Sunday, May 20, 2012

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जानकी जयंती पर दूसरा पर्व स्नान आज

’राजिम अर्धकुंभ महापर्व 2011‘:

पण्डवानी, भजन और और संतों की वाणी गूंजती रही,
देश की सांस्कृतिक एकता ने दिखाये मनमोहक रंग

रायपुर. धर्म, संस्कृति और समाज का संगम बन चुके ’राजिम अर्धकुंभ महापर्व 2011‘ का दूसरा स्नान पर्व कल 25 फरवरी को ब्रम्ह मुहुर्त में संपन्न होगा. श्री जानकी जयंती पर होने वाले इस पवित्र स्नान में दूरदराज से साधु-संत और लाखों श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है जिसकी तैयारियां पूर्ण हो चुकी हैं. पर्यटन व संस्कृति मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल ने आज सम्पूर्ण तैयारियों का जायजा लिया तथा स्नान-पर्व के लिये समुचित व्यवस्था करने के निर्देश अधिकारियों को दिये.

राजिम-अर्द्धकुंभ के पं. ब्रह्मदत्त शास्त्री ने जानकी जयंती का महत्व बताते हुए कहा कि यह मां जगदम्बा जानकी के प्राकट्य की पावन तिथि है. आज के दिन मिथिला नरेश राजा जनक के खेत में हल से भूमि के जोते जाने के समय उसके सीत से स्पर्ष करके जो देवी प्रकट हुईं उन्हंें सीता कहा गया और जनकदुलारी होने से ये मां जानकी के नाम से जानी जाती हैं। इनका विवाह भगवान श्रीराम से हुआ, अतः इस दिन को जानकी जयंती के नाम से मनाया जाता है.

पर्व स्नान की तैयारियां पूर्ण

दूसरी ओर जानकी जयंती के महत्व को देखते हुए राजिम-कुंभ आयोजन समिति द्वारा आज पवित्र पर्व स्नान की तैयारियों को अंतिम रूप दिया गया. स्नान के लिये बने विषेष कुण्ड में भरपूर पानी का भराव सुनिष्चित किया गया तथा घाटों से पानी छोडा गया. दूरदराज से आये साधु-संतों, नागा साधुओं भक्त मण्डलियों और आसपास के गांवों से अपने परिवार के साथ पहुंचे श्रद्धालुओं के निवास, प्रसाद और भोजन की व्यवस्था की गई है वहीं दूसरी ओर प्रमुख मंदिरों सहित हवन कुण्डों को भी सजाया गया. संत समागम में तैयार हुए साधु-संतों के आश्रमों पर पहुंचे उनके षिष्यों और श्रद्धालुओं के आवास और भोजन की विषेष व्यवस्था की गई है. संत बालकदास महाराज के आश्रम पर भी उनके षिष्यों और श्रद्धालुओं की खासी भीड देखी गई.

गौ माता की झांकी और प्रदर्शनी उदघाटित हुई

कुंभ-स्थल पर आज गौ माता पर केंद्रित चित्रमय झांकी और प्रदर्शनी का उदघाटन आज पीठाधीष्वर जगतगुरू शंकराचार्य निश्‍चलानंद सरस्वती के हाथों हुआ. उन्होंने कहा कि गौमाता की सेवा करने वालों की कमी होना चिंता का विषय है. ऐसी स्थिति में जनमानस की चेतना व भावना को जागृत करने के लिये ऐसी प्रदर्शनियां और झांकी बहुत सहायक सिद्ध होगीं. श्री कुलेश्‍वर महादेव मंदिर के सामने स्थित इस झांकी में गाय की महत्ता को प्रतिपादित किया गया है जिसका व्यवस्थापन मथुरा से पधारे संत श्री सुभाष जी महाराज देख रहे हैं. इस अवसर मुख्य रूप से गौसेवक झूमरलाल टावरी, रामजी लाल अग्रवाल, टीकमदास चांडक, पं. सुभाष तिवारी, श्रीमती रत्ना देवी, स्वामी आत्मानंद, ममता शुक्ला, अवधेष सिंग, विभा तिवारी, विभा दुबे सहित गौभक्त उपस्थित थे. प्रदर्शनी में अंतराष्ट्रीय कृषि गौ पर्यावरण संरक्षण परिषद का सहयोग भी मिल रहा है.

सांस्कृतिक एकता का मनमोहक दर्षन
त्रिवेणी संगम पर स्थित मुक्ताकाशी मंच पर प्रतिदिन होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुतियां अब उफान पर हैं. कल देर रात को छत्तीसगढ़ सहित महाराष्ट्र, उड़ीसा और मध्यप्रदेश के कलाकारों ने बेहतरीन प्रस्तुतियां देकर सांस्कृतिक एकता का खूबसूरत उदाहरण पेश किया. स्थानीय कलाकारों ने आज रंगमंच पर भिलाई की उषा बारले ने पंडवाणी, भिलाई के अष्विनी वर्मा का भजन, रायपुर के मनोज सेन का लोकमंच, नागपुर के जयप्रकाष षर्मा का भजन तथा रायपुर के दिलीप ताम्रकार की नृत्य नाटिका, लिटिया सेमरिया के अजय उमरे का नाचा तथा छत्तीसगढ के मषहूर ढोला मारू भिलाई की रजनी रजक ने मनमोहक प्रस्तुतियां देकर दर्शकों का खासा मनोरंजन किया. कल देर रात को छत्तीसगढ की अद्वितीय सांस्कृतिक हलचल पण्डवानी गायिका पद्मभूषण डाॅ. तीजन बाई ने कपालिक शैली में पण्डवानी पेश की. संगीत राग और अभिनय की त्रिवेणी तीजनबाई ने महाभारत के दुःशासन वध का दृष्य सामने रखते हुए बेहतरीन चित्रण किया. उनकी प्रस्तुति को देख-सुन दर्षक मंत्रमुगध होकर रह गये. तीजनबाई के अभिनय में साहस, करूणा, दया की भावाभिव्यक्ति दिखाई दी. अन्य प्रस्तुतियों में भिंभोरी के कलाकार अमृता साहू ने
पंडवानी गायन महाराष्ट्र के कलाकारों ने लावणी नृत्य, उड़ीसा के कलाकारों ने शेख नृत्य व सागर के कलाकारों ने राई नृत्य की प्रस्तुति देकर दर्षकों कों बांधे रखा. मनेन्द्रगढ़ के कलाकार एस. हरमिंदर सिंग ने चुनिंदा भजनों के माध्यम से वातावरण को भक्तिमय बनाया. सांस्कृतिक कार्यक्रम का संचालन सुरेष कुमार शर्मा व निरंजन साहू ने किया।

कुंभ क्षेत्र में गूंजी संतों की वाणी

राजिम-कंुंभ में पहुचे श्रद्धालुओं का विषाल मेले और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने खासा मनोरंजन किया तो दूसरी ओर मुख्य मंच में संतों की वाणी भी गूंजी. महामण्डलेष्वर ईष्वर दास और गाजियाबाद के महंत नारायणदास महाराज ने राजिम-कंुभ को देश में हिन्दु धर्म का प्रमुख केन्द्र बताया और छत्तीसगढ सरकार की तारीफ करते हुए कहा कि इस कुंभ की खासियत यह है कि साधु-संतों को पर्याप्त सम्मान मिलता है. त्रिवेणी संगम की रेत में बने विषाल डोम में पधारे दतिया स्थित श्री पंडोखरसरकार धाम के त्रिकाल प्रदर्षी संत श्री गुरूषरण जी महाराज ने कहा कि हमें संत की परीक्षा न लेकर उनका परिक्षण करना चाहिये. संतो से हमें प्रकाष मिलता है, हमारे अंदर छुपी अज्ञानता का वे समन करते हैं तथा इस अंधकार को मिटाकर ज्ञान रूपी पुंज प्रकाषित करते है. पांडोखर सरकार के दरबार में प्रातः 10ः30 बजे से कुपन (टोकन) वितरण किया जावेगा तथा दूर-दूर से आने वाले भक्तो के लिए भोग भंडारा, प्रसाद की व्यवस्था की गई है. इसी तरह संत प्रेमादास जी महाराज दण्डी स्वामी तीर्थ महाराज, बालकदास महाराज, हरिसंतोषानंद महाराज, अनुसूइयादास महाराज, सालिगदास महाराज, रामदास महाराज, बद्रीप्रसाद महाराज, योगेन्द्रदास महाराज, हरिसंतोषानंद महाराज, पन्डोखर सरकार आदि ने अपने-अपने आश्रमों में श्रद्धालुआंे को आर्षीवाद दिया.

कल 25 फरवरी की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां:

साजा के महेन्द्र चैहान की पण्डवानी, रायपुर के प्रशांत ठाकर का भजन गायन, पाटन के भरत भूषण परगनिहा का लोकमंच, इलाहाबाद के मनोज कुमार गुप्ता का भजन गायन, मनेन्द्रगढ के एस. हरमिन्दर सिंह का सुगम गायन, लखन यादव का राउत नृत्य, मोना सेन का लोकमंच, लाटाबोर के डोमार सिंह कुंवर का नाचा मुख्य आकर्षण होंगे.
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sant samagam संत समागम का शुभारंभsant samagam1 संत समागम का शुभारंभsant samagam2 संत समागम का शुभारंभ

‘राजिम अर्द्धकुंभ महोत्सव‘ के संत समागम केशुभारंभ पर संस्कृति, प्रकृति और धर्म पर हुआ चिंतन

प्रकृति और विकास के बीच संतुलन रखें: शंकराचार्य नि्श्‍चलानंद सरस्वती

रायपुर. गोवर्धन पीठाधीष्वर sant samagam3 292x300 संत समागम का शुभारंभजगतगुरू षंकराचार्य स्वामी निष्चलानंद सरस्वती ने विकास के नाम पर हो रहे प्राकृतिक विनाश पर चिंता जताते हुए कहा है कि प्रकृति और विकास के बीच हो रहा असंतुलन पूरे विश्व के लिये विनाशदायी साबित हो रहा है. श्री शंकराचार्य जी ‘राजिम अर्द्धकुंभ महोत्सव‘ पर आयोजित संत समागम में उपस्थित जनसमूह को संबोधित कर रहे थे.

महानदी, सोंढुर और पैरी नदियों के पवित्र संगम पर आयोजित राजिम कुंभ के छठवें दिन विशाल संत समागम को संबोधित करते हुए जगतगुरू षंकराचार्य स्वामी निष्चलानंद सरस्वती ने कहा कि मेघा्शक्ति, श्रमशक्ति, अर्थशक्ति व रक्षा शक्ति का दोहन हो रहा है जबकि सरकारों को चाहिए कि इनका बेहतर उपयोग कर समाज और देश का विकास करें. उन्होंने नदियों के प्रदूषण, पर्वतों के घटने, गौ-वंश के खत्म होते जाने पर चिंता जताई और दुःख जताया कि ऐसा वे लोग कर रहे हैं जो खुद हिन्दु हैं. श्री शंकराचार्य ेजी ने विश्व में कम और कमजोर होते हिन्दुओं की दशा, घटते हिन्दु-देशों पर चिंता और हिन्दुओं के धर्मांतरण पर चिंता प्रगट करते हुए आषंका जताई कि दूसरे देश नहीं चाहते कि सनातन धर्म का प्रतीक बना भारत देश मजबूत हो और दुनिया का मार्गदर्शक बने. स्वामी निष्चलानंद महाराज ने कहा कि प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर विकास करना पूरे ्विश्व के लिए लाभदायक हो गया है.

राजिम के विकास में काम आयेंगे संतों के सुझाव: डाॅ. रमनसिंह
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि दूसरी ओर मुख्यमंत्री डाॅ. रमनसिंह ने विष्वास दिलाया है कि राजिम नगरी की पवित्रता बनाये रखने के लिये संतों ने जो सुझाव व मर्गदर्शन दिया है  उस पर अमल किया जायेगा. श्री सिंह ने कहा कि नया छत्तीसगढ़ राज्य अब एक नई करवट बदल रहा है। प्रदेश की दो करोड़ से अधिक जनता विकास के एक द्शक को पार कर अब ग्यारहवे वर्ष में प्रवे्श कर चुकी है। इस दौरान राज्य शासन द्वारा विगत सात वर्षो में आम जनता के लिए शुरू की गई विभिन्न योजनाओं से पूरे देश में छत्तीसगढ़ की पहचान बनी है। गरीबों के लिए शुरू की गई अत्यंत किफायती चावल की योजना को अब केन्द्र सरकार पूरे देष में लागू करने जा रही है। डाॅ. सिंह ने कहा कि भगवान राजीव लोचन और संत महात्माओं के आशिर्वाद से छत्तीसगढ़ में सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली लाने के लिए आने वाले वर्षो में और भी अधिक बेहतर प्रयास राज्य सरकार द्वारा किये जाएंगे। राजिम कुंभ ने छत्तीसगढ़ को देश के सांस्कृतिक मानचित्र पर एक नई पहचान दिलायी है। उन्होनें कहा कि भगवान राजीव लोचन की कृपा और संत महात्माओं के आषीर्वाद और जनता के सहयोेग से राजिम कुंभ का यह छठवां आयोजन यहाॅ किया गया है मुख्यमंत्री ने कहा कि यह राजिम कुंभ का ही एक अच्छा और सुखद प्रभाव है कि इन छह वर्षो में छत्तीसगढ़ पर अकाल का कोई प्रभाव नहीं पड़ा, बल्कि देश का यह नया राज्य और भी अधिक तेजी से विकास के पथ पर आगे बढ़ता चला जा रहा है। पलायन की पीड़ा से छत्तीसगढ़ मुक्त हुआ है। सकल घरेलू उत्पाद की दृष्टि से राज्य की विकास दर 11.49 प्रतिशत रही जो देश में सबसे ज्यादा है। इसमें छत्तीसगढ़ ने गुजरात जैसे पुराने और विकसित राज्य को भी पीछे छोड़ दिया। डाॅ. सिंह ने संत समागम मे पधारे गोवर्धन मठ, पुरी के जगत्गुरू शंकराचार्य स्वामी निश्‍चलानंद सरस्वती सहित देष भर से आए संत महात्माओं का स्वागत करते हुए कहा कि इनके आगमन से छत्तीसगढ़ की धरती धन्य हुई है। मुख्यमंत्री ने राजिम कुंभ में श्रद्धालुओं  की सुविधा के लिए छह करोड़ रूपए की लागत से बनवाए गए एनीकट का उल्लेख करते हुए कहा कि इसमे छह फीट से भी ज्यादा पानी रहेेगा। आने वाले वर्षो में राजिम कुंभ को इसकी गरिमा के अनुरूप बेहतर से बेहतर सुविधाओं से सुसज्जित किया जाएगा।

जहां धर्मात्माओं का राज, वहीं परमेश्वर का वास: बृजमोहन अग्रवाल

पर्यटन, संस्कृति, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि कोई भी कुंभ साधु-संतांे के बिना सार्थक नहीं हो सकता. राजिम-कुंभ ने बहुत कम समय में देश और विदे्श में पहचान स्थापित की है. उन्होंने कहा कि परमात्मा वहंी राज करते हैं, जहां धर्मात्माओं का राज होता है इसलिए हमने साधु-संतों का सम्मान कर उनका आशिर्वाद हासिल किया. हमारे लिए सौभाग्य की बात है कि छत्तीसगढ़ के पावन तीर्थ स्थल राजिम में हर वर्ष लगने वाले राजिम कुंभ का यह छठा वर्ष है उन्होने कहा कि राजिम कुंभ के शिल्पी मुख्यमंत्री डाॅ. रमन सिंह के नेतृत्व में प्रदेष सरकार द्वारा कानून बनाकर राजिम कुंभ परम्परा की शुरूआत की गई जहां धर्मात्माओ का राज होता है वहां परमात्मा का वास होता है। उन्होने कहा कि साधु संतो के आशिर्वाद से हम छत्तीसगढ़ को एक ऐसा आदर्श राज्य बनायेगें जहां धर्म की रक्षा हो, सुख शांति हो और कोई भूखा न रहे। छत्तीसगढ़ धर्म धरा है। राजिम कुंभ के माध्यम से धर्मध्वजा पूरे विश्‍व में लहरायेगी।

इस अवसर पर कृषि मंत्री श्री चन्द्रशेखर साहू, खाद्य मंत्री श्री पुन्नू लाल मोहले, छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के अध्यक्ष श्री कृष्ण कुमार राय, छत्तीसगढ़ राज्य भण्डार गृह निगम के अध्यक्ष श्री अशोक बजाज, संसदीय सचिव भरत साय, राजिम विधायक श्री अमितेश शुक्ल, संत कवि और पूर्व सांसद श्री पवन दीवान, पूर्व मंत्री श्री अजय चंद्राकर सहित अनेक जनप्रतिनिधि और हजारों की संख्या में भक्तजन उपस्थित थे। कृषि मंत्री चंद्रशेखर साहू तथा खाद्य मंत्री पुन्नू लाल मोहले ने अपने संबोधन में कहा कि छत्तीसगढ़ विभिन्न धर्मो और संप्रदायांे का आस्था का केन्द्र है। इस पावन धरती पर कुंभ परम्परा की शुरूआत से छत्तीसगढ़ को नई पहचान मिलेंगी। राजिम विधायक श्री अमितेश शुक्ल ने भी कार्यक्रम मे अपने विचार व्यक्त किये। कार्यक्रम का संचालन अनुराधा दुबे ने किया और आभार प्रदर्शन  पर्यटन मण्डल के अध्यक्ष कृष्ण कुमार राय ने किया. इस अवसर पर संस्कृति और पर्यटन के सचिव सुब्रत साहू, कलेक्टर रोहित यादव, एसपी दीपांशु काबरा आदि उपस्थित थे.

DSC 0719A राजिम में लोकनिर्माण विभाग द्वारा  ६९ लाख रु.की लागत से नवनिर्मित विश्राम गृह भवन का लोकार्पण
DSC 0725 राजिम में लोकनिर्माण विभाग द्वारा  ६९ लाख रु.की लागत से नवनिर्मित विश्राम गृह भवन का लोकार्पण

DSC 9642 150x150 राजिम में लोकनिर्माण विभाग द्वारा  ६९ लाख रु.की लागत से नवनिर्मित विश्राम गृह भवन का लोकार्पणरायपुर २३ फरवरी २०११. मुख्यमंत्री रमन सिंह ने आज छत्तीसगढ़ की सुप्रिसिद्ध तीर्थनगरी राजिम में लोकनिर्माण विभाग द्वारा लगभग ६९ लाख रु.की लागत से नवनिर्मित विश्राम गृह भवन का लोकार्पण किया. पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की. मंत्री पुन्नुलाल मोहले और विधायक अमितेष शुक्ला विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित थे.नए विश्राम भवन में दो व्ही.आई.पी. सूट सहित  तीन कमरे, एक डायनिंग हाल और किचन, तथा स्टोर रूम बनाए गए है.

राजिम अर्द्ध कुंभ महापर्व

देश भर से पहुचने लगे साधू संत

ganga7 विराट संत समागम आज सेराजिम अर्द्ध कुंभ २०११ में विराट संत का शुभारंभ आज शाम ७ बजे छत्तीसगढ़ के प्रयाग राज राजिम के त्रिवेणी संगम पर स्थित मुख्यमंच पर जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती जी महाराज के पावन सानिध्य में होगा. कार्यक्रम के मुख्यअतिथि रमन सिंह मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ एवं अध्यक्षता रविन्द्र चौबे नेता प्रतिपक्ष करेंगे. २३ फरवरी से २ मार्च तक चलने वाले इस विराट संत समागम में शामिल होने देश भर से साधू संत राजिम पधारने लगे है. सांस्कृतिक कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण ख्याति प्राप्त भजन एवं गीत गायक मुंबई के रवि के. त्रिपाठी होंगे.

१८ फरवरी से प्रारंभ राजिम अर्द्ध कुंभ २०११ के संत समागम में देश भर से सैकड़ों की संख्या में साधू संत राजिम पहुच चुके है. महामंडलेश्वर प्रज्ञानंद जी महाराज, महामंडलेश्वर प्रेमानंद गिरी जी महाराज, महामंडलेश्वर रामेश्वर दास जी, महामंडलेश्वर ईश्वर दास जी महाराज, स्वामी स्वतंत्र नंद जी महाराज, स्वामी देवेंद्रानंद जी महाराज, स्वामी बालयोगी योगेश्वर जी, स्वामी दासशरण गिरी जी, स्वामी नारायण गिरी जी, महंत मोलागिरी जी, स्वामी ए. नंद जी, स्वामी सोमगिरी जी महाराज (बीकानेर राजस्थान), विष्णु चैतन्यजी महाराज, साध्वी रंजनादेवी जी (हरिद्वार), साध्वी दर्शन ज्योति जी, साध्वी बल्योगिनी श्री जय श्रीमाल (कर्नाटक) स्वामी पहलावान गिरी जी, स्वामी शोभागिरी जी महाराज सहित अन्य साधू संत प्रमुख रूप से उपस्थित रहेंगे.

आज के सांस्कृतिक कार्यक्रम

त्रिवेणी संगम के मुख्य मंच में आयोजित होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों में मुख्य आकर्षण ख्याति प्राप्त भजन एवं गीत गायक मुंबई के रवि के. त्रिपाठी, साथ ही अंचल की पंडवानी गायिका पद्मभूषण तीजन बाई, लोकमंच सुश्री रमादत्त जोशी, भजन गायक सुमन धनंजय होंगे.

पंडवानी, भजन एवं जगराता ने दर्शकों का दिल जीता

DSC 0712 विराट संत समागम आज से

राजिम अर्द्ध कुंभ महापर्व २०११ के पांचवा दिन पंडवानी, भजन, एवं जगराता के नाम रहा. कार्यक्रम की शुरुआत सुप्रसिद्ध सुआ नृत्य मकसूदन साहू से हुई, जिसका दर्शको ने भरपूर आनंद लिया.

मुक्ताकाशी मंच पर पंडवानी गायिका अनसुइया देवी ने कौरव पांडव के वृतांत व लाक्षा गृह सहित पांडवों द्वारा दानव वध की शानदार प्रस्तुति दी चेहरे की भाव भंगिमा से दर्शकों के बिच गायिका ने अपनी छाप छोड़ी. भजन गायक खुशिदास मानिकपुरी ने कबीर भजनों की श्रृंखला प्रस्तुत की. राजीव लोचन करले दर्शन…. के माध्यम से भगवान राजीव लोचन की महिमा का वर्णन किया प्रदुषण एवं नशे के खिलाफ उन्होंने नशा झन करो—-के माध्यम से नशा न करने की बात रखी जिसे लोगों ने काफी सराहा.

शासकीय उ. मा. कन्या शाळा राजिम के छात्राओं ने उड़िया नृत्य प्रस्तुत कर वाहवाही लुटी आदिवासी वेशभूषा एवं जंगली पहनावा देखकर लागा नहीं के ये स्थानीय कलाकार है. देर रात राकेश शर्मा रायगढ़ ने भजनों की शानदार प्रस्तुति दी श्रोता त्रिवेणी संगम के तट पर भजनों की गंगा में गोते लगाये.

मुख्य मंच के अन्य आकर्षण के रूप में महाराष्ट्र का लावणी नृत्य, सागर म.प्र. का राई नृत्य, अनसुइया देवी का लोकमंच के कलाकार, दूधमोंगरा के पीसी. लाल, धौंरा भांटा, राउत नाचा  ने भी उपस्थित दर्शकों की तालियाँ बटोरी.

DSC 0694 विराट संत समागम आज से

kumbh4day मुक्ताकाषी मंच पर स्थानीय कलाकार छाये रहे

संत समागम के लिए साधु पहुंचने लगे

kumbh4dayA 250x300 मुक्ताकाषी मंच पर स्थानीय कलाकार छाये रहेराजिम 21 फरवरी/ राजिम अर्धकुंभ के चौथे दिन मुख्य मंच पर स्थानीय कलाकार छाये रहे। अपनी शानदार प्रस्तुति से दर्षकों में अपनी छाप छोड़ गए। वही महाराष्ट्र, उड़ीसा एवं म.प्र. के कलाकारों ने अपनी-अपनी प्रस्तुति से दर्षकों का दिल जीता। संतसमागम स्थल पर देष भर से साधु-संतो के दल पहुंचने लगे हैैैै।
 

संतो की कुटिया तैयार

कुलेष्वर मंदिर के पास स्थित कल 23 फरवरी को होने वाले संत समागम के लिए भव्य तैयारिया की गई है। संतो के ठहरने के लिए 30 कुटियां एवं उनके प्रवचन हेतु दो भव्य पंडाल बनाए गए है। इसी तरह अठ्ठारह हजार फीट का भव्य भोजनषाला का निर्माण किया गया है, इस भोजनषाला में 2 से 3 हजार श्रध्दालुओं के लिए भोजन की व्यवस्था की गई है। संतो व आमजनों के लिए बनने वाले भोजन के लिए लगभग सौ कारीगर पहुंच चुके है।

संत पहुंचने लगे

 संत समागम में शामिल होने हरिद्वार से महामंडलेष्वर तपस्वी श्री लक्ष्मणदास महाराज एवं महंत माता रंजना देवी के नेतृत्व में लगभग पचास बैरागी साधुओं का दल आज राजिम पहुंचा। इसी तरह उ.प्र., राजस्थान, पंजाब, गुजरात, महाराष्ट्र, हिमाचंल, म.प्र. से भी साधु संतो का आना शुरू हो गया है। संत बाबा बालकदास आश्रम में आज ग्रामीण क्षेत्रों से आए ग्रामीणों ने यज्ञ में शामिल होकर हवनकर पूण्य के भागीदार बने। श्री चक्रमेरू पीठ के संत दण्डीस्वामी ने बताया कि कल 23 फरवरी से छत्तीसगढ़ में शांति समृध्दि हेतु एक भव्य यज्ञ का आयोजन किया जा रहा है, जो महाषिवरात्रि तक चलेगा।
 

स्थानीय कलाकार छाये रहे

मुक्ताकाषी मंच पर आज स्थानीय कलाकार छाये रहे। नटराज ग्रुप एवं जय शीतला kumbh4dayB 150x150 मुक्ताकाषी मंच पर स्थानीय कलाकार छाये रहेसमिति सुंदरकेरा द्वारा जसगीत एवं झांकी के माध्यम से मां दुर्गा के रूपों का वर्णन किया। इस जीवंत झांकी के माध्यम से उन्होने शक्ति के विभिन्न रूपों को प्रस्तुत किया। इसी तरह नटराज ग्रुप के कलाकारों ने लोगो को जगाने का काम किया। उठो जागों और अपने लक्ष्य व अपने अधिकारों के लिए संधर्ष करने का लोगो से आव्हान किया। बेरला की पंडवानी गायिका कंती गंधर्व भजन मेे पं. राजेष्वर प्रसाद तिवारी एवं कत्थक में अनुराधा दुबे ने शानदार प्रस्तुति दी। प्रदेष के बाहर से आए कलाकारों में महाराष्ट्र की पंडवानी, उड़ीसा का शंख नृत्य एवं म.प्र. का राई नृत्य के जरिए कलाकारों ने अपनी शानदार प्रस्तुति दी।

rajmkumbhdaythreeA राजिम कुंभ में उतरी साक्षात ‘देवियां‘  

राजिम-अर्द्धकुंभ का तीसरा दिन:

मौसम की बेरूखी भी नहीं रोक पाई श्रद्धालुओं को

सांस्कृतिक मंच पर महाराष्ट्र और उडीसा ने रंग बिखेरे

rajmkumbhdaythree 300x169 राजिम कुंभ में उतरी साक्षात ‘देवियां‘राजिम. मौसम की बेरूखी की परवाह किये बिना ‘राजिम-अर्धकुंभ‘ के तीसरे दिन क्षेत्रीय कलाकारों ने शानदार प्रस्तुतियां दीं. बडी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में महाराष्ट्र से आये कलाकारों द्वारा पेश लावणी नृत्य और उडीसा के कलाकारों द्वारा पेश शंख नृत्य ने दर्शकों की तालियां बटोरीं. दूसरी तरफ अन्नपूर्णा महायज्ञ की शुरूआत हुई जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया.

अंचलवासियों के श्रद्धा और आस्था की परीक्षा आज के दिन हुई जब पूरा राजिम हल्की बरसात ओर ठिठुरते मौसम की परवाह किये बिना कुंभ का नजारा देखने के लिये त्रिवेणी संगम में उमड पडा. रविवार छुटटी का दिन होने के कारण आसपास के गांवों के हजारों श्रद्धालु परिवार सहित राजिम-कुंभ पहुंचे तथा अपनी आस्था का प्रगटीकरण करते हुए कुंभ की महत्ता कम नहीं होने दी. भगवान राजीवलोचन, कुलेश्वर महादेव और मामा-भांचा मंदिरों में श्रद्धालुओं की कतार देखी गई. राजिम-कुंभ के संत समागम स्थल पर आज स्वामी बालकदास महाराज के आश्रम में अन्नपूर्णा महायज्ञ किया गया जिसमें श्रद्धालुओं ने हवन आदि में हिस्सा लिया तथा प्रसादी ग्रहण की.

नौ देवियों की जीवंत झांकी..

संत समागम स्थल पर आज से प्रारंभ हुई नौ देवियों की जीवंत झांकी आकर्षण औरrajmkumbhdaythreeB 300x169 राजिम कुंभ में उतरी साक्षात ‘देवियां‘ श्रद्धा का केन्द्र बनी. झांकी देखकर लगा ही नहीं कि नौ देवियों के रूप में विराजमान मूर्तियां असल में नन्हीं बालिकायें हैं. बेहद प्रशिक्षित, अनुशासित और ध्यान मग्न इन लडकियों को देखकर श्रद्धालु मोहित हो गये. वे जीवंत स्वरूप में नौ देवियों के दर्शन पाकर अभिभूत थे. प्रजापति ब्रम्हकुमारी की संचालिका ब्रम्हकुमारी पुष्पा बहन ने बताया कि आज से प्रारम्भ हुई द्वादश ज्योतिलिंग एवं नो देवियों की चैतन्य झांकियां शिवरात्रि तक आयोजित की गई है। उन्होने बताया कि मेडीटेशन का ही प्रभाव है कि संस्था की बहनें देवी मां का रूप धारण कर एकाग्रचित रहती हैं. यहां पर ध्यान एवं मेडीटेशन के जरिए शरीर को स्वस्थ रहने के बारे में बताया जाता है. तात्पर्य साफ हे कि यदि आप ध्यान करते हैं तो अपने चित्त को एकाग्र कर रख सकते हैं. यकीन नहीं आता तो एक बार कुंभ स्थल पर इस झांकी को अवश्य देखें.

मुक्ताकाशी मंच पर लावणी और शंख नृत्य

त्रिवेणी संगम के किनारे बने मुक्ताकाशी मच पर आज सांस्कृतिक कार्यक्रमों के तहत महाराष्ट्र से आये कलाकारों ने लावणी नृत्य प्रस्तुत किया. गुरू मौली प्रोडक्शन के लावणाी सम्राट प्रमोद कांदलकर एवं वैभव मुकाशी के नेतृत्व में पन्द्रह लोगों के ग्रुप ने खूबसूरत लावणी नृत्य प्रस्तुत किया जिसके तहत उन्होंने राधा-कृष्ण की लीला के माध्यम से उसके प्रेम-रस का उजागर किया. एकदम सधी हुई प्रशंसनीय प्रस्तुति देने वाले इस दल ने यूरोप, बैंकाक, सिंगापुर सहित देश के लगभग हर राजधानी में कार्यक्रम प्रस्तुत कर चुके हैं. कार्यक्रम की दूसरी प्रस्तुति उडीसा से आये कलाकारों ने दी जिन्होंने शंख नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों की तालियां बटोरीं. कॉमनवेल्थ गेम्स में प्रस्तुति दे चुके इस दल ने एक साथ दो शंख बजाकर कृष्ण भगवान के दशावतार रूप को नृत्य के माध्यम से उजागर किया. दल में राजेंद्र प्रसाद पात्रो व नन्हें साथी शामिल हुए. इन दो कार्यक्रमों के अलावा पदमश्री पूनाराम निषाद की पंडवाणी, भिलाई के के.के. पाटिल का भजन, राजेन्द्र रंगीला का लोकमंच व नाचा में आत्माराम विश्वकर्मा व बिलासपुर के अचंल शर्मा द्वारा जगराता की मनमोहक प्रस्तुति दी गई.

महंत नागा साधु आने लगे

रायपुर रेल्वे स्टेशन प्रभारी डॉ. पंचराम सोनी ने बताया कि अर्धकुंभ राजिम के लिए उ.प्र., राजस्थान, पंजाब, गुजरात, महाराष्ट्र, हिमाचल, म.प्र. से महंत एवं नागा साधु पहुंचने लगे है। आज महंत दत्त गिरी बरखंडी उ.प्र. महंत जगदीश गिरी गुजरात, महंत राजेश्वरानंद सरस्वती, म.प्र. नागा वरूण गिरी, कानपुर, बलराम गिरी, विवके, शिवगिरी हरियाणा आदि के नेतृत्व में लगभग सौ नागा साधुओं का दल रायपुर से राजिम के लिए रवाना हुआ। इसी तरह राजिम-कुंभ स्थित संत समागम पर भी हजार से ज्यादा साधु-संत पहुंच चुके हैं. उल्लेखनीय है कि 23 फरवरी से संत समागम प्रारंभ होगा जिसमें पूरे देश से साधु-संत शामिल होंगे.

अन्न्पूर्ण महायज्ञ प्रारंभ

संत समागम स्थल पर संत बाबा बालकदास के आश्रम में आज अन्नपूर्ण महायज्ञ का शुभारंभ हुआ. यज्ञ का प्रारंभ कलश यात्रा के साथ हुआ जो पूरे मेला स्थल का भ्रमण करते हुए यज्ञ स्थल पर पहुंची। यज्ञ की पूर्णाहुति आगामी 2 मार्च को होगी। श्री बालकदास ने बताया कि राजिम क्षेत्र के लोगों के बीच धर्म की अलख जगाने उन्हें अपने-अपने धर से एक-एक मुठ्ठी चांवल लाने कहा है जिससे वे पुण्य लाभ हासिल कर सकें. दूसरी ओर पावन कामधेनु तीर्थ मथुरा की गौमाता पर केन्द्रित चित्र प्रदर्शनी का शुभारंभ दिनांक 23 फरवरी बुधवार को संध्या 7 बजे पुरी पीठ के जगद्गुरू शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती के पावन करकमलों से होगा। उक्त अवसर पर समस्त गौसेंवकों से अधिकाधिक संख्या में अपनी उपस्थिति प्रदान करने की विनम्र अपील चित्र प्रदर्शनी के संचालक पं. सुभाष तिवारी ने की है। इस अवसर पर प्रसिध्द गौसेवक श्री झुमर लाल टावरी व रामजी लाल अग्रवाल विशेष रूप से उपस्थित रहेगें।

आज के आकर्षण:

भिलाई की ऋतु वर्मा का पंडवानी, रायपुर के मदन चौहान का भजन, भिलाई के किशन सोनी का लोकमंच, नटराज सोसायटी के सुश्री मनी राव का नृत्य, अनुराधा दुबे का कत्थक, ललित ठाकुर की लोक रामायण, करेली के गोवर्धन यादव का नाचा आदि सांस्कृतिक कार्यक्रम कल 21 फरवरी के मुख्य आकर्षण होंगे.

DSC08861 पण्डवानी व जसगीत के नाम रही ‘राजिम कुंभ‘ की दूसरी शाम

DSC08866 पण्डवानी व जसगीत के नाम रही ‘राजिम कुंभ‘ की दूसरी शामDSC08864 पण्डवानी व जसगीत के नाम रही ‘राजिम कुंभ‘ की दूसरी शाम

अर्द्ध महाकुंभ महोत्सव:
अन्नपूर्णा महायज्ञ की शुरूआत कल से होगी.
संत-समागम के लिये साधु-संतों का आगमन शुरू

रायपुर. छत्तीसगढ और मध्यभारत के ‘प्रयाग‘ के रूप में ख्यात हो चुके ‘राजिम अर्द्धकुंभ महोत्सव 2011’ के दूसरे दिन श्रद्धालुओं की भीड उमड पडी जिन्होंने मेले का लुत्फ उठाया और मंदिरों में जाकर पूजा अर्चना की. देर शाम को सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से खुद को तरोताजा किया. आज के कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राज्य गृह भंडारण निगम के अध्यक्ष श्री अशोक बजाज थे. वहीं अन्नपूर्णा महायज्ञ की शुरूआत कल से होगी.
श्रद्धालुओं ने दी आस्था की परीक्षा
धर्म, आस्था और संस्कृति की त्रिवेणी बन चुके राजिम-कुंभ में आज दूसरे दिन मौसम ने करवट बदली और ठण्ड की हल्की चादर ओढे रखी. देर दोपहरी तक श्रद्धालुओं को सूर्य भगवान के दर्शन तक नहीें हो पाये थे लेकिन जैसे ही सूर्य भगवान ने अपनी रौनक बिखेरी, श्रद्धालुओं के कदम राजिम-कुंभ की ओर चल पडे. दूरदराज से पहुंचे ग्रामीणों ने सपरिवार भगवान राजीवलोचन और  कुलेश्वर महादेव के दर्शन किये तथा प्रसाद हासिल किया. वहीं धीरे-धीरे जम रही विविध दुकानों में खरीद-बिक्री की तथा मेले, सर्कस और प्रदर्शनियों के माध्यम से मनोरंजन किया. श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बना.
कलात्मक प्रस्तुतियों ने मन मोहा
त्रिवेणी संगम के किनारे बने मुक्ताकाश मंच पर छत्तीसगढी लोकमंच ने दबदबा बनाये रखा. कार्यक्रम की शुरूआत कुरूद के गोवर्धन देवदास और कुमारी रेणु साहू ने पण्डवानी पेश किया तथा दर्शकों को बांधे रखा. पंडवाणाी में ही एक अन्य आकर्षण शांतिबाई चेलक रहीं. देश-विदेश में छत्तीसगढी संस्कृति का प्रचार का जरिया बनी इस साधिका ने अपनी टीम के साथ दमदार प्रस्तुतियां दी और महाभारत के कृष्ण-अर्जुन प्रसंग का मंत्रमुग्ध कर देने वाला अभिनय दिखाया. छत्तीसगढ में जस सम्राट के रूप में मशहूर रायगढ के दिलीप षडंगी ने भजन प्रस्तुत किये. इन्होंने देर रात तक समधुर भजनों का गायन किया तथा श्रोताओं की तालियां बटोरीं. कार्यक्रम का संचालन निरंजन साहू और सुरेश वर्मा ने किया.
दूसरी ओर, भिंभौरी के वरिष्ठ कलाकार एवं दाऊ मंडरा जी सम्मान से विभूषित श्री कोदूराम वर्मा द्वारा आकर्षक कर्मा नृत्य की प्रस्तुति दी गई. पंडवानी गायिका प्रतिमा बारले कबीरधाम ने कर्ण पर्व की कथा को जीवन्तता से प्रस्तुत किया. भिलाई के कलाकार सोनाली सेन ने भक्तिमयी प्रस्तुति देकर श्रोता समूह का दिल जीत लिया. शंकर जी की आरती के अलावा, ऊॅ नमः शिवाय, बाबा तेरी या सुखदाई , सूरज की गरमी से, हे राम जैसे भजनों के श्रृंखला ने देर रात्रि तक दर्शकों को बांधकर रखा. राजनांदगांव के कलाकार ’गोदना’ ने छत्तीसगढ़ों पारंपरिक गीतों की एक से खूबसूरत गीतों की झड़ी लगा दी. सांस्कृतिक कार्यक्रमों की अतिम कड़ी के रूप में बनसांकरा बगौड के कलाकारों नें पारंपरिक नाचा की प्रस्तुति देते हुए जम्मत भोरहा में धोखा के माध्यम से लोंगो का अच्छा मनोरंजन किया.
कल 20 फरवरी के खास आकर्षण:
पदमश्री पूनाराम निषाद का पंडवानी, भिलाई के के.के. पाटिल का भजन गायन, बेलगहना के नरेन्द्र यादव का लोकमंच, दुर्ग के सरोज कोसरे का बालिका पंथी नृत्य, रायपुर के राजेंद्र रंगीला छईयां का लोकमंच, बिलासपुर के अचल शर्मा का जगराता तथा कमही के आत्माराम विश्वकर्मा का नाचा कार्यक्रम होंगा. प्रतिवर्ष की भाति इस वर्ष भी चम्पारण्य में तीन द्विवसीय बहुरंगी महोत्सव का आयोजन धर्मस्व, पर्यटन एवं संस्कृति विभाग छत्तीसगढ़ शासन द्वारा किया जा रहा है। 20 तारीख को जहाॅ दर्शकगण प्रसिद्ध भरथरी गायिका श्रीमती सुरूख बाई खांडे द्वारा भरथरी सहित नाटक, लोकगीत, नृत्य, चंदैनी लोकगीत आदि का आनंद उठाऐगें, वही 21 और 22 को रंगसरोवर गरियाबंद सहित सुगम गायन तथा कत्थक की प्रस्तुति होगी।
पहुंचने लगे साधु-सत
आगामी 23 फरवरी से होने वाले संत-समागम के लिये साधु-संतों का आगमन शुरू हो गया. नतीजन अब तक पांच सौ से अधिक संत और नागा साधुओं की उपस्थिति दिखने लगी है जिनके दर्शन और आर्शीवाद के लिये आश्रम में श्रद्धालुओं की भीड उमडने लगी है. प्रसिद्ध संत प्रेमादास महाराज भी अपने शिष्यों के साथ राजिम-कुंभ में हिस्सा लेने पहुंचे. दूसरी ओर आज शाम को गंगा आरती का कार्यक्रम भी हुआ जिसमें श्रीमती अंजना महाड़िक अध्यक्ष नगर पंचायत राजिम सहित पं. अर्जुन प्रसाद शास्त्री, पं. ब्रम्हदत्त शास्त्री, श्री कन्हैया तिवारी, दिनेश तिवारी, संतोष शर्मा, प्रदीप दुबे, गोविन्द दुबे, ऋषि दुबे, व अन्य गण्यमान्य अतिथि शामिल हुए.
अन्नपूर्णा महायज्ञ कल से
प्रसिद्ध संत बालकदास ने बताया कि कल 20 फरवरी से महाशिवरात्रि तक संत-समागम स्थल पर अन्नपूर्णा महायज्ञ प्रारंभ किया जायेगा. इस यज्ञ को सफल बनाने पांच सौ ग्रामीण महिलाओं द्वारा कलश यात्रा निकाली जायेगी जो श्री कुलेश्वरनाथ महादेव मंदिर से श्री राजीवलोचन मंदिर पहुंचेगी. संत बालकदास जी ने बताया कि आगामी 24 फरवरी को एक विशेष कार्यक्रम आयोजित होगा जिसमें सभी यज्ञों के दर्शनार्थियों को महाप्रसाद का वितरण किया जायेगा. संतजी ने अपील की है कि इस पुण्य कार्यक्रम में एक-एक मुटठी चावल दान करें और पुण्य लाभ कमायें. 
एक माह का कल्पवास पूर्ण
राजिम-कुंभ से एक माह पूर्व लोमस ऋषि आश्रम में प्रांरभ होने वाला कल्पवास पूर्ण हो चुका है. इसके समापन के मुख्य अतिथि स्वामी कृष्णारंजन थे जबकि अध्यक्षता सांसद चंदूलाल साहू ने की. श्री रंजन ने इस प्रतिनिधि को बताया कि कल्पवास का आयोजन काफी शुभ माना जाता है. आसपास के सौ से ज्यादा भक्तों ने इस कल्पवास में रहकर लाभ उठाया तथा धार्मिक अनुष्ठान का हिस्सा बने. इस अवसर पर पण्डितों को भी कर्मकाण्ड का प्रशिक्षण दिया गया.

rajim kumbh1 भगवान राजीवलोचन की पूजा अर्चना और श्लोक वाचन के साथ ‘राजिम अर्द्ध कुंभ महोत्सव 2011‘ की शुरूआतrajim kumbh भगवान राजीवलोचन की पूजा अर्चना और श्लोक वाचन के साथ ‘राजिम अर्द्ध कुंभ महोत्सव 2011‘ की शुरूआत

‘राजिम-कुंभ अत्यंत पुण्यदायी‘

‘राजिम अर्द्ध कुंभ महोत्सव 2011‘ के शुभारंभ अवसर पर जगदगुरू कांचीकामकोटि पीठ के महाराज श्री जयेन्द्र सरस्वती का आर्शीवचन.

शाही स्नान, संत समागम और सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे मुख्य आकर्षण.

राजिम. जगदगुरू कांचीकामकोटि पीठ के महाराज श्री जयेन्द्र सरस्वती के आर्शीवाद के साथ ‘राजिम अर्द्ध कुंभ महोत्सव 2011‘ की गरिमामय शुरूआत हुई. आज माघ पूर्णिमा के दिन धार्मिक आस्था और विश्वास के साथ गरिमामय शुरूआत हुई. अपने आर्शीवचन में श्री जयेन्द्र सरस्वती ने कहा कि माघ पूर्णिमा से महाशिवरात्रि का समय अत्यंत पुण्यदायी होता है. इस दौरान स्नान करने से तन-मन की शुद्धि और सभी पापों का नाश होता है. उन्होंने राजिम-कुंभ की सफलता हेतु अपना आर्शीवाद दिया.

पन्द्रह दिनों तक चलने वाले ‘राजिम अर्द्ध कुंभ महोत्सव 2011‘ की शुरूआत भगवान राजीवलोचन की पूजा-अर्चना और श्लोक वाचन के साथ हुई तत्पश्चात समारोह के मुख्य अतिथि छत्तीसगढ के विधानसभा अध्यक्ष श्री धरमलाल कौशिक और अध्यक्षता कर रहे पर्यटन व संस्कृति मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल व विशेष अतिथि कृषि मंत्री श्री चंद्रशेखर साहू ने जगदगुरू कांचीकामकोटि पीठ के महाराज श्री जयेन्द्र सरस्वती का स्वागत करके महोत्सव की सफलता का आर्शीवाद लिया. श्री अग्रवाल ने विधानसभा अध्यक्ष श्री कौशिक का स्वागत किया तत्पश्चात श्री कौशिक ने कहा कि छत्तीसगढ की धरती पर भगवान राजीवलोचन की कृपा हमेशा बनी रही है. उनके आर्शीवाद से छत्तीसगढ खुशहाली के रास्ते पर जा रहा है. उन्होंने कहा कि देश में होने वाले चार कुंभों के अलावा राजिम-कुभ की ख्याति भी देश-दुनिया मेें फैली है. महानदी पूरे छत्तीसगढ की जीवनदायिनी है. इस नदी के तट पर अनेक पवित्र तीर्थस्थल हैं जिनका पौराणिक और ऐतिहासक महत्व है और राजिम-कुंभ मध्यभारत का प्रयाग बन चुका है.

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि देशवासियों को कुंभ के लिये 12 साल इंतजार करना पडता था लेकिन छत्तीसगढ सरकार ने प्रतिवर्ष होने वाले राजिम कुंभ की शुरूआत की जो धर्म, कला और संस्कृति की त्रिवेणी बन चुका है. श्री अग्रवाल ने राजिम की संस्कृति का बखान करते हुए कहा कि साधु संतो ंके आर्शीवाद से राजिम-कुंभ दिनांेदिन प्रसिद्धि पा रहा है. कृषि मंत्री श्री चंद्रशेखर साहू ने कहा कि छत्तीसगढ विनम्र धरती है और राजिम उसकी प्रणम्य धरती है. इस धरती पर कुंभ की शुरूआत होना छत्तीसगढ वासियों के लिये सौभागय की बात है. छत्तीसगढ के संत और कवि श्री पवन दीवान ने कहा कि ज्ञान, भक्ति और वैरागय का प्रतीक बन चुके राजिम-कुंभ में देश की एकता और भारतीयता के दर्शन होते हैं. शासन से ज्यादा धर्म मानव समाज को अनुशासित रखता है और साधु-संतो ंके प्रवचन उस अमृत के समान है जिससे मानव जीवन सफल होता है.

लोकसभा सांसद श्री चंदूलाल साहू ने राजिम-कुंभ के आयोजन पर प्रसन्नता जाहिर की और इसे देश विदेश में छत्तीसगढ की पहचान बताया. क्षेत्रीय विधायक और कांग्रेस के नेता श्री अमितेष शुक्ल ने प्रसन्नता जाहिर की कि राजिम मेला अब कुंभ के रूप में ख्याति प्राप्त कर चुका है. उन्होंने गौ माता के महत्व को रेखांकित करने के लिये कोई आयोजन होना चाहिए. साथ ही राजिम के पूरे इलाके में शराबबंदी होना चाहिये. विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित आंध्र प्रदेश के सहकारिता मंत्री श्री कासु के. कृष्णा रेडडी, विधायक लेखराम साहू, पर्यटन विकास निगम के अध्यक्ष कृष्णा राय, राज्य भंडार गृह निगम के अध्यक्ष अशोक बजाज उपस्थित थे. समारोह में चार धार्मिक पुस्तकों का विमोचन भी हुआ पुस्तकों के लेखक दण्डी स्वामी सच्चिदानंद, पण्डोखर महाराज, साप्ताहिक समाचारपत्र द्वारा लिखित प्रयाग भूमि व धार्मिक आडियो कैसेट ओ कान्हा रे..का विमोचन किया गया.

उदबोधन के पूर्व समारोह में उपस्थित संत दण्डी स्वामी तीर्थ महाराज, बालकदास महाराज, हरिसंतोषानंद महाराज, अनुसूइयादास महाराज, सालिगदास महाराज, रामदास महाराज, बद्रीप्रसाद महाराज, योगेन्द्रदास महाराज, हरिसंतोषानंद महाराज, पन्डोखर सरकार और संत पवन दीवान का स्वागत अतिथियों ने किया जबकि विशेष अतिथियों का स्वागत कलेक्टर रोहित यादव, रमेश शर्मा व पर्यटन व संस्कृति सचिव सुब्रत साहू सहित रेखा सोनकर, संतोष उपाध्याय, अंजना महाडिक, जीतेन््रद सोनकर, राघोबा महाडिक, अन्नपूर्णा साहू, अवधेश ठाकुर, रेखा महोबिया, विजय गोयल आदि ने किया. समारोह के अंत में रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुतियां दी गईं. आगामी 02 मार्च तक चलने वाले इस महोत्सव की खासियत शाही स्नान, संत समागम और सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे.

धर्म, संस्कृति और आस्था की त्रिवेणी में संतों का आर्शीवचन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां होंगी आकर्षण का केंद्र

रायपुर. धर्म, संस्कृति और आस्था की त्रिवेणी बन चुके ‘राजिम अर्द्धकुंभ महापर्व‘ की शुरूआत कल 18 फरवरी को राजिम के त्रिवेणी तट पर सायं सात बजे होगी. जगतगुरू रामानंदाचार्य श्री हंसदेवाचार्य जी महाराज जगन्नाथ धामए हरिद्वार एवं कांची काम कोठी पीठाधीपति जगदगुरू जयेन्द्रए सरस्वती महाराज के पावन सानिध्य में आयोजित इस समारोह के मुख्य अतिथि विधानसभा अध्यक्ष श्री धरमलाल कौशिक होंगे। पर्यटनए संस्कृति तथा धार्मिक न्यास एवं धर्मस्य मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल शुभारंभ समारोह की अध्यक्षता करेंगे।  आगामी 02 मार्च तक चलने वाले पन्द्रह दिवसीय महोत्सव में देशभर से आये साधु-संतों की उपस्थिति और विभिन्न प्रदेशों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आकर्षण का कें्रद होंगी.
विशेष अतिथि के रूप में कृषि मंत्री श्री चन्द्रशेखर साहूए लोकसभा सांसद श्री चन्दूलाल साहूए छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के अध्यक्ष श्री कृष्णकुमार रायए पूर्व सांसद श्री पवन दीवानए राजिम विधायक श्री अमितेष शुक्ला और कुरूद विघायक श्री लेखराम साहू समारोह में उपस्थित रहेंगे। जिला पंचायत रायपुर की अध्यक्ष श्रीमती लक्ष्मी वर्माए पूर्व शिक्षा मंत्री श्री अजय चन्द्राकरए पूर्व जिला पंचायत सदस्य श्री संतोष उपाध्यायए नगर पालिका गोबरा नवापारा की अध्यक्ष श्रीमती देहुती साहूए नगर पंचायत राजिम की अध्यक्ष श्रीमती अंजना महाड़िकए जनपद पंचायत फिंगेश्वर की अध्यक्ष श्रीमती अन्नपूर्णा साहूए श्री गिरिजा साहूए सदस्य जनपद पंचायत अभनपुरए श्री माधव सिह ध्रुवए सदस्य जनपद पंचायत मगरलोड तथा साधु.संतों की गरिमामय उपस्थिति भी समारोह में रहेगी।
छत्तीसगढ़ के प्रयागराज के रूप में प्रसिध्द तीर्थ नगरी राजिम मे प्रतिवर्ष होने वाला राजिम-कुंभ मेले को दस वर्ष पूरे हो चुके हैं इसलिए इसे अर्द्धकुंभ के रूप में भी मनाया जा रहा है. माघ पूर्णिमा से प्रांरभ होने वाले इस धार्मिक और सांस्कृतिक महोत्सव का प्रमुख आकर्षण शाही स्नान होगा. पवित्र नदियों सोंढूर, पैरी और चित्रोत्पला के पावन तट पर 18 फरवरी को माघ पूर्णिमा, 25 फरवरी को श्री जानकी जयंती, 28 फरवरी को विजया एकादशी और 02 मार्च को महाशिवरात्रि का शाही स्नान विशेष महत्व लिये होगा. वहीं श्री राजीव लोचन मंदिर, प्राचीन देवालयों के दर्शन, साधु-संत और शंकराचार्यों का उद्बोधन और आशीवाद प्राप्त करने का सुअवसर भी हासिल होगा. मुक्ताकाशी मंच पर विभिन्न प्रदेशों के सांस्कृतिक दलों द्वारा दी जाने वाली आकर्षक प्रस्तुतियां, लोक संस्कृति और छत्तीसगढी संस्कृति के दर्शन का लाभ भी प्राप्त होगा.

दूसरी ओर, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल देर रात तक अधिकारियों से राजिम-कुंभ की तैयारियों का जायजा लेते रहे. शाही स्नान से लेकर संतों के आवास, भोजन, पेयजल, अतिथि व्यवस्था, मंच व्यवस्था, सुरक्षा व्यवस्था, श्रद्धालुओं के स्थल-मंदिर आदि की सुरक्षा को लेकर उन्होंने विशेष निर्देश दिये. श्री अग्रवाल ने उम्मीद और विश्वास जताया कि इस बार का राजिम-कुंभ ज्यादा सफल और कीर्तिदायी होगा. 

आज के सांस्कृतिक आकर्षण:

श्लोक वाचन: ब्रहमचर्य आश्रम के आचार्यों द्वारा
कत्थक: सुश्री शर्मिष्ठा मुखर्जी, दिल्ली
भजन-गीत: कुमार शानू, मुम्बई
पंडवानी: प्रतिमा बारले, कबीरधाम.
इसके अलावा छत्तीसगढ के ख्याति प्राप्त कलाकार मोहक प्रस्तुतियां देंगे.

रायपुर, 22 जनवरी 2011

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल की अध्यक्षता में सोमवार 24 जनवरी को अपरान्ह तीन बजे राजिम में राजिम कुंभ मेला 2011 की तैयारियों के संबंध में बैठक आयोजित की गयी है। इस बैठक में स्थानीय जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक और मेले की विभिन्न व्यवस्थाओं से जुड़े शासकीय विभागों के अधिकारी उपस्थित रहेंगे।

राजिम कुंभ मेला अधिकारी और मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी नियुक्त

राजिम कुंभ मेला 2011 के लिए मेला अधिकारी और मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी की नियुक्त कर दी है। राजिम कुंभ अधिनियम 2006 के तहत प्रदेश सरकार के धार्मिक न्यास और धर्मस्व विभाग ने यहां मंत्रालय से इस महीने की 11 तारीख को इसकी अधिसूचना जारी कर दी है। रायपुर के अपर कलेक्टर श्री रमेश शर्मा को मुख्य मेला अधिकारी और रायपुर जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. गजेन्द्र कुमार सक्सेना को मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी नियुक्त किया गया है। एक पखवाडे क़ा राजिम कुंभ माघ पूर्णिमा पर आगामी 18 फरवरी से शुरू होकर दो मार्च महाशिवरात्रि तक चलेगा।

राजिम कुंभ मेले के लिए स्थानीय समिति भी गठित

राज्य शासन द्वारा राजिम कुंभ मेला 2011 के लिए स्थानीय समिति भी गठित की गयी है। इस समिति का गठन छत्तीसगढ़ राजिम कुंभ मेला अधिनियम 2006 के तहत किया गया है। धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग द्वारा यहां मंत्रालय से स्थानीय समिति के गठन के संबंध में अधिसूचना जारी कर दी गयी है। छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के प्रबंध संचालक श्री तपेश झा इस समिति के अध्यक्ष होंगे। पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी श्री गिरीश बिस्सा समिति के सदस्य सचिव बनाए गए हैं। आयुक्त संस्कृति एवं पुरातत्व श्री राजीव श्रीवास्तव,विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी धर्मस्व विभाग श्री तपेश चन्द्र गुप्ता,उपसंचालक संस्कृति एवं पुरातत्व श्री एस.बी.सतपाल,लेखाधिकारी छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल श्री रंग पाठक, संस्कृति विभाग के श्री प्रताप पारख, श्री राकेश तिवारी और पर्यटन अधिकारी श्री आशीष वर्मा को स्थानीय समिति का सदस्य बनाया गया है।

मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में केन्द्रीय समिति गठित

संस्कृति मंत्री कार्यकारी अध्यक्ष

कृषि मंत्री उपाध्यक्ष

राज्य शासन द्वारा राजिम कुंभ मेला 2011 के लिए केन्द्रीय समिति गठित कर दी गई है। समिति का गठन राजिम कुंभ मेला अधिनियम 2006 के तहत किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह केन्द्रीय समिति के अध्यक्ष होंगे। धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग द्वारा यहां मंत्रालय से केन्द्रीय समिति गठित करने की अधिसूचना जारी कर दी गयी है।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल केन्द्रीय समिति के कार्यकारी अध्यक्ष एवं कृषि मंत्री श्री चन्द्रशेखर साहू उपाध्यक्ष बनाए गए हैं। मुख्य सचिव छत्तीसगढ़ शासन विशिष्ट सदस्य एवं सचिव पर्यटन एवं संस्कृति विभाग विशिष्ट सदस्य सचिव रहेंगे। समिति के विशिष्ट सदस्यों ने सचिव धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग, संयुक्त सचिव पर्यटन मंत्रालय भारत सरकार, आयुक्त संस्कृति एवं पुरातत्व, प्रबंध संचालक छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल, अग्नि पीठाधीश्वर आचार्य महामण्डलेश्वर ब्रम्हऋषि रामकृष्णानंद जी, अमरकंटक, संतश्री  डॉ. प्रणव पण्डया प्रमुख गायत्री पीठ, हरिद्वार, संत श्री रमेश भाई ओझा, कथावाचक पोरबंदर गुजरात, आचार्य महामण्डलेश्वर श्री संविदानंद सरस्वती नासिक, आचार्य महाण्डलेश्वर श्री जगदीश मुनी महाराज हरिद्वार, महामण्डलेश्वर श्री वियोगांनद सरस्वती महाराज ऋषिकेश गंगोत्री, महामण्डलेश्वर श्री विश्वेश्वरानंद गिरी महाराज वेस्ट मुम्बई, महामण्डलेश्वर अनंत श्री विभूषित कल्याण बाबा, अमरकंटक, योगीराज ब्रम्हर्षि बर्फानी दादाजी महामण्डलेश्वर लक्ष्मण दास बालयोगी बर्फानी सिध्द योग आश्रम त्रिवेणी संगम अमरकंटक, महामण्डलेश्वर स्वामी श्री प्रेमानंद गिरी महाराज, घाटकोपर मुम्बई, पीठाधीश्वर श्री द्वारकेश महाराज महाप्रभु वल्लभाचार्य प्राकटय बैठक चम्पारण्य, महामण्डलेश्वर स्वामी प्रज्ञानंदजी महाराज, सांई प्रज्ञाधाम साकेत नई दिल्ली, महंत श्री जागेराम शास्त्री हरिद्वार, महंत रामजी दास, संतोषी अखाड़ा पंच रामानंद चित्रकूट धाम, महंत ओंकार दास अखिल भारतीय श्रीपंच निर्मोही अनी अखाड़ा चित्रकूट, महंत रामसुंदर दास, श्रीराम महल मंदिर रामानंदाचार्य मार्ग विरमगांव अहमदाबाद, श्री बालयोगेश्वर श्री राम बालकदास महात्यागी डोंडी लोहारा, संत श्री पं. विजय शंकर मेहता, प्रवचनकर्ता उज्जैन, संत श्री गोवर्धन शरण दास  महाराज सिरकट्टी आश्रम पाण्डुका, संत कवि श्री पवन दीवान राजिम, महंत स्वामी अनुसुईयादास महाराज, श्री उदासीन परामार्थ आश्रम कपिलधारा रोड, तीर्थ अमरंकटक, संत श्री विजेन्द्र दास साहेब कबीर मंदिर गोबरा नवापारा, संत श्री असंग साहेब कबीरपंथी, इलाहाबाद, श्री श्री स्वामी सच्चिदानंद महाराज बिलासपुर, राज महंत श्री रामसुंदर दास महाराज, विधायक एवं अध्यक्ष श्रीराजीव लोचन ट्रस्ट कमेटी राजिम, संत श्री युधिष्ठिर लाल महाराज, शद्दाणी दरबार, माना रोड रायपुर, अध्यक्ष राजिम भक्तिन समिति राजिम, श्री अवधेश सिंह ठाकुर पुजारी श्री राजीव लोचन मंदिर राजिम, महंत हरकेवल दास अम्बिकापुर, पं. राजेन्द्र प्रसाद शास्त्री पुराणेतिहासाचार्य ज्योतेश्वर परमहंसी गंगा आश्रम गोटेगांव जिला नरसिंहपुर मध्यप्रदेश, ब्रम्हचारी सुरेशानंद शंकराचार्य आश्रम बोरियाकला रायपुर, पं. श्री झम्मन शास्त्री महाराज भाटापारा, स्वामी सिध्देश्वरानंद महाराज कुलेश्वर मंदिर राजिम, श्रीमती  लक्ष्मी वर्मा अध्यक्ष जिला पंचायत रायपुर, श्री चंदूलाल साहू सांसद सदस्य, श्री अमितेष शुक्ला विधायक राजिम, श्री लेखराम साहू विधायक कुरूद, श्री धनेन्द्र  साहू पूर्व मंत्री छ.ग. शासन, अभनपुर, श्री अजय चंद्राकर पूर्व मंत्री छ.ग. शासन, श्री अशोक बजाज अध्यक्ष वेयर हाऊसिंग  कारपोरेशन, डॉ. सलीम राज, अध्यक्ष हज कमेटी छत्तीसगढ़, श्री मोहन एंन्टी अध्यक्ष छ.ग. भवन एवं संनिर्माण कर्मकार कल्याण मंडल, अध्यक्ष नगर पालिका परिषद गोबरा नवापारा, अध्यक्ष नगर पंचायत राजिम, अध्यक्ष जनपद पंचायत फिंगेश्वर, अध्यक्ष जनपद पंचायत मगरलोड़, अध्यक्ष जनपद पंचायत अभनपुर, श्री अरूण कुमार शर्मा पुरातत्वविद् सिरपुर, श्री भागवत हरित फिंगेश्वर, श्री विष्णु सिंह ठाकुर रायपुर, डॉ. रामकुमार साहू राजिम, श्री कृष्ण दास अड़िया चम्पारण्य ट्रस्टी, श्री दीपक शर्मा, अध्यक्ष इतिहास संकलन समिति, श्री बबन प्रसाद मिश्र, अध्यक्ष बख्शी सृजनपीठ, श्री प्रभुलाल मिश्र, वरिष्ठ पुरातत्वविद्, श्री बसंत दुबे बुड़ेनी राजिम, श्री संतोष उपाध्याय राजिम, श्री विजय गोयल गोबरा नवापारा, श्रीमती रेखा सोनकर राजिम, श्री रामेश पहाड़िया नवापारा, श्री श्याम किशोर शर्मा नवापारा शामिल हैं।
इसी प्रकार श्री ईश्वर ध्रुव अभनपुर श्री हिरदा राम साहू बेलर अभनपुर, श्री सुधीर दुबे रायपुर, श्री विशाल राही श्री राजीव लोचन मंदिर के पास राजिम, श्री पूर्णानंद सोनी, राजिम, श्रीमती साधना सौरज गोबरा नवापारा, पंडित ब्रम्हदत्त शर्मा ‘शास्त्री’ सचिव श्रीराजीव लोचन कुंभ सेवा समिति, पं. योगेश्वर उपाध्याय संस्कृत विद्यापीठ राजिम, श्री अशोक गांधी नवापारा, श्री जितेन्द्र सोनकर राजिम, श्री देवराज सांखला नवापारा, श्री गिरधारी अग्रवाल नवापारा, श्री भागचंद बंगानी, नवापारा, श्री होरी लाल साहू, नवापारा, श्री राघोबा महाड़िक राजिम, श्री लेखा राम महोबिया राजिम, श्री मो. बिलाल अहमद नवापारा, श्री भुवनेश्वर साहू बलरामपुर फिंगेश्वर, सुश्री रेखा बंजारी अध्यक्ष महिला मोर्चा, श्री राजू सुंदरानी नवापारा, श्री मनीष चौधरी वापारा, श्री व्यास नारायण साहू हसदा, श्री बबला दम्मानी नवापारा, श्रीमती रूखमणी साहू नवापारा, श्री दयालू राम गांड़ा नवापारा, श्री पारसमल गोलछा नवापारा, श्री चंदू कंसारी नवापारा, श्री प्रसन्न शर्मा नवापारा, डॉ. फूलजी साहू नवापारा, श्रीमती सीमा तिवारी आनंद वाहिनी भिलाई, श्री शत्रुघन साहू राकाडीह, श्री भीखम सेन मगरलोड, श्री आईपी मिश्रा नेहरू नगर भिलाई शंकराचार्य कालेज, श्री आकाश विग रायपुर, श्री श्याम अग्रवाल राजिम, श्री सुरेन्द्र सिंह प्रांत प्रमुख धर्म जागरण विभाग छत्तीसगढ़, श्री शिवलाल कार्यालय प्रमुख जागृति मंडल रायपुर, श्री अशोक गंगवाल गोबरा नवापारा, श्री युधिष्ठिर चंद्राकर अध्यक्ष श्री राजीव लोचन कुंभ सेवा समिति, श्रीमती धनवंती साहू नवापारा, सहायक परिवहन आयुक्त, रायपुर, कलेक्टर रायपुर, धमतरी, महासमुंद, पुलिस अधीक्षक रायपुर, धमतरी, महासमुंद, श्री महादेव कावरे एनआरडीए रायपुर, श्री रमेश शर्मा अपर कलेक्टर रायपुर, खाद्य नियंत्रक रायपुर, अनुविभागीय दण्डाधिकारी रायपुर, धमतरी, गरियाबंद, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी रायपुर, धमतरी, मुख्य कार्यपालन अधिकारी नगर पालिका परिषद गोबरा-नवापारा नगर पंचायत राजिम , मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत फिंगेश्वर, मगरलोड, कार्यपालन यंत्री लोक निर्माण विभाग संभाग-3 रायपुर, धमतरी, गरियाबंद, कार्यपालन यंत्री जल संसाधन विभाग रायपुर, गरियाबंद, कार्यपालन यंत्री ग्रामीण यांत्रिकी विभाग राजिम, कार्यपालन यंत्री लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी रायपुर, संभागीय अभियंता विद्युत मंडल राजिम-धमतरी, वन संरक्षक वनवृत्त रायपुर, वनमंडलाधिकारी र्इ्रस्ट रायपुर, धमतरी, अनुविभागीय अधिकारी वन विभाग राजिम, धमतरी, श्री तपेश गुप्ता विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी धर्मस्व विभाग और श्री गिरीश बिस्सा विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी संस्कृति एवं पर्यटन विभाग को समिति का सदस्य बनाया गया है।

राजिम अर्ध कुंभ मेला अवधि घोषित

राज्य शासन द्वारा छत्तीसगढ़ राजिम कुंभ मेला अधिनियम 2006 के तहत 14 जनवरी 2011 से 15 मार्च 2011 तक की अवधि को वर्ष 2011 के लिए राजिम अर्ध कुंभ मेला अवधि अधिसूचित की गई है। धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग द्वारा यहां मंत्रालय से इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी गई है।

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