जानकी जयंती पर दूसरा पर्व स्नान आज
’राजिम अर्धकुंभ महापर्व 2011‘:
पण्डवानी, भजन और और संतों की वाणी गूंजती रही,
देश की सांस्कृतिक एकता ने दिखाये मनमोहक रंग
रायपुर. धर्म, संस्कृति और समाज का संगम बन चुके ’राजिम अर्धकुंभ महापर्व 2011‘ का दूसरा स्नान पर्व कल 25 फरवरी को ब्रम्ह मुहुर्त में संपन्न होगा. श्री जानकी जयंती पर होने वाले इस पवित्र स्नान में दूरदराज से साधु-संत और लाखों श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है जिसकी तैयारियां पूर्ण हो चुकी हैं. पर्यटन व संस्कृति मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल ने आज सम्पूर्ण तैयारियों का जायजा लिया तथा स्नान-पर्व के लिये समुचित व्यवस्था करने के निर्देश अधिकारियों को दिये.
राजिम-अर्द्धकुंभ के पं. ब्रह्मदत्त शास्त्री ने जानकी जयंती का महत्व बताते हुए कहा कि यह मां जगदम्बा जानकी के प्राकट्य की पावन तिथि है. आज के दिन मिथिला नरेश राजा जनक के खेत में हल से भूमि के जोते जाने के समय उसके सीत से स्पर्ष करके जो देवी प्रकट हुईं उन्हंें सीता कहा गया और जनकदुलारी होने से ये मां जानकी के नाम से जानी जाती हैं। इनका विवाह भगवान श्रीराम से हुआ, अतः इस दिन को जानकी जयंती के नाम से मनाया जाता है.
पर्व स्नान की तैयारियां पूर्ण
दूसरी ओर जानकी जयंती के महत्व को देखते हुए राजिम-कुंभ आयोजन समिति द्वारा आज पवित्र पर्व स्नान की तैयारियों को अंतिम रूप दिया गया. स्नान के लिये बने विषेष कुण्ड में भरपूर पानी का भराव सुनिष्चित किया गया तथा घाटों से पानी छोडा गया. दूरदराज से आये साधु-संतों, नागा साधुओं भक्त मण्डलियों और आसपास के गांवों से अपने परिवार के साथ पहुंचे श्रद्धालुओं के निवास, प्रसाद और भोजन की व्यवस्था की गई है वहीं दूसरी ओर प्रमुख मंदिरों सहित हवन कुण्डों को भी सजाया गया. संत समागम में तैयार हुए साधु-संतों के आश्रमों पर पहुंचे उनके षिष्यों और श्रद्धालुओं के आवास और भोजन की विषेष व्यवस्था की गई है. संत बालकदास महाराज के आश्रम पर भी उनके षिष्यों और श्रद्धालुओं की खासी भीड देखी गई.
गौ माता की झांकी और प्रदर्शनी उदघाटित हुई
कुंभ-स्थल पर आज गौ माता पर केंद्रित चित्रमय झांकी और प्रदर्शनी का उदघाटन आज पीठाधीष्वर जगतगुरू शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती के हाथों हुआ. उन्होंने कहा कि गौमाता की सेवा करने वालों की कमी होना चिंता का विषय है. ऐसी स्थिति में जनमानस की चेतना व भावना को जागृत करने के लिये ऐसी प्रदर्शनियां और झांकी बहुत सहायक सिद्ध होगीं. श्री कुलेश्वर महादेव मंदिर के सामने स्थित इस झांकी में गाय की महत्ता को प्रतिपादित किया गया है जिसका व्यवस्थापन मथुरा से पधारे संत श्री सुभाष जी महाराज देख रहे हैं. इस अवसर मुख्य रूप से गौसेवक झूमरलाल टावरी, रामजी लाल अग्रवाल, टीकमदास चांडक, पं. सुभाष तिवारी, श्रीमती रत्ना देवी, स्वामी आत्मानंद, ममता शुक्ला, अवधेष सिंग, विभा तिवारी, विभा दुबे सहित गौभक्त उपस्थित थे. प्रदर्शनी में अंतराष्ट्रीय कृषि गौ पर्यावरण संरक्षण परिषद का सहयोग भी मिल रहा है.
सांस्कृतिक एकता का मनमोहक दर्षन
त्रिवेणी संगम पर स्थित मुक्ताकाशी मंच पर प्रतिदिन होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुतियां अब उफान पर हैं. कल देर रात को छत्तीसगढ़ सहित महाराष्ट्र, उड़ीसा और मध्यप्रदेश के कलाकारों ने बेहतरीन प्रस्तुतियां देकर सांस्कृतिक एकता का खूबसूरत उदाहरण पेश किया. स्थानीय कलाकारों ने आज रंगमंच पर भिलाई की उषा बारले ने पंडवाणी, भिलाई के अष्विनी वर्मा का भजन, रायपुर के मनोज सेन का लोकमंच, नागपुर के जयप्रकाष षर्मा का भजन तथा रायपुर के दिलीप ताम्रकार की नृत्य नाटिका, लिटिया सेमरिया के अजय उमरे का नाचा तथा छत्तीसगढ के मषहूर ढोला मारू भिलाई की रजनी रजक ने मनमोहक प्रस्तुतियां देकर दर्शकों का खासा मनोरंजन किया. कल देर रात को छत्तीसगढ की अद्वितीय सांस्कृतिक हलचल पण्डवानी गायिका पद्मभूषण डाॅ. तीजन बाई ने कपालिक शैली में पण्डवानी पेश की. संगीत राग और अभिनय की त्रिवेणी तीजनबाई ने महाभारत के दुःशासन वध का दृष्य सामने रखते हुए बेहतरीन चित्रण किया. उनकी प्रस्तुति को देख-सुन दर्षक मंत्रमुगध होकर रह गये. तीजनबाई के अभिनय में साहस, करूणा, दया की भावाभिव्यक्ति दिखाई दी. अन्य प्रस्तुतियों में भिंभोरी के कलाकार अमृता साहू ने
पंडवानी गायन महाराष्ट्र के कलाकारों ने लावणी नृत्य, उड़ीसा के कलाकारों ने शेख नृत्य व सागर के कलाकारों ने राई नृत्य की प्रस्तुति देकर दर्षकों कों बांधे रखा. मनेन्द्रगढ़ के कलाकार एस. हरमिंदर सिंग ने चुनिंदा भजनों के माध्यम से वातावरण को भक्तिमय बनाया. सांस्कृतिक कार्यक्रम का संचालन सुरेष कुमार शर्मा व निरंजन साहू ने किया।
कुंभ क्षेत्र में गूंजी संतों की वाणी
राजिम-कंुंभ में पहुचे श्रद्धालुओं का विषाल मेले और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने खासा मनोरंजन किया तो दूसरी ओर मुख्य मंच में संतों की वाणी भी गूंजी. महामण्डलेष्वर ईष्वर दास और गाजियाबाद के महंत नारायणदास महाराज ने राजिम-कंुभ को देश में हिन्दु धर्म का प्रमुख केन्द्र बताया और छत्तीसगढ सरकार की तारीफ करते हुए कहा कि इस कुंभ की खासियत यह है कि साधु-संतों को पर्याप्त सम्मान मिलता है. त्रिवेणी संगम की रेत में बने विषाल डोम में पधारे दतिया स्थित श्री पंडोखरसरकार धाम के त्रिकाल प्रदर्षी संत श्री गुरूषरण जी महाराज ने कहा कि हमें संत की परीक्षा न लेकर उनका परिक्षण करना चाहिये. संतो से हमें प्रकाष मिलता है, हमारे अंदर छुपी अज्ञानता का वे समन करते हैं तथा इस अंधकार को मिटाकर ज्ञान रूपी पुंज प्रकाषित करते है. पांडोखर सरकार के दरबार में प्रातः 10ः30 बजे से कुपन (टोकन) वितरण किया जावेगा तथा दूर-दूर से आने वाले भक्तो के लिए भोग भंडारा, प्रसाद की व्यवस्था की गई है. इसी तरह संत प्रेमादास जी महाराज दण्डी स्वामी तीर्थ महाराज, बालकदास महाराज, हरिसंतोषानंद महाराज, अनुसूइयादास महाराज, सालिगदास महाराज, रामदास महाराज, बद्रीप्रसाद महाराज, योगेन्द्रदास महाराज, हरिसंतोषानंद महाराज, पन्डोखर सरकार आदि ने अपने-अपने आश्रमों में श्रद्धालुआंे को आर्षीवाद दिया.
कल 25 फरवरी की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां:
साजा के महेन्द्र चैहान की पण्डवानी, रायपुर के प्रशांत ठाकर का भजन गायन, पाटन के भरत भूषण परगनिहा का लोकमंच, इलाहाबाद के मनोज कुमार गुप्ता का भजन गायन, मनेन्द्रगढ के एस. हरमिन्दर सिंह का सुगम गायन, लखन यादव का राउत नृत्य, मोना सेन का लोकमंच, लाटाबोर के डोमार सिंह कुंवर का नाचा मुख्य आकर्षण होंगे.
—————























