराने पुल से लगे हुए निर्माणाधीन नये पुल की प्रगति की जानकारी ली। अधिकारियों ने बताया कि नये पुल का निर्माण अंतिम चरण में है। इस पुल का लोकार्पण जल्द से जल्द कराने के लिए रात-दिन निर्माण कार्य चल रहा है। पर्यटन मंत्री ने त्रिवेणी संगम पर नेहरू घाट के नीचे बन रहे एनीकट की प्रगति की भी समीक्षा की और निर्माण कार्य जल्द पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने एनीकट के पाथ-वे में रेलिंग व लाइटिंग करने के निर्देश दिए। इसके अलावा एनीकट के ऊपरी हिस्से में राजिम और नवापारा की ओर नदी के दोनों तटों पर घाट बनाने के लिए प्रस्ताव बनाने के निर्देश भी अधिकारियों को दिए। राजिम और नयापारा शहर से नदी में आने वाले गंदे पानी की निकासी के लिए व्यापक प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश भी अधिकारियों को दिए गए। पर्यटन मंत्री ने अधिकारियों को त्रिवेणी संगम के आस-पास महानदी और पैरी नदी पर बने तीनों पुराने पुलों के अलावा निर्माणाधीन पुल पर भी मेले के दौरान पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था करने के निर्देश दिए। श्री अग्रवाल ने बेलाही घाट पुल और चौबे बांधा पुल के बीच की सड़क को तत्काल डामरीकरण करने के निर्देश दिए। इस सड़क से लोमश ऋषि आश्रम तक के हिस्से को भी डामरीकृत करने के निर्देश दिए। पर्यटन मंत्री ने नागा साधुओं के लिए लोमश ऋषि आश्रम से अलग अस्थायी आश्रम बनाने के निर्देश अधिकारियों को दिए। श्री अग्रवाल ने नयापारा और राजिम के सभी मंदिरों की साफ-सफाई,रंग रोगन और लाइटिंग की व्यवस्था करने के निर्देश दिए।

         लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अधिकारियों ने बताया कि मेला स्थल पर पेयजल की व्यवस्था करने आठ किलोमीटर लंबी पाईप लाईन बिछाई जा रही है। मेला स्थल पर 280 नल लगाए जा रहे हैं। श्री अग्रवाल ने नदी की रेत पर बनने वाली अस्थायी सड़कों के दोनों तरफ बांस-बल्ली लगाने के निर्देश दिए। मेला स्थल पर 60 स्थानों पर दाल-भात केन्द्र खोले जाएंगे। संस्कृति मंत्री ने पार्किंग स्थलों में दात भात केन्द्र खोलने तथा सभी दाल भात केन्द्रों में पर्याप्त मात्रा में राशन की व्यवस्था करने और रात्रि 11 बजे तक इन केन्द्रों को चालू रखने के निर्देश दिए। उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था में लगे पुलिस जवानों के लिए अलग से डोम बनाने तथा वहां पर दाल भात केन्द्र खोलने के निर्देश भी दिए। श्री अग्रवाल ने रायपुर, धमतरी और गरियाबंद जिले के अधिकारियों से मेले के दौरान लगने वाली विकास प्रदर्शनी की तैयारियों की जानकारी ली और कहा कि तीनों जिलों के अधिकारी आपसी समन्वय के साथ प्रदर्शनी लगाएं। मेले के दौरान हर दिन दोपहर दो बजे रात्रि 11 बजे तक प्रदर्शनी खुली रहे।

प्रभारी मंत्री श्री मोहले की अध्यक्षता में केन्द्रीय समिति की बैठक

रायपुर 26 दिसम्बर 2011

4291 माघ पूर्णिमा पर सात फरवरी से शुरू होगा राजिम कुंभ

महानदी, पैरी और सोंढूर नदियों के पवित्र संगम पर छत्तीसगढ़ के प्रसिध्द तीर्थ राजिम के परम्परागत माघ पूर्णिमा के वार्षिक मेले की तैयारी शुरू हो गई है। इस सिलसिले में प्रदेश के खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता संरक्षण मंत्री तथा रायपुर जिले के प्रभारी श्री पुन्नूलाल मोहले ने आज शाम राजिम में केन्द्रीय समिति की बैठक में तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने राज्य शासन द्वारा जनसहयोग से ‘राजिम कुंभ’ के रूप में आयोजित किए जाने वाले इस वार्षिक मेले से संबंधित तैयारियों के बारे में अधिकारियों ओर जनप्रतिनिधियों के साथ विचार-विमर्श किया। राजिम कुंभ का यह सातवां वर्ष होगा।

विशेष रूप से बनाए गए पंडाल में श्री मोहले की अध्यक्षता में आयोजित केन्द्रीय समिति की आज की तैयारी बैठक में बताया गया कि इस बार राजिम कुंभ का आयोजन 07 फरवरी 2012 से शुरू होगा और महाशिवरात्रि पर 20 फरवरी 2012 को इसका समापन होगा। प्रभारी मंत्री की अध्यक्षता में आयोजित आज की बैठक में कृषि मंत्री श्री चन्द्रशेखर साहू, महासमुन्द्र के लोकसभा सांसद श्री चन्दूलाल साहू, राज्य भण्डार गृह निगम के अध्यक्ष श्री अशोक बजाज, छत्तीसगढ़ पर्यटन मण्डल के अध्यक्ष श्री कृष्ण कुमार राय, छत्तीसगढ़ राज्य हज कमेटी के अध्यक्ष डॉ. सलीम राज, अध्यक्ष जिला पंचायत श्रीमती लक्ष्मी वर्मा, अध्यक्ष नगर पंचायत राजिम श्रीमती अंजना महाडिक और राजिम कुंभ मेला समिति के अध्यक्ष श्री युधिष्ठिर चन्द्राकर सहित पर्यटन विभाग के सचिव श्री मनोहर पाण्डेय, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग के संचालक श्री नरेन्द्र शुक्ला, इतिहासकार और बख्शी सृजनपीठ के अध्यक्ष श्री रमेन्द्र नाथ मिश्र भी उपस्थित थे। इनके अलावा सभी संबंधित विभागों के जिला स्तरीय एवं स्थानीय अधिकारी भी बैठक में मौजूद थे। बैठक में प्रभारी मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. रमन ंसिंह के नेतृत्व में राजिम के इस प्रसिध्द मेले को राजिम कुंभ के रूप में देश-विदेश में अच्छी पहचान मिली है। विगत वर्षों में इसका आयोजन बहुत ही बेहतर ढंग से हुआ है।

श्री मोहले ने उम्मीद जतायी कि इस बार भी राजिम कुंभ के सभी कार्यक्रम सुचारू रूप से आयोजित और संचालित होंगे। प्रभारी मंत्री ने अधिकारियों को राजिम कुंभ में आने वाले साधु-संतों और लाखों श्रध्दालुओं की सुविधा के लिए बिजली, पानी, प्राथमिक चिकित्सा, अग्नि सुरक्षा, यातायात व्यवस्था, दाल-भात केन्द्रों की व्यवस्था, नगर एवं मेला स्थल की नियमित साफ-सफाई सहित सभी बुनियादी जरूरतों का ध्यान रखने के निर्देश दिए। कृषि मंत्री श्री चन्द्रशेखर साहू ने कहा कि मेले में होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों में छत्तीसगढ़ के स्थानीय कलाकारों और कला मण्डलियों को भी मुख्य मंच पर सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ  सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का मौका दिया जाना चाहिए। प्रभारी मंत्री ने इसके लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।

DSC 0062 महाशिवरात्री पर निकली साधु संतों की शो्भा यात्राDSC 0072 महाशिवरात्री पर निकली साधु संतों की शो्भा यात्राDSC 0079 महाशिवरात्री पर निकली साधु संतों की शो्भा यात्राDSC 0085 महाशिवरात्री पर निकली साधु संतों की शो्भा यात्राDSC 0102 महाशिवरात्री पर निकली साधु संतों की शो्भा यात्रा

राजिम अर्द्ध कुंभ-2011

महा्शिवरात्री पर निकली साधु-संतों की शोभा यात्रा शाही स्नान का अनुष्ठान संपन्न

संस्कृति मंत्री श्री अग्रवाल ने शोभायात्रा में शामिल होने बाद
शाही स्नान कुंड में डुबकी लगायी

रायपुर 02 मार्च 2011/ राजिम के त्रिवेणी संगम में माघ पूर्णिमा से आयोजित राजिम कुंभ में आज महा्शिवरात्री पर साधु-संतों और महात्माओं की शोभा यात्रा निकली। इसके बाद शाही स्नान का अनुष्ठान सम्पन्न हुआ। हजारों साधु-संतों ने त्रिवेणी संगम पर बने शाही स्नान कुंड में स्नान किया। प्रातः 6 बजे से संत-समागम स्थल से शोभा यात्रा शुरू हुई। शोभा यात्रा नवापारा से निकलकर पुराना पुल पारकर राजिम होते हुए शाही कुंड तक पहुंची। पर्यटन, संस्कृति तथा धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल भी शोभा यात्रा में शामिल होकर नवापारा तथा राजिम नगर का भ्रमण किया। इसके बाद अपने परिवारजनों के साथ पावन स्नान किया। महाषिवरात्रि पर आज हजारों श्रद्धालुओं ने त्रिवेणी पर डुबकी लगायी। पावन स्नान का सिलसिला सुबह चार बजे से ही प्रारंभ हो गया था।  भगवान राजीव लोचन मंदिर और कुलेष्वर महादेव मंदिर सहित नवापारा-राजिम के मंदिरों में दिनभर दर्शनार्थियों की भीड़ रही।  शोभा यात्रा में नागासाधु सबसे आगे चल रहे थे। साधु-संत अपने अखाड़ों, मठों और पीठों के ध्वजों के साथ शोभायात्रा में शामिल हुए।

DSC 0041 300x198 महाशिवरात्री पर निकली साधु संतों की शो्भा यात्रा

नागा साधुओं और अन्य अखाड़ों के साधुओं ने शोभायात्रा में अपने धार्मिक शस्त्रों के साथ परम्परागत शरीरिक करतब का प्रदर्षन किया। आम लोगों ने गाजे-बाजे के साथ निकली शोभा यात्रा का पूरे मार्ग में भव्य स्वागत किया। शाही कुंड में सबसे पहले नागा साधुओं ने स्नान किया। हर-हर महादेव की जयघोष के साथ शाही स्नान का कार्यक्रम सम्पन्न हुआ।  महाषिवरात्रि पर्व पर स्नान के लिए आज संगम का पानी का पर्याप्त बहाव था। प्रषासन द्वारा महाषिवरात्रि पर्व को देखते हुए श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए व्यापक प्रबंध किए गए थे। पर्यटन मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल पूरी रात मेला स्थल में रूककर प्रशासन द्वारा की गई व्यवस्थाओं का जायजा लिया।

NAGA  SADHU 31369f शाही स्नान के साथ ‘राजिम अर्द्धकुंभ‘ का समापन आज

राजिम अर्धकुंभ महापर्व 2011‘

 नागा साधुओं एवं अखाड़ों का प्रदर्षन मुख्य आकर्षण होगा

रामायण पर आधारित महानाट्य ने खींची हजारों की भीड़

रायपुर. धर्म, कला और संस्कृति का गौरवशाली प्रतीक बन चुके ’राजिम अर्धकुंभ महापर्व 2011‘ का समापन कल 02 मार्च को ‘शाही स्नान‘ के साथ होगा. महाप्रभु वल्लभाचार्य पीठाधीष्वर द्वारकेशलालजी के पावन सानिध्य में होने वाले समारोह के मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ के राज्यपाल श्री शेखर दत्त होंगे जबकि अध्यक्षता पर्यटन, संस्कृति और धर्मस्व मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल करेंगे.

त्रिवेणी संगम में स्थित मुख्य मंच पर होने वाले समापन समारोह के विशिष्ट  अतिथि कृषि मंत्री चंद्रषेखर साहू, महासमुंद के सांसद चंदूलाल साहू, रायपुर के सांसद रमेश बैस, संसदीय सचिव युद्धवीर सिंह जूदेव, राजिम विधायक अमितेष शुक्ल, पामगढ विधायक रामसुंदरदास, कुरूद विधायक लेखराम साहू, पूर्व शिक्षा मंत्री अजय चंद्राकर, पूर्व सांसद संत पवन दीवान, राज्य गृह भंडारण निगम के अध्यक्ष अशोक बजाज, जिला पंचायत अध्यक्ष लक्ष्मी वर्मा, जिला पंचायत राजिम अध्यक्ष संतोष उपाध्याय, नगर पंचायत राजिम अध्यक्ष अंजना महाडिक, गोबरा नवापारा के अध्यक्ष देहुती साहू, फिंगेष्वर जनपद पंचायत के अध्यक्ष अन्नपूर्णा साहू, अभनपुर जनपद पंचायत के अध्यक्ष गिरिजा साहू एवं मगरलोड जनपद पंचायत के अध्यक्ष माधव सिंह ध्रुव होंगे.

सालों बाद महाषिवरात्रि का पुण्य-योग 

sahi snan शाही स्नान के साथ ‘राजिम अर्द्धकुंभ‘ का समापन आज

पण्डित झम्मन शास्त्री के मुताबिक राजिम-कुंभ के चार स्नान पर्वों मंें महाशिवरात्रि के दिन होने वाला शाही स्नान बेहद पुण्यदायी होता है. विशेषतौर पर कल के दिन पड़ने वाली महाशिवरात्रि का योग सालों बाद आया है जो पुण्यदायी और फलदायी साबित होगा. भगवान शिव को समर्पित महा शिवरात्रि के दिन ब्रहम मुहुर्त में होने वाले शाही स्नान में हिस्सा लेने के लिये आज देर रात तक श्रद्धालुओं के राजिम पहुंचने का सिलसिला जारी रहा. नतीजन साधु-संत के आश्रमों में भक्तों की भीड़ लगी रही. दूसरी ओर पर्यटन व संस्कृति मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल ने देर रात तक शाही स्नान की तैयारियों का जायजा लिया और आयोजन समिति को पर्याप्त व्यवस्था और सुरक्षा प्रबंध करने के निर्देश  अधिकारियों को दिये. स्नान के लिये बने विशेष कुण्ड में भरपूर पानी का भराव सुनिष्चित किया गया तथा घाटों से पानी छोडा गया है. परिवार के साथ पहुंचे श्रद्धालुओं के निवास, प्रसाद और भोजन की व्यवस्था कुंभ स्थल में की गई है. वहीं प्रमुख मंदिरों भगवान राजीवलोचन और कुलेष्वर महादेव एवं हवन कुण्डों को भी सजाया गया है.

शाही स्नान जुलूस होगा मुख्य आकर्षण

kumbmela2 272x300 शाही स्नान के साथ ‘राजिम अर्द्धकुंभ‘ का समापन आजराजिम-कुंभ के अंतिम शाही स्नान का मुख्य आकर्षण कल प्रातः निकलने वाला शाही स्नान जुलूस होगा जिसमें देश-प्रदेश से आये पांच हजार से ज्यादा साधु संत, नागा साधु-साध्वियां, विभिन्न सम्प्रदायों के गुरू, महंत और अखाड़े तथा महामण्डलेष्वर शामिल होंगे. इस अवसर पर नागा साधुओं की लीला, संतों का दरबार, तलवारबाजी, करतब, ढोल नगाड़े और अखाड़ों का प्रदर्शन देखने योग्य होगा. प्रमुख रूप से अग्नि पीठाधीष्वर आचार्य महामंडलेष्वर श्री रामकृष्णानंद जी महाराज अमरकंटक, राजगुरू महामंडलेष्वर श्री स्वामी विषोकानंद जी महाराज बिकानेर, चम्पारण प्राक्टय पीठाधीष्वर श्रध्येय आचार्य श्री द्वारकेशलाल जी महाराज चम्पारण, परम श्रध्येय श्री माधवप्रियदास जी महाराज छारोड़ी गुरूकुल अहमदाबाद, तंत्र सम्राट श्री बिन्दुजी महाराज हैदराबाद, बालयोगी श्री महंत शिवगिरी जी महाराज राष्ट्रीय सचिव आहवान अखाड़ा, श्री महंत हंसराम जी महाराज उदासीन भिलवाड़ा, श्री धमेन्द्रसाहेब प्रयाग, श्री जीवनानंद चैतन्य जी महाराज ओंकारेष्वर, श्री जालेष्वर महाराज अयोध्या, साध्वी प्रतिभा दीदी छत्तीसगढ़, स्वामी हनुमान उदासीन पुष्कर, श्री महंतलखनगीरी जी महाराज नीरंजनी अखाड़ा, श्री राधेस्वरूप ब्रम्हचारी प्रयाग, दंडी स्वामी रामाश्रम महाराज, दिगमंबर स्वामी प्रयाग, श्री महंत हरकेवलदास जी महाराज अंिबंकापुर तथा बाबा रामगीरी जी महाराज प्रयाग वाले उपस्थित रहेंगे. पर्यटन, संस्कृति व धर्मस्व मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल भी षाही स्नान जूलूस में षामिल होंगे.

रामायणकालीन युग जीवंत हो उठा…

ram lila 300x201 शाही स्नान के साथ ‘राजिम अर्द्धकुंभ‘ का समापन आजमुक्ताकाशी मंच पर प्रतिदिन होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों में आज देर रात हुए मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान राम पर आधारित महानाटक ने पूरे दो घंटे तक श्रद्धालुओं को बांधे रखा. ध्वनि, प्रकाष और 100 से ज्यादा कलाकारों के अभिनय पर केंिद्रत इस नाटयलीला का आनंद हजारों लोगों ने उठाया. विषेष तौर पर पर्यटन, संस्कृति और धर्मस्व मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल ने इस महानाटय को देखा और इसके डायरेक्टर सहित कलाकारों को सम्मानित भी किया. लगभग दो घंटे के इस महानाट्य में भगवान राम के सम्पूर्ण जीवन उतारा गया है. खासतौर पर श्रवणकुमार और राजा दram leela 150x150 शाही स्नान के साथ ‘राजिम अर्द्धकुंभ‘ का समापन आजषरथ का दृष्य, सीता की अग्निपरीक्षा, जटायु गरूण का अनूठा चित्रण, हनुमान की पूंछ से लंका का दहन, भावनाओं को छूने वाले सुरीले गीत, डिजीटल ध्वनि मुद्रण और आधुनिक तकनीक से सजे संगीत, अतिभव्य रंगमंच, सेंटस, तीस हजार वाटस का साउंड, स्पेषल लाईट इफेक्टस, तत्काल बदलने वाला भव्य सेटस आदि ने महानाटय को सफल बनाने में पूरा योगदान दिया और श्रोतागण हतप्रभ से रात दो बजे तक महानाटय का आनंद उठाते रहे. आर्षीवाद मुवीटोन प्राइवेट लिमिटेड के निर्माता विजय खेर ने बताया कि राजिम में इस महानाटय का यह पचपनवां षो था जिसमें दर्षकों का अच्छा रिस्पांस मिला. महानाटय पूरे तीन दिनों तक चला.

आज के सांस्कृतिक कार्यक्रम

राजिम-अर्द्धकुंभ के अंतिम दिन कल 02 मार्च को मुख्य कार्यक्रम मुंबई के गायक मो. अजीज और प्रीति भल्ला का रखा गया है. दोनों कलाकार भजन और गीतों की प्रस्तुतियां देंगे. इसके अलावा तिल्दा के सामेयषास्त्री देवी का पंडवानी, रायपुर की निर्मला ठाकुर का भजन, दुर्ग के गोकुल मढरिया का लोकमंच, राजिम के संतोष षर्मा का भजन, पौसरी के रामजी यादव का नृत्य, नवाअंजोर संगीत बोडला का लोकमंच, बिजेतला के लोकनाथ साहू का नाचा और रायपुर की डाॅ विनीता पाण्डे का रामायण पाठ मुख्य कार्यक्रमों में शामिल है.

DSC 0977 राजिम अर्द्धकुंभ महापर्व पर विधानसभा सदस्यों ने लिया साधु संतों का आर्षीवादDSC 0967 राजिम अर्द्धकुंभ महापर्व पर विधानसभा सदस्यों ने लिया साधु संतों का आर्षीवादDSC 0982 राजिम अर्द्धकुंभ महापर्व पर विधानसभा सदस्यों ने लिया साधु संतों का आर्षीवाद

कुंभ का विरोध कभी नहीं करेंगे: धर्मजीत सिंह

विजया एकादषी पर निर्विघ्न संपन्न हुआ तीसरा स्नान पर्व

रायपुर. राजिम-अर्द्धकुंभ में विधानसभा के पक्ष व प्रतिपक्ष के विधायकों ने आज एक स्वर में साधु-संतों से राज्य की षांति, समृद्धि और विकास के लिये आर्षीवाद मांगा. दूसरी ओर, ब्रहृम मुहुर्त में विजया एकादषी का स्नान पर्व भी सम्पन्न हुआ जिसमें दूरदराज से पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं ने सपरिवार त्रिवेणी संगम में स्नानकर पुण्य लाभ हासिल किया.

धर्म, संस्कृति और समाज का संगम ’राजिम अर्धकुंभ महापर्व 2011‘ अब अपने अंतिम दौर में पहुंच गया है इसीलिये आज विधानसभा के सदस्यों ने विधानसभा अध्यक्ष धरमलाल कौषिक व संसदीय कार्यमंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल के साथ राजिम-कुंभ का प्रवास किया और भगवान राजीवलोचन तथा कुलेष्वर महादेव के दर्षनकर साधु-संतों का आर्षीवाद मांगा. विधानसभा अध्यक्ष धरमलाल कौषिक ने छत्तीसगढ की षांति व समृद्धि के लिये साधु-संतों का आर्षीवाद जरूरी बताया और कहा कि इसके लिये राजिम-कुंभ एक अच्छा अवसर मिला है. उन्हांेेने कहा कि संतों की वाणी और विचार जानने से मानव जीवन तृप्त होता है.

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल ने अग्निपीठाधीष्वर श्री रामकृष्णानंद महाराज और अतिथियों का स्वागत किया तथा साधु-संतों का आर्षीवाद मांगते हुए कहा कि देष में चार कुंभ होते रहे हैं लेकिन छत्तीसगढ में प्रतिवर्स होेने वाले कुंभ की षुरूआत हुई है जिसकी सफलता देषभर से आये साधु-संतों ने सुनिष्चित की है. हम उनके आभारी हैं.

कांग्रेस के वरिस्ठ विधायक श्री धर्मजीत सिंह ने अपने प्रभावी उदबोधन में कहा कि राजिम-कुंभ का विरोध कभी नहीं होगा लेकिन इसके आयोजन में होने वाली खामियों पर ध्यान आकर्षित करना विपक्ष का धर्म है जिसका पालन हम करते रहेंगे. उन्होंने कहा कि गुरू के बिना भगवान के दर्षन नहीं हो सकते इसलिए साधु-संतों का आर्षीवाद जरूरी है.

मुख्य मंच पर विषिस्ट अतिथि के रूप में मंत्री गृह एवं जेल नंनकीराम कंवर, पंचायत मंत्री रामविचार नेताम, कृषि मंत्री चंद्रषेखर साहू, उच्च षिक्षा मंत्री हेमचंद यादव, खेल मंत्री लता उसेंडी, संसदीय सचिव भैयालाल राजवाड़े, विजय बघेल, कोमल बघेल, विधानसभा सदस्य श्रीमती रजनी त्रिपाठी, प्रेमसाय सिंह टेकाम, अमरजीत सिंह भगत, जागेष्वर राम भगत, हृदयराम राठीया, रामदयाल उइके, धरमजीत सिंह, कृष्ण मूर्ति बांधी, डाॅ. हरिदास भारद्वाज, अम्बिका मरकाम, लेखराम साहू, विरेन्द्र साहू, प्रतिमा चन्द्राकर, भजन सिंह निरंकारी, डोमनलाल कोरसेवाड़ा, षिवराज सिंह सहारे, श्रीमती सुमित्रा मारकोले, सेवकराम नेताम, श्रीमती कुमारी मदनसाहू उपस्थित थे. वरिष्ठ पत्रकार और हिंदी ग्रंथ अकादमी के अध्यक्ष रमेष नैयर तथा अमृत संदेष के संपादक गोविन्दलाल वोरा उपस्थित थे.

प्रामुख साधु-संतो ंके तौर पर अग्नि पीठाधीष्वर आचार्य महामंडलेष्वर श्री रामकृष्णानंद जी महाराज अमरकंटक, राजगुरू महामंडलेष्वर श्री स्वामी विषोकानंद जी महाराज बिकानेर, चम्पारण प्राक्टय पीठाधीष्वर श्रध्येय आचार्य श्री द्वारकेषलाल जी महाराज चम्पारण, परम श्रध्येय श्री माधवप्रियदास जी महाराज छारोड़ी गुरूकुल अहमदाबा, तंत्र सम्राट श्री बिन्दुजी महाराज हैदराबाद, बालयोगी श्री महंत षिवगीरी जी महाराज राष्ट्रीय सचिव आहवान अखाड़ा, श्री महंत हंसराम जी महाराज उदासीन भिलवाड़ा, श्री धमेन्द्रसाहेब प्रयाग, श्री जीवनानंद चैतन्य जी महाराज ओंकारेष्वर, श्री जालेष्वर महाराज अयोध्या, साध्वी प्रतिभा दीदी छत्तीसगढ़, स्वामी हनुमान उदासीन पुष्कर, श्री महंतलखनगीरी जी महाराज नीरंजनी अखाड़ा, श्री राधेस्वरूप ब्रम्हचारी प्रयाग, दंडी स्वामी रामाश्रम महाराज, दिगमंबर स्वामी प्रयाग, श्री महंत हरकेवलदास जी महाराज अंिबंकापुर तथा बाबा रामगीरी जी महाराज प्रयाग वाले उपस्थित थे.

पर्व-स्नान में हजारों ने लगाई आस्था की डुबकी

राजिम-कुंभ का तीसरा स्नान पर्व आज विजया एकादषी के दिन निर्विघ्न संपन्न हुआ. श्रद्धालुओं में क्या महिलायें, क्या बच्चे और क्या बुजुर्गजन, सभी ने संगम में स्नान किया तथा मंदिरों मंे जाकर सुख समृद्धि का आर्षीवाद मांगा. इस दौरान स्नान के लिये बने विषेष कुण्ड में पर्याप्त जल घाटों से छोड़ा गया था. पं. ब्रह्मदत्त शास्त्री ने बताया कि राजिम-कुंभ का यह तीसरा पर्व स्नान था.

विजयाएकादषी समस्त एकादषी में तीसरे नम्बर की एकादषी मानी गई है जो फागुन मास के कृष्ण पक्ष में आती है. षास्त्री जी के अनुसार जो मनुष्य जीवन में विजय और सफलता की कामना चाहते हैं, उन्हें एकादषी का व्रत जरूर करना चाहिये. इसी महत्व को ध्यान में रखकर आज के पर्व स्नान में षामिल होने के लिये हजारों श्रद्धालु आसपास के ग्रामांे से राजिम पहुंचे. पर्व स्नान को लेकर राजिम-कुंभ प्रषासन ने भी संपूर्ण तैयारियां की थी जिसमें जलकुण्ड में पानी की सुनिष्चितता, साधु-संतो के आश्रमों की व्यवस्था तथा मंदिरों में भीड़ उमडने के मददेनजर सुरक्षा प्रबंध पर ध्यान दिया गया. साधु-संतों, नागा साधुओं के आश्रमों में जहां प्रसाद और भोजन की व्यवस्था की गई थी वहीं कई आश्रमों में हवन-कुण्ड में यज्ञ और भजन आदि संपन्न हुए.

DSC 0519 विजया एकादशी पर तीसरा स्नान पर्व आजDSC 0496 विजया एकादशी पर तीसरा स्नान पर्व आज14 विजया एकादशी पर तीसरा स्नान पर्व आजDSC 0490 विजया एकादशी पर तीसरा स्नान पर्व आज 

राजिम अर्धकुंभ महापर्व 2011‘:

पुण्य लाभ उठाने पहंचे हजारों श्रद्धालु,

विजय और सफलता के लिये एकादशी व्रत जरूरी,

सांई दरबार का हिस्सा बनने उमड़े राजिम वासी 

रायपुर. धर्म, संस्कृति और समाज का संगम ’राजिम अर्धकुंभ महापर्व 2011‘ का तीसरा स्नान पर्व कल 28 फरवरी को ब्रम्हमुहुर्त में संपन्न होगा जिसका पुण्य लाभ उठाने के लिये श्रद्धालुओं का सपरिवार दूरदराज से राजिम पहुंचने का सिलसिला देर रात तक जारी रहा. दूसरी ओर, पर्यटन व संस्कृति मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल ने स्नान-पर्व की तैयारियों का जायजा लिया तथा संत समागम से लेकर श्रद्धालुओं के आवास, भोजन, प्रसाद व अन्य तैयारियों के साथ-साथ राजिम-कुंभ स्थल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अधिकारियों को निर्देशित किया. 

राजिम के विद्वान पं. ब्रह्मदत्त शास्त्री ने बताया कि राजिम-कुंभ का यह तीसरा पर्व स्नान है. कल की विजया एकादशी समस्त एकादषी में तीसरे नम्बर की एकादशी मानी गई है जो फागुन मास के कृष्ण पक्ष में आती है. शास्त्री जी के अनुसार जो मनुष्य जीवन में विजय और सफलता की कामना चाहते हैं, उन्हें एकादशी का व्रत जरूर करना चाहिये. इसी महत्व को ध्यान में रखकर कल के पर्व स्नान में शामिल होने के लिये देर रात हजारों श्रद्धालु आसपास के ग्रामों से राजिम पहुंचे और उनके आने का सिलसिला जारी था. पर्व स्नान को लेकर राजिम-कुंभ प्रशासन ने भी संपूर्ण तैयारियां की जिसमें जलकुण्ड में पानी की सुनिश्चितता, साधु-संतो के आश्रमों की व्यवस्था तथा मंदिरों में भीड़ उमडने के मददेनजर सुरक्षा प्रबंध पर विशेष ध्यान रखा गया है.

उफान पर श्रद्धालुओं की भीड़

राजिम-कुंभ की रौनक आज शबाब पर थी. रविवार अवकाश् का दिन होने से अंचल भर के ग्रामीण एवं शहरी दर्शकों की भीड़ दोपहर तीन बजे से महोत्सव स्थल, मेला परिसर तथा श्रीराजीवलोचन मंदिर व कुलेश्वर उठे थे, लेकिन अब बढ़ रही भीड़ ने उनके आत्मविश्वास को बढ़ाया है. फिंगेश्वर, बोरसी, कोपरा, पांडुका, दूर्ग, भिलाई आदि से आये व्यापारियों ने बताया कि उन्हें सिर्फ दो दिनों में ही अपने सामानों की अतिरिक्त पूर्ति करनी पड़ी, उन्हें रायपुर राजधानी आदि से अपने खत्म हुये स्टाक मंगाने पड़े. दोनों प्रसिद्ध मंदिरों में श्रद्धालुओं ने देर शाम तक भगवान के दर्शन किये.

 राजिम में दिखी भगवान राम की ‘लीला‘

राजिम कुंभ के मुख्य मंच पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों की छटा के तहत आज सांस्कृतिक संध्या में  लोहारा के पंडवानी गायक प्रहलाद निषाद, भजन भगत साहू गीत भजन बाबी मण्डल रायपुर, लोकमंच खुमान साव, चंदैनी गोंदा राजनांदगांव, नृत्य गीत दीपाली पांडे रायपुर, लोकमंच दिनेष साहू, मोर मयारू माटी गुंजैरा, भजन कांतिलाल बरलोटा रायपुर, नृत्य पं. राम शैला सरगुजा, नाचा मोहन साहू झिंटपाटन सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का हिस्सा बने. सांस्कृतिक संध्या का मुख्य आकर्षण  भगवान राम की लीला पर आधारित महानाट्य लाईट एंड साउण्ड के कार्यक्रम ने खूब रंग जमाया. लेखक सुधाकर बख्शी के अनुसार यह प्रस्तुति एक प्रयास है भगवान राम और उनके महान आदर्षो से पुनः परिचय करने का. तत्कालीन राम को पाकर ही हम संभवतः हमारी खोई हुई अस्मिता, प्रतिष्ठा तथा सांस्कृतिक गरिमा को प्राप्त कर सकते है. सबसे प्रभावी प्रस्तुति रामायणकालीन इतिहास तथा तत्कालीन संस्कृति और सभ्यता का पर आधारित महानाटक रहा. लाईट एण्ड साउंड षो के प्रभाव व कलाकारों के अभिनय ने इस कदर प्रभावी किया कि एकबारगी लगा कि मानो भगवान राम स्वयं धरती पर उतर आये हों.

पूरे शहर ने किये सांई बाबा के दर्शन

श्री सांई सेवा संस्थान राजिम के तत्वाधान में आज दोपहर 3 बजे शिरडी सांई दरबार से निकली सांईबाबा की पालकी यात्रा का आनंद उठाने व आशिर्वाद लेने श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी. पालकी यात्रा सांई दरबार से निकलकर गरियाबंद मार्ग होते हुए बस स्टैंड, मेला मैदान, गौरवपथ से व्ही.आई.पी. मार्ग होते हुए षहर में  भ्रमण किया कुलेष्वर महादेव मंदिर श्रीराजीवलोचन मंदिर से होकर वापस सांई दरबार पहुंचा. इसके बाद सांईबाबा की विशेष  पूजा अर्चना की गई. पालकी यात्रा के दौरान जगह-जगह नगरवासियों ने पूजा अर्चना किया तथा सांई भक्तों को प्रसाद वितरण किया गया. पालकी यात्रा में सांई सेवा संस्थान के मोहन ठाकुर, लाला साहू, लालचंद मेद्यवानी, मुकेश् सोनकर, सुनील श्रीवास्तव, राकेश् गुप्ता, प्रदीप जैन, संजीव ठाकुर, बंधु साहू सहित अनेक लोग शामिल हुए. आरती के बाद शाम को राऊरकेला के भजन गायक लालजी भाई का भजन सुनने भारी भीड़ लगी रही.

प्रवचनों ने बहुत कुछ सिखाया

संत समागम में श्रद्धालुओं को अपने आध्यात्मिक ज्ञान को बढाने के कई अवसर प्राप्त हो रहे हैं. ज्ञानी साधु-संतों को सुनने और समझने के लिये श्रद्धालु सपरिवार सहित दरबार में हाजरी लगाते देखे जा सकते हैं. वैसे आज पाण्डोखर सरकार के दरबार का समापन हो गया. इस अवसर पर गुरूशरण महाराज ने सम्बोधित करते हुए कहा कि विपदा से घबराने की जरूरत नहीं बल्कि उसका हिम्मत के साथ सामना करें. जीवन में सुख और दुख, धूप छांव की तरह है जो समय-समय कर व्यक्ति को जीवन में कर्म के प्रभाव से प्रभावित करते हैं.

संत समागम स्थल पर ही अखिल भारतीय धर्म मर्मज्ञ स्वामी राजीवनयन महाराज ने अपने विशाल  डोम में उपस्थित हजारों श्रद्धालुओं को धर्म संदेश  देते हुए कहा कि धर्म, जनकल्याण के लिए होना चाहिए. धर्म का संदेष गूंजना चाहिए तथा उस संदेश को मानव को अपने जीवन में उतारकर सद्ाचरण कर कलयुग के भवसागर से पार होने का प्रयत्न करना चाहिये. राजीव नयन महाराज ने कहा कि दोष व गुण मानव के जीवन का रूप है. बिना दोष के अच्छाइयों का महत्व नहीं होता. भगवान श्रीराम मर्यादा पुरूषोत्तम अपने धर्मपालन के रूप कहलाये, वहीं रावण महापण्डित होने के बावजूद अधर्मी व पापी कहलाया।

आज की सांस्कृतिक झलकियां

कुंभ के सांस्कृतिक मंच पर कल 28 फरवरी को दुर्ग की कुमारी देवी निषाद की पंडवाणी, मथुरा की गीतांजली षर्मा को होली मयूर नृत्य, कोलकाता की सीमा घोष की पंडवाणी, मानभौरा के लालजी श्रीवास का लोकमंच, रायपुर की ममता चंद्राकर का लोकमंच, बिलासपुर की सुमेधा चटर्जी लाहिड़ी का भजन, गरियाबंद के मोहित मोगरे का नृत्य, बिलासपुर के हिलेन्द्र ठाकुर का लोकमंच और मर्यादा पुरूषोत्तम लाईट एण्ड साउंड का महानाटय का लाभ श्रोता उठा सकेंगे.

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‘कुंभ से रचनात्मक शक्ति मिलती है‘

‘राजिम अर्द्धकुंभ महापर्व 2011‘

रायपुर. भाजपा के छत्तीसगढ़ प्रभारी श्री जगतप्रकाष नडृडा का मानना है कि कुंभ के दर्षन करने से मन से ऋणात्मक षक्ति का हास और रचनात्मक षक्ति का विकास होता है. छत्तीसगढ़ भाग्यषाली है कि उसे राजिम-कुंभ के माध्यम से साधु-संतों का आर्षीवाद प्राप्त हो रहा है. श्री नड्डा, आज ‘राजिम अर्द्धकुंभ महापर्व‘ पर मुख्य मंच से संबोधित कर रहे थे. उनके साथ भाजपा के प्रकोष्ठ प्रभारी महेन्द्र पाण्डे भी मंच पर मौजूद थे.

श्री नड्डा ने कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजनों को प्रोत्साहन देने की जरूरत है. भाजपा की रमन सरकार धर्म के प्रति जागरूक है और ऐसे आयोजनों में रूचि लेते रही है. संभवतः यही राजिम-कुंभ की सफलता का राज है. समारोह की षुरूआत अतिथियों के स्वागत से हुई. पर्यटन और संस्कृति मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल ने साधु-संतों व अतिथियों का स्वागत पुष्पहार से किया. अपने उद्बोधन में उन्होंने कहा कि राजिम-कुंभ देषभर में छत्तीसगढ़ की पहचान बन चुका है और यह छत्तीसगढ़वासियों का सौभाग्य है कि उन्हें संतों का आर्षीवाद प्राप्त हुआ है. भाजपा के प्रकोष्ठ प्रभारी महेन्द्र पाण्डे ने राजिम-कुंभ को देव-धरती बताया और खुद को हिस्सा लेने के लिये सौभाग्यषाली माना तथा राजिम-कुंभ की सफलता की कामना की. इस अवसर पर षदाणी दबार के गुरू युधिस्ठिर महाराज और राज्य भंडार निगम के अध्यक्ष अशोक बजाज उपस्थित थे.

नागा साधुओ की ‘पेशवाई‘ ने दिल जीता

राजिम अर्धकुंभ में पधारे नागा साधुओं की पेषवाई आज 26 फरवरी को अपने अराध्य देव के सम्मान में निकली. श्री दत्तात्रय मंदिर राजिम से निकली षोभायात्रा अपरान्ह 12 बजे से भव्य बाजे गाजे आतीष बाजी एवं अस्त्र-षस्त्रों से सुसज्जित होकर नगर के गरियाबंद रोड से होते हुए पं. सुदंरलाल शर्मा चैक बस स्टैण्ड पहंुची. वहां नागा साधुओं ने अपने शौर्य का प्रदर्षन भी किया. हाथों में तलवार, कटार, त्रिषुल, बक्र्षी, डंडे से नागा साधुओं ने बस स्टैण्ड तथा चैक चैराहों में जमकर शौर्य प्रदर्षन किया जिसे देखने देष के कोने-कोने से आये लाखों श्रध्दालू एवं भक्तगण उमड़ पड़े. मेले में देखा गया कि संतो की कृपा लेने पहुंचे लोगों ने नागा साधुओं की आरती उतारी तथा आषीर्वाद भी लिया,. नागा साधुओं की यह पेषवाई देखती ही बनती थी. हर-हर महादेव की गूंजे तथा भगवान दत्तात्रय के जयकारे से पुरा नगर भक्तिमय हो गया. इस दौरान संस्कृति विभाग के प्रताप पारख व पूलिस प्रषासन के नवापारा थाना प्रभारी ओ.टी. नारायण, राजिम थाना प्रभारी आर.के. दुबे बाज पूलिस एवं बी.एस. के दर्जनों जवान उनकी सुरक्षा व्यवस्था में दुरूस्त दिखे.

असंग साहेब एवं राजीव नयन राजिम पहुंचे .

संत समागम स्थल पर कबीर पंथ के असंग साहेब के प्रवचन, राजीव नयन महाराज की भागवत कथा एवं बाबा बालकदास के अन्नपूर्णा महायज्ञ में षामिल होने दूर दूर से लोग पहुंच रहे है. आज षाम को संत समागम स्थल पर कबीर के भजनो एवं गीतो पर आधारित प्रवचन देकर श्रद्धालुओं का मार्गदर्षन किया. असंग साहेब से मिलने उनके भक्त दूर-दूर से उनके आश्रम में पहुंचकर मुलाकात कर रहे हैं. प्रख्यात श्रीमद्भागवत कथा वाचक राजीव नयन महाराज वृंदावन से राजिम पहुंचे. अर्धकुम्भ के नौवे दिन आज दोपहर 12 बजे नागा साधुओं ने अराध्य देव श्री दत्तात्रेय भगवान का आहवान कर उन्हे षाही स्नान हेतु आमंत्रण देने राजिम नगर में भव्य रैली निकाली जिसमें विभिन्न अखाड़ों के नागा साधुओं ने अपने-अपने करतब दिखाकर लोगो को चकित कर दिया. तलवार, कटार, त्रिषुल, डंडे से नागा साधुओं के षौर्य प्रदर्षन से देखने लोगों का हुजुम उमड़ पड़ा. हर हर महादेव के नारे लगाते लागा साधुओं का दल लोमषऋषि आश्रम पहुंचा और अपने इष्ट देवता की स्थापना की.

गौमाता प्रदर्शनी में हुआ ‘चमत्कार‘

राजिम कुंभ स्थल में श्रीकुलेष्वर नाथ महादेव मंदिर के सामने गौ माता पर लगी चित्र प्रदर्षनी में अजीब चमत्कार हुआ. गौमाता प्रदर्षनी स्थल में उस समय बड़ा ही अद्भूत चमत्कार हो गया जब एक गाय ने अपने बछड़े को यहां पर जन्म दिया. दोनों ही इस वक्त पूर्णतः स्वस्थ र्है. यह भगवान राजीव लोचन व श्रीकुलेष्वर नाथ महादेव का ही आषीर्वाद है कि गौमाता प्रदर्षनी मे स्वयं गौमाता प्रगट हुुई है वो भी अपने बछड़े के साथ, यह चमत्कार नहीं तो और क्या है. जब कोई सेवक सच्चे मन से किसी की सेवा करता है, सेवा में रम जाता है ऐसे में कोई चमत्कार हो जाये तो यह कोई आष्चर्य से कम नहीं है. गाय द्वारा अपने बछड़े को जन्म देना इसी बात का प्रमाण है. प्रदर्षनी का उदघाटन पुरी पीठाधीष्वर जगत्गुरू शंकराचार्य स्वामी श्री निष्चलानंद जी सरस्वती के हाथों हुआ था.

बृजमोहन को ‘गुरूचरण सेवा शिरोमणी‘ की उपाधि

श्री चक्र महामेरू पीठ् के आश्रम में देषभर से आए साधु-संतों ने पर्यटन एवं धर्मस्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल को गुरूचरण सेवा षिरोमणी की उपाधि से अंलकृत किया है. पीठ के संचालक महामण्डलेष्वर दण्डी स्वामी महाराज ने बताया कि राजिम-कुंभ में जिस तरह संतों का सम्मान हो रहा है और उनका ख्याल रखा जा रहा है, उसे देखते हुए श्री बृजमोहन जी को यह उपाधि देने का निर्णय हुआ. देर षाम को संतो व महात्माओं की सहमति व उनके आर्षिवाद से इस कुंभ के प्रणयता पयर्टन व धर्मस्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल को गुरूचरण सेवा षिरोमणी की उपाधि से अंलकृत करने का फैसला लिया गया जिसे सभी धमाचार्यो ने स्वीकार किया. आज के इस सम्मेलन में बिन्दुजी महाराज, पंडोखर सरकार, महामण्डलेष्वर स्वामी देवानंद गिरी, महामंत्री महंत ईष्वरदास, डाॅ. स्वामी रामेष्वरदास,, बालयोगी रामबालकदास पाटेष्वरधाम आदि उपस्थित थे. इस अलंकरण के बाद ज्योतिष वास्तुतंत्र अध्यात्म धर्म महासम्मेलन आयोजित किया गया जिसमंे देष भर से आए साधु संतो ने ज्योतिष एवं अध्यात्म पर चर्चा की. ज्योतिष को लेकर लोगों के भ्रम को दूर करने व उसकी वैज्ञानिक रूप से प्रमाणीकरण के विषय पर चर्चा हुई.

भजनों की सुरमयी शाम

राजिम कुंभ के मुख्य मंच पर देर रात तक सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला पेष की गई जिसमें अनेक सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए लेकिन रायपुर के अनूज रंजन पाण्डेय द्वारा पेष बस्तर बैण्ड व बेंगलूरू से आये आर्ट आॅफ लिविंग के अंकित बत्रा के भजनों ने भक्ति और संगीत से सजी ऐसी प्रस्तुति दी कि श्रद्धालु कुर्सियों पर जमे रहे. इसी तरह पलारी के अर्जुन सेन की पंडवानी, रायपुर के भारती बंधु का भजन, रायपुर के अनूप रंजन पाण्डे का बस्तर बैण्ड, रायपुर के तेजराम साहू का लोकमंच, बिलासपुर के रामावतार चंद्राकर का लोकमंच, रायपुर की महुआ मजूमदार की नृत्य नाटिका, स्वर्णा दिवाकर का जगराता, खैरागढ़ के षंकर भोला नाच पार्टी का नाचा और मर्यादा पुरूषोत्तम लाईट एण्ड साउंड का महानाट्य सांस्कृतिक संध्या का मुख्य आकर्षण रहा.

आज के सांस्कृतिक आकर्षण

राजिम कुंभ के मुख्य मंच पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों की छटा के तहत कल 27 फरवरी को लोहारा के पंडवानी गायक प्रहलाद निषाद, भजन भगत साहू गीत भजन बाबी मण्डल रायपुर, लोकमंच खुमान साव, चंदैनी गोेंदा राजनांदगांव, नृत्य गीत दीपाली पांडे रायपुर, लोकमंच दिनेष साहू, मोर मयारू माटी गुंजैरा, भजन कांतिलाल बरलोटा रायपुर, नृत्य पं. राम शैला सरगुजा, नाचा मोहन साहू छिंट पाटन, महानाट्य मर्यादापुरूषोत्तम लाईट एंड साउण्ड के कार्यक्रम पेष होंगे.

DSC 0100 आस्था की डुबकी लगाने उमड़े श्रद्धालु

बिना किसी विघ्न बाधा के संपन्न हुआ दूसरा स्नान पर्व
नागा साधुओं की ‘पेशवाई‘ आज

रायपुर. उल्लास और श्रद्धा मन में संजोये लाखों श्रद्धालुओं ने आज ‘राजिम अर्धकुंभ महापर्व 2011‘ के दूसरे स्नान पर्व पर त्रिवेणी संगम मंे डुबकी लगाई तथा मंदिरों में पूजा-अर्चना कर भगवान राजीवलोचन व कुलेष्वर महादेव के दर्षन कर सुख-समृद्धि का आर्षीवाद मांगा. वहीं दूरदराज से आये साधु-संतों और नागा बाबाओं ने ब्रहम मुहुर्त में ही स्नान कर पुण्य-लाभ कमाया. दूसरी ओर कल नागा साधुओं की ‘पेषवाई‘ आकर्षण का केंद्र होंगी.
उल्लेखनीय है कि जानकी जयंती के दिन ‘राजिम कुंभ‘ में दूसरा स्नान पर्व होता है. मान्यता है कि यह दिन मां जगदम्बा जानकी के प्राकट्य की पावन तिथि है. आज के दिन मिथिला नरेष राजा जनक के खेत में हल से भूमि के जोते जाने के समय उसके सीत से स्पर्ष करके जो देवी प्रकट हुईं उन्हंें सीता कहा गया और जनकदुलारी होने से ये मां जानकी के नाम से जानी जाती हैं. इसी किवदती को मान्यकर पौराणिक काल से जानकी जयंती मनाई जा रही है. इसी तादात्मय में आज का स्नान पर्व बिना किसी विध्न बाधा के साथ संपन्न हुआ. राजिम कुंभ प्रषासन द्वारा सुरक्षा के चाक चैबंद प्रबंध किये गये थे.
आश्रमों में उमड़े श्रद्धालु
स्नान के लिये बने विषेष कुण्ड में पर्याप्त जल घाटों से छोड़ा गया था. श्रद्धालुओं में क्या महिलायें, क्या बच्चे और क्या बुजुर्गजन, सभी ने संगम में स्नान किया तथा मंदिरों मंे जाकर सुख समृद्धि का आर्षीवाद मांगा. साधु-संतों, नागा साधुओं के आश्रमों में जहां प्रसाद और भोजन की व्यवस्था की गई थी वहीं कई आश्रमों में हवन-कुण्ड में यज्ञ और भजन आदि संपन्न हुए. दूसरी ओर चंपारण्य में साधु-संतों की प्रवचन माला जारी रही. संत बालकदास महाराज के आश्रम सहित संत प्रेमादास जी महाराज दण्डी स्वामी तीर्थ महाराज, बालकदास महाराज, हरिसंतोषानंद महाराज, अनुसूइयादास महाराज, सालिगदास महाराज, रामदास महाराज, बद्रीप्रसाद महाराज, योगेन्द्रदास महाराज, हरिसंतोषानंद महाराज, पन्डोखर सरकार आदि के दरबार में श्रद्धालुओं ने भोजन प्रसादी और प्रवचन का लाभ उठाया. पण्डोखर महाराज ने अपने आश्रम में देषभर से आये आचार्य, महामण्डलेष्वरों एवं साधु-संतों का पुष्पमाला पहनाकर व दक्षिणा भेंटकर उनका सम्मान आर्षीवाद ग्रहण किया.
कल नागा साधुओं की पेषवाई
देषभर से आये नागा साधुओं के दर्षन यदि आपको करने हैं तो राजिम-कुंभ में कल 26 फरवरी को दोपहर 12 बजे निकलने वाली पेषवाई में षामिल हों. दषनाम जूना अखाडा बडा हनुमान घाट काषी के कोतवाल बसंत पुरी ने बताया कि अपने गुरू के सम्मान में नागा साधु ‘पेषवाई’ निकालते हैं जिसके अंतर्गत भगवान दत्तात्रय जो तीनों देवताओं ब्रम्हा, विष्णु, महेष के प्रतीक और नागा साधुओं के इष्ट देवता हैं, की मूर्ति लोमस ऋसि आश्रम में स्थापित की जायेगी. उल्लेखनीय है कि महाषिवरात्रि के दिन होने वाले षाही स्नान में सर्वप्रथम गुरू का स्नान होता है तत्पष्चात नागा साधु स्नान करते है. दूसरी ओर आज राजिम’-अर्द्धकुंभ में नागा साधु एवं साध्वियों का एक दल जिसमें चालीस से ज्यादा नागा साध्वियां षामिल हैं, नेपाल, बंगाल, काषी और अयोध्या से आज यहां पहंुची जो अगले षाही स्नान तक यहां रहेगी. एक बातचीत में उन्होंने बताया कि अभी तक देषभर में चार महाकुंभों के बारे में देखा-सुना था लेकिन राजिम-कंुभ में पहली बार पहुंचे हैं.
सांईबाबा की षोभायात्रा आज
कल 27 फरवरी को श्री षिरडी सांई दरबार से दोपहर एक बजे सांई बाबा की भव्य पालकी यात्रा निकाली जायेगी जो बस स्टैण्ड से मेला मैदान गौरव पथ श्री कुलेष्वर नाथ मंदिर से राजीव लोचन मंदिर का चक्कर लगाते हुए वापस श्री षिर्डी सांई दरबार पहुंचेगी. इसी दिन सांई बाबा की विषेष पूजा-अर्चना एवं महाप्रसाद का वितरण किया जायेगा. संख्या आरती के पश्चात् 7 बजे प्रसिध्द सांई भजन गायक लालजी भाई राउर केला (उड़ीसा) की भजन संध्या आयोजित की गई है. यह भव्य आयोजन श्री षिर्डी सांई दरबार रायपुरा के प्रमुख सदस्यों के सहयोग से श्री सांई सेवा संस्थान राजिम द्वारा आयोजित किया गया है.
इलाहाबादी भजनों में डूबे रहे भक्तजन
सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रंृखला में आज इलाहाबाद से आये भजन गायक मनोज कुमार गुप्ता ने भक्ति-सुरों की ऐसी तान छेड़ी कि श्रोता बने भक्तजन अपनी कुर्सी पर बैठे-बैठे हिलोरे लेते रहे. सधे हुए सुरों और मजे हुए संगतकारों ने मनोज के आधा दर्जन से अधिक देवी भजनों में जान डाल दी और दर्षक बार-बार उन्हें भजन गाने के लिये प्रेरित करते रहे. भजनों की गंगा में रायपुर के प्रषांत ठाकर भी एक छोर बने जिन्होंने उम्दा भजन पेष किये. जबकि साजा के महेन्द्र चैहान की पंडवाणी ने अंचल की कलात्मक खुषबू बिखेरी. पाटन के भारत भूषण परगनिहा ने लोकमंच पेष किया और मनेन्द्रगढ के एस. हरमहेंदर सिंह सुगम गायन, लखन यादव का राउत नाचा, मोना सेन का लोकमंच और लाटाबोर के डोमार सिंह का नाचा देर रात तक श्रद्धालुओं को लुभाते रहे जिन्होंने उनका खासा मनोरंजन किया. नागपुर के कलाकार जयप्रकाष शर्मा ने अपने प्रभावषाली आवाज के माध्यम से एक से एक भजनों की प्रस्तुति को जनता ने काफी सराहा गया. भिलाई के अष्वनी वर्मा ने अजब फासला हुआ, ये क्या हुआ जैसे गजल गाकर दर्षकों से खूब तालियाॅ बटोरी. रायपुर के भजन गायक रजत दत्ता ने भजनों की उत्कृष्ट श्रृंखला से माहौल को पूरा भक्तिमय बना दिया. राजनांदगाॅव के कलाकार शैल किरण ने विविध प्रस्तुतियों से सबका मन मोह लिया.
संदेष देती धार्मिक झांकियां आकर्सित कर रही
कुंभ-स्थल पर लगाई गई धार्मिक झांकियां श्रद्धालुओं को आकर्सित कर रही है और संदेष देती प्रतीत हो रही है. विषेष तौर पर षिर्डी धाम, राम झांकी, पाताल लोक, स्वर्ग-नरक, मायानगरी, जुरासिक पार्क, अमरनाथ गुफा और गौ माता पर केंद्रित चित्रमय झांकी और प्रदर्षनी ने श्रद्धालुओं की भीड़ खीचीं है. श्री कुलष्ेवर महादेव मंदिर के सामने स्थित गौमाता की झांकी में गाय की महत्ता को प्रतिपादित किया गया है जिसका व्यवस्थापन मथुरा से पधारे संत श्री सुभाष जी महाराज देख रहे हैं. प्रदर्षनी में अतंररास्ट्रीय कृषि गौ पर्यावरण संरक्षण परिषद का सहयोग भी मिल रहा है.
बिंदुजी महाराज का षक्ति दरबार
हैदराबाद से राजिम-कुंभ में पधारे प्रख्यात तंत्र-मंत्र सम्राट योगीराज बिन्दुजी महाराज ‘‘बिन्दू’’ जी ने प्रतिवर्ष की भांति विषुध्द पंचधातु से निर्मित 21 किलो वजनी सुमेरूपीठ सिध्द तंत्रोक्त श्री यंत्र की स्थापना संत समागम क्षेत्र स्थित अपने कैम्प में पूर्व तांत्रिक विधि-विधान के साथ किया. श्रीयंत्र पीठ के साथ-साथ माॅं भगवती महाकाली की भव्य धातु निर्मित प्रतिमा दुर्लभ षिवलिंग, भगवान गणपति, भगवती महिषासुर मर्दनी, भगवान मारूतिनंदन की प्रतिमाओं की स्थापना के साथ-साथ अखण्ड ज्योति की भी स्थापना की गयी है जिसके दर्षनार्थ कुंभ क्षेत्र में बिन्दुजी महाराज के कैम्प में भक्तों की भीड़ बनी रहती है। विषेष आकर्षण के रूप में प्रत्येक यात्रियों को महाराज श्री द्वारा दिव्यरूद्राक्ष प्रसाद दिया जा रहा है. महाराज श्री के दर्षनार्थ पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री बृजमोहन अग्रवाल अपने दलबल के साथ पहुंचे और महाराज श्री के साथ-साथ मां भगवती महाकाली का आषीर्वाद प्राप्त किया. इस अवसर पर महाराज श्री के षिष्यगण मदंन सत्येन्द्रानंद उदासीन, चंडीदास उदासीन, महंत रामजी दास उदासीन के अतिरिक्त तमाम अधिकारी वर्ग उपस्थित थे.
26 फरवरी के कार्यक्रम:
पलारी के अर्जुन सेन की पंडवानी, रायपुर के भारती बंधु का भजन, आर्ट आॅफ लिविंग बेंगलूर के अंकित बत्रा का भजन, रायपुर के अनूप रंजन पाण्डे का बस्तर बैण्ड, रायपुर के तेजराम साहू का लोकमंच, बिलासपुर के रामावतार चंद्राकर का लोकमंच, रायपुर की महुआ मजूमदार की नृत्य नाटिका, स्वर्णा दिवाकर का जगराता, खैरागढ़ के षंकर भोला नाच पार्टी का नाचा और मर्यादा पुरूषोत्तम लाईट एण्ड साउंड का महानाट्य सांस्कृतिक संध्या का मुख्य आकर्षण होंगे.

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जानकी जयंती पर दूसरा पर्व स्नान आज

’राजिम अर्धकुंभ महापर्व 2011‘:

पण्डवानी, भजन और और संतों की वाणी गूंजती रही,
देश की सांस्कृतिक एकता ने दिखाये मनमोहक रंग

रायपुर. धर्म, संस्कृति और समाज का संगम बन चुके ’राजिम अर्धकुंभ महापर्व 2011‘ का दूसरा स्नान पर्व कल 25 फरवरी को ब्रम्ह मुहुर्त में संपन्न होगा. श्री जानकी जयंती पर होने वाले इस पवित्र स्नान में दूरदराज से साधु-संत और लाखों श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है जिसकी तैयारियां पूर्ण हो चुकी हैं. पर्यटन व संस्कृति मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल ने आज सम्पूर्ण तैयारियों का जायजा लिया तथा स्नान-पर्व के लिये समुचित व्यवस्था करने के निर्देश अधिकारियों को दिये.

राजिम-अर्द्धकुंभ के पं. ब्रह्मदत्त शास्त्री ने जानकी जयंती का महत्व बताते हुए कहा कि यह मां जगदम्बा जानकी के प्राकट्य की पावन तिथि है. आज के दिन मिथिला नरेश राजा जनक के खेत में हल से भूमि के जोते जाने के समय उसके सीत से स्पर्ष करके जो देवी प्रकट हुईं उन्हंें सीता कहा गया और जनकदुलारी होने से ये मां जानकी के नाम से जानी जाती हैं। इनका विवाह भगवान श्रीराम से हुआ, अतः इस दिन को जानकी जयंती के नाम से मनाया जाता है.

पर्व स्नान की तैयारियां पूर्ण

दूसरी ओर जानकी जयंती के महत्व को देखते हुए राजिम-कुंभ आयोजन समिति द्वारा आज पवित्र पर्व स्नान की तैयारियों को अंतिम रूप दिया गया. स्नान के लिये बने विषेष कुण्ड में भरपूर पानी का भराव सुनिष्चित किया गया तथा घाटों से पानी छोडा गया. दूरदराज से आये साधु-संतों, नागा साधुओं भक्त मण्डलियों और आसपास के गांवों से अपने परिवार के साथ पहुंचे श्रद्धालुओं के निवास, प्रसाद और भोजन की व्यवस्था की गई है वहीं दूसरी ओर प्रमुख मंदिरों सहित हवन कुण्डों को भी सजाया गया. संत समागम में तैयार हुए साधु-संतों के आश्रमों पर पहुंचे उनके षिष्यों और श्रद्धालुओं के आवास और भोजन की विषेष व्यवस्था की गई है. संत बालकदास महाराज के आश्रम पर भी उनके षिष्यों और श्रद्धालुओं की खासी भीड देखी गई.

गौ माता की झांकी और प्रदर्शनी उदघाटित हुई

कुंभ-स्थल पर आज गौ माता पर केंद्रित चित्रमय झांकी और प्रदर्शनी का उदघाटन आज पीठाधीष्वर जगतगुरू शंकराचार्य निश्‍चलानंद सरस्वती के हाथों हुआ. उन्होंने कहा कि गौमाता की सेवा करने वालों की कमी होना चिंता का विषय है. ऐसी स्थिति में जनमानस की चेतना व भावना को जागृत करने के लिये ऐसी प्रदर्शनियां और झांकी बहुत सहायक सिद्ध होगीं. श्री कुलेश्‍वर महादेव मंदिर के सामने स्थित इस झांकी में गाय की महत्ता को प्रतिपादित किया गया है जिसका व्यवस्थापन मथुरा से पधारे संत श्री सुभाष जी महाराज देख रहे हैं. इस अवसर मुख्य रूप से गौसेवक झूमरलाल टावरी, रामजी लाल अग्रवाल, टीकमदास चांडक, पं. सुभाष तिवारी, श्रीमती रत्ना देवी, स्वामी आत्मानंद, ममता शुक्ला, अवधेष सिंग, विभा तिवारी, विभा दुबे सहित गौभक्त उपस्थित थे. प्रदर्शनी में अंतराष्ट्रीय कृषि गौ पर्यावरण संरक्षण परिषद का सहयोग भी मिल रहा है.

सांस्कृतिक एकता का मनमोहक दर्षन
त्रिवेणी संगम पर स्थित मुक्ताकाशी मंच पर प्रतिदिन होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुतियां अब उफान पर हैं. कल देर रात को छत्तीसगढ़ सहित महाराष्ट्र, उड़ीसा और मध्यप्रदेश के कलाकारों ने बेहतरीन प्रस्तुतियां देकर सांस्कृतिक एकता का खूबसूरत उदाहरण पेश किया. स्थानीय कलाकारों ने आज रंगमंच पर भिलाई की उषा बारले ने पंडवाणी, भिलाई के अष्विनी वर्मा का भजन, रायपुर के मनोज सेन का लोकमंच, नागपुर के जयप्रकाष षर्मा का भजन तथा रायपुर के दिलीप ताम्रकार की नृत्य नाटिका, लिटिया सेमरिया के अजय उमरे का नाचा तथा छत्तीसगढ के मषहूर ढोला मारू भिलाई की रजनी रजक ने मनमोहक प्रस्तुतियां देकर दर्शकों का खासा मनोरंजन किया. कल देर रात को छत्तीसगढ की अद्वितीय सांस्कृतिक हलचल पण्डवानी गायिका पद्मभूषण डाॅ. तीजन बाई ने कपालिक शैली में पण्डवानी पेश की. संगीत राग और अभिनय की त्रिवेणी तीजनबाई ने महाभारत के दुःशासन वध का दृष्य सामने रखते हुए बेहतरीन चित्रण किया. उनकी प्रस्तुति को देख-सुन दर्षक मंत्रमुगध होकर रह गये. तीजनबाई के अभिनय में साहस, करूणा, दया की भावाभिव्यक्ति दिखाई दी. अन्य प्रस्तुतियों में भिंभोरी के कलाकार अमृता साहू ने
पंडवानी गायन महाराष्ट्र के कलाकारों ने लावणी नृत्य, उड़ीसा के कलाकारों ने शेख नृत्य व सागर के कलाकारों ने राई नृत्य की प्रस्तुति देकर दर्षकों कों बांधे रखा. मनेन्द्रगढ़ के कलाकार एस. हरमिंदर सिंग ने चुनिंदा भजनों के माध्यम से वातावरण को भक्तिमय बनाया. सांस्कृतिक कार्यक्रम का संचालन सुरेष कुमार शर्मा व निरंजन साहू ने किया।

कुंभ क्षेत्र में गूंजी संतों की वाणी

राजिम-कंुंभ में पहुचे श्रद्धालुओं का विषाल मेले और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने खासा मनोरंजन किया तो दूसरी ओर मुख्य मंच में संतों की वाणी भी गूंजी. महामण्डलेष्वर ईष्वर दास और गाजियाबाद के महंत नारायणदास महाराज ने राजिम-कंुभ को देश में हिन्दु धर्म का प्रमुख केन्द्र बताया और छत्तीसगढ सरकार की तारीफ करते हुए कहा कि इस कुंभ की खासियत यह है कि साधु-संतों को पर्याप्त सम्मान मिलता है. त्रिवेणी संगम की रेत में बने विषाल डोम में पधारे दतिया स्थित श्री पंडोखरसरकार धाम के त्रिकाल प्रदर्षी संत श्री गुरूषरण जी महाराज ने कहा कि हमें संत की परीक्षा न लेकर उनका परिक्षण करना चाहिये. संतो से हमें प्रकाष मिलता है, हमारे अंदर छुपी अज्ञानता का वे समन करते हैं तथा इस अंधकार को मिटाकर ज्ञान रूपी पुंज प्रकाषित करते है. पांडोखर सरकार के दरबार में प्रातः 10ः30 बजे से कुपन (टोकन) वितरण किया जावेगा तथा दूर-दूर से आने वाले भक्तो के लिए भोग भंडारा, प्रसाद की व्यवस्था की गई है. इसी तरह संत प्रेमादास जी महाराज दण्डी स्वामी तीर्थ महाराज, बालकदास महाराज, हरिसंतोषानंद महाराज, अनुसूइयादास महाराज, सालिगदास महाराज, रामदास महाराज, बद्रीप्रसाद महाराज, योगेन्द्रदास महाराज, हरिसंतोषानंद महाराज, पन्डोखर सरकार आदि ने अपने-अपने आश्रमों में श्रद्धालुआंे को आर्षीवाद दिया.

कल 25 फरवरी की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां:

साजा के महेन्द्र चैहान की पण्डवानी, रायपुर के प्रशांत ठाकर का भजन गायन, पाटन के भरत भूषण परगनिहा का लोकमंच, इलाहाबाद के मनोज कुमार गुप्ता का भजन गायन, मनेन्द्रगढ के एस. हरमिन्दर सिंह का सुगम गायन, लखन यादव का राउत नृत्य, मोना सेन का लोकमंच, लाटाबोर के डोमार सिंह कुंवर का नाचा मुख्य आकर्षण होंगे.
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sant samagam संत समागम का शुभारंभsant samagam1 संत समागम का शुभारंभsant samagam2 संत समागम का शुभारंभ

‘राजिम अर्द्धकुंभ महोत्सव‘ के संत समागम केशुभारंभ पर संस्कृति, प्रकृति और धर्म पर हुआ चिंतन

प्रकृति और विकास के बीच संतुलन रखें: शंकराचार्य नि्श्‍चलानंद सरस्वती

रायपुर. गोवर्धन पीठाधीष्वर sant samagam3 292x300 संत समागम का शुभारंभजगतगुरू षंकराचार्य स्वामी निष्चलानंद सरस्वती ने विकास के नाम पर हो रहे प्राकृतिक विनाश पर चिंता जताते हुए कहा है कि प्रकृति और विकास के बीच हो रहा असंतुलन पूरे विश्व के लिये विनाशदायी साबित हो रहा है. श्री शंकराचार्य जी ‘राजिम अर्द्धकुंभ महोत्सव‘ पर आयोजित संत समागम में उपस्थित जनसमूह को संबोधित कर रहे थे.

महानदी, सोंढुर और पैरी नदियों के पवित्र संगम पर आयोजित राजिम कुंभ के छठवें दिन विशाल संत समागम को संबोधित करते हुए जगतगुरू षंकराचार्य स्वामी निष्चलानंद सरस्वती ने कहा कि मेघा्शक्ति, श्रमशक्ति, अर्थशक्ति व रक्षा शक्ति का दोहन हो रहा है जबकि सरकारों को चाहिए कि इनका बेहतर उपयोग कर समाज और देश का विकास करें. उन्होंने नदियों के प्रदूषण, पर्वतों के घटने, गौ-वंश के खत्म होते जाने पर चिंता जताई और दुःख जताया कि ऐसा वे लोग कर रहे हैं जो खुद हिन्दु हैं. श्री शंकराचार्य ेजी ने विश्व में कम और कमजोर होते हिन्दुओं की दशा, घटते हिन्दु-देशों पर चिंता और हिन्दुओं के धर्मांतरण पर चिंता प्रगट करते हुए आषंका जताई कि दूसरे देश नहीं चाहते कि सनातन धर्म का प्रतीक बना भारत देश मजबूत हो और दुनिया का मार्गदर्शक बने. स्वामी निष्चलानंद महाराज ने कहा कि प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर विकास करना पूरे ्विश्व के लिए लाभदायक हो गया है.

राजिम के विकास में काम आयेंगे संतों के सुझाव: डाॅ. रमनसिंह
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि दूसरी ओर मुख्यमंत्री डाॅ. रमनसिंह ने विष्वास दिलाया है कि राजिम नगरी की पवित्रता बनाये रखने के लिये संतों ने जो सुझाव व मर्गदर्शन दिया है  उस पर अमल किया जायेगा. श्री सिंह ने कहा कि नया छत्तीसगढ़ राज्य अब एक नई करवट बदल रहा है। प्रदेश की दो करोड़ से अधिक जनता विकास के एक द्शक को पार कर अब ग्यारहवे वर्ष में प्रवे्श कर चुकी है। इस दौरान राज्य शासन द्वारा विगत सात वर्षो में आम जनता के लिए शुरू की गई विभिन्न योजनाओं से पूरे देश में छत्तीसगढ़ की पहचान बनी है। गरीबों के लिए शुरू की गई अत्यंत किफायती चावल की योजना को अब केन्द्र सरकार पूरे देष में लागू करने जा रही है। डाॅ. सिंह ने कहा कि भगवान राजीव लोचन और संत महात्माओं के आशिर्वाद से छत्तीसगढ़ में सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली लाने के लिए आने वाले वर्षो में और भी अधिक बेहतर प्रयास राज्य सरकार द्वारा किये जाएंगे। राजिम कुंभ ने छत्तीसगढ़ को देश के सांस्कृतिक मानचित्र पर एक नई पहचान दिलायी है। उन्होनें कहा कि भगवान राजीव लोचन की कृपा और संत महात्माओं के आषीर्वाद और जनता के सहयोेग से राजिम कुंभ का यह छठवां आयोजन यहाॅ किया गया है मुख्यमंत्री ने कहा कि यह राजिम कुंभ का ही एक अच्छा और सुखद प्रभाव है कि इन छह वर्षो में छत्तीसगढ़ पर अकाल का कोई प्रभाव नहीं पड़ा, बल्कि देश का यह नया राज्य और भी अधिक तेजी से विकास के पथ पर आगे बढ़ता चला जा रहा है। पलायन की पीड़ा से छत्तीसगढ़ मुक्त हुआ है। सकल घरेलू उत्पाद की दृष्टि से राज्य की विकास दर 11.49 प्रतिशत रही जो देश में सबसे ज्यादा है। इसमें छत्तीसगढ़ ने गुजरात जैसे पुराने और विकसित राज्य को भी पीछे छोड़ दिया। डाॅ. सिंह ने संत समागम मे पधारे गोवर्धन मठ, पुरी के जगत्गुरू शंकराचार्य स्वामी निश्‍चलानंद सरस्वती सहित देष भर से आए संत महात्माओं का स्वागत करते हुए कहा कि इनके आगमन से छत्तीसगढ़ की धरती धन्य हुई है। मुख्यमंत्री ने राजिम कुंभ में श्रद्धालुओं  की सुविधा के लिए छह करोड़ रूपए की लागत से बनवाए गए एनीकट का उल्लेख करते हुए कहा कि इसमे छह फीट से भी ज्यादा पानी रहेेगा। आने वाले वर्षो में राजिम कुंभ को इसकी गरिमा के अनुरूप बेहतर से बेहतर सुविधाओं से सुसज्जित किया जाएगा।

जहां धर्मात्माओं का राज, वहीं परमेश्वर का वास: बृजमोहन अग्रवाल

पर्यटन, संस्कृति, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि कोई भी कुंभ साधु-संतांे के बिना सार्थक नहीं हो सकता. राजिम-कुंभ ने बहुत कम समय में देश और विदे्श में पहचान स्थापित की है. उन्होंने कहा कि परमात्मा वहंी राज करते हैं, जहां धर्मात्माओं का राज होता है इसलिए हमने साधु-संतों का सम्मान कर उनका आशिर्वाद हासिल किया. हमारे लिए सौभाग्य की बात है कि छत्तीसगढ़ के पावन तीर्थ स्थल राजिम में हर वर्ष लगने वाले राजिम कुंभ का यह छठा वर्ष है उन्होने कहा कि राजिम कुंभ के शिल्पी मुख्यमंत्री डाॅ. रमन सिंह के नेतृत्व में प्रदेष सरकार द्वारा कानून बनाकर राजिम कुंभ परम्परा की शुरूआत की गई जहां धर्मात्माओ का राज होता है वहां परमात्मा का वास होता है। उन्होने कहा कि साधु संतो के आशिर्वाद से हम छत्तीसगढ़ को एक ऐसा आदर्श राज्य बनायेगें जहां धर्म की रक्षा हो, सुख शांति हो और कोई भूखा न रहे। छत्तीसगढ़ धर्म धरा है। राजिम कुंभ के माध्यम से धर्मध्वजा पूरे विश्‍व में लहरायेगी।

इस अवसर पर कृषि मंत्री श्री चन्द्रशेखर साहू, खाद्य मंत्री श्री पुन्नू लाल मोहले, छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के अध्यक्ष श्री कृष्ण कुमार राय, छत्तीसगढ़ राज्य भण्डार गृह निगम के अध्यक्ष श्री अशोक बजाज, संसदीय सचिव भरत साय, राजिम विधायक श्री अमितेश शुक्ल, संत कवि और पूर्व सांसद श्री पवन दीवान, पूर्व मंत्री श्री अजय चंद्राकर सहित अनेक जनप्रतिनिधि और हजारों की संख्या में भक्तजन उपस्थित थे। कृषि मंत्री चंद्रशेखर साहू तथा खाद्य मंत्री पुन्नू लाल मोहले ने अपने संबोधन में कहा कि छत्तीसगढ़ विभिन्न धर्मो और संप्रदायांे का आस्था का केन्द्र है। इस पावन धरती पर कुंभ परम्परा की शुरूआत से छत्तीसगढ़ को नई पहचान मिलेंगी। राजिम विधायक श्री अमितेश शुक्ल ने भी कार्यक्रम मे अपने विचार व्यक्त किये। कार्यक्रम का संचालन अनुराधा दुबे ने किया और आभार प्रदर्शन  पर्यटन मण्डल के अध्यक्ष कृष्ण कुमार राय ने किया. इस अवसर पर संस्कृति और पर्यटन के सचिव सुब्रत साहू, कलेक्टर रोहित यादव, एसपी दीपांशु काबरा आदि उपस्थित थे.

DSC 0719A राजिम में लोकनिर्माण विभाग द्वारा  ६९ लाख रु.की लागत से नवनिर्मित विश्राम गृह भवन का लोकार्पण
DSC 0725 राजिम में लोकनिर्माण विभाग द्वारा  ६९ लाख रु.की लागत से नवनिर्मित विश्राम गृह भवन का लोकार्पण

DSC 9642 150x150 राजिम में लोकनिर्माण विभाग द्वारा  ६९ लाख रु.की लागत से नवनिर्मित विश्राम गृह भवन का लोकार्पणरायपुर २३ फरवरी २०११. मुख्यमंत्री रमन सिंह ने आज छत्तीसगढ़ की सुप्रिसिद्ध तीर्थनगरी राजिम में लोकनिर्माण विभाग द्वारा लगभग ६९ लाख रु.की लागत से नवनिर्मित विश्राम गृह भवन का लोकार्पण किया. पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की. मंत्री पुन्नुलाल मोहले और विधायक अमितेष शुक्ला विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित थे.नए विश्राम भवन में दो व्ही.आई.पी. सूट सहित  तीन कमरे, एक डायनिंग हाल और किचन, तथा स्टोर रूम बनाए गए है.

14 दिवसीय राजीम कुंभ का समापन आज

शंकराचार्य निश्चलानंद जी का पावन सानिध्य और राज्यपाल शेखर दत्त होंगे मुख्य अतिथि शाही स्नान के पूर्व अखाड़ों ने शस्त्र-निशानों [...]

सर्वधर्म-समभाव का संदेश देता राजिम कुंभ – बृजमोहन

रायपुर/18/02/2012/संस्कृति मंत्री बृजमोहन अग्रवाल से उनके शंकर स्थित निवास पर मुलाकात कर आज सामाजिक कार्यकर्ता रेहाना खान के नेतृत्व में [...]

तीसरा पर्व स्नान, हजारों ने त्रिवेणी मे डुबकी लगा पुण्य लाभ कमाया

राजिम कुंभ 2012 ग्यारहवाँ दिन लोकमंच और जगराता के नाम रायपुर 17-2-2012। राजिम कुंभ 2012 के तीसरे पर्व स्नान विजया [...]

विजया एकादशी पर तीसरा पर्व स्नान आज – राजिम कुम्भ 2012

देर रात तक बांधे रखा स्थानीय कलाकारों और चंदन दास के भजनो ने रायपुर 16-2-2012। ’राजिम कुंभ’ 2012 का तीसरा [...]

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