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रायपुर/09/09/2017/ रबी समूह के दो दिवसीय राष्ट्रीय वार्षिक बैठक के समापन समारोह को संबोधित करते हुए छत्तीसगढ़ प्रदेश के कृषि एवं सिंचाई मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि एक दौर था जब छत्तीसगढ़ में दलहन की खेती बहुत अच्छी होती थी। परंतु बीते दशकों की नीतियों के चलते संतुलन बिगड़ गया और दलहन की फसल किसानों के खेतों से दूर होती गई। सिर्फ गेहू और धान ही ज्यादा उत्पादित होने लगे। दलहन की कमी ऐसी है कि हमें हर साल देश में दाल आयात करना पड़ता है। इस कारण से इसकी कीमत ज्यादा होती है । गरीब तबका इसके उपयोग से निश्चित रूप से वंचित हो जाता है और प्रोटीन की कमीयां या कुपोषण संबंधी बातें आमतौर पर देखी जाती है। दुनियां के देशों में खाद्य पदार्थों के रूप में अन्य कई चीजें उपयोग में लाई जाती है परंतु चावल के साथ दाल यह भारत की संस्कृति का हिस्सा रही है। यहा70 फीसदी लोग शाकाहारी हैं । इस कारण दलहन का महत्व बढ़ जाता है। यह आयोजन इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के सभागार में आयोजित था। जिसमे देश भर के 18 केंद्रों से वैज्ञानिक और कृषि विशेषज्ञ आये हुए थे। 

श्री अग्रवाल ने कहा कि हरित क्रांति  कार्यक्रम के फलस्वरूप धान व गेहूं की फसलों पर किसान ज्यादा ध्यान देने लगे । धान और गेहूं का समर्थन मूल्य मिलने के कारण भी इन फसलों की पैदावार बहुत ज्यादा होने लगी। इन्ही वजहों से दलहन की खेती काफी पीछे होती गई। परंतु आज समय की मांग है कि किसान दलहन उत्पादन की ओर बढ़े। हालांकि केंद्र सरकार ने कुछ दालों का समर्थन मूल्य बढ़ाया है जो किसानों को प्रेरित करने में सहायक सिद्ध हो रहे है। परंतु हमे इस ओर और बहुत कुछ करना होगा।

श्री अग्रवाल ने कहा कि हमारा छत्तीसगढ़ राज्य इस दिशा में आगे बढ़ रहा है । बीते वर्ष दलहन उत्पादन के क्षेत्र में राष्ट्रीय कृषि कर्मण का सम्मान राज्य के किसानों को मिल चुका है। परंतु हमें लगता है अभी बहुत कुछ करना बाकी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने वर्ष 2022 तक देश भर के किसानों की आय दोगुनी करने का जो लक्ष्य दिया है। उस लक्ष्य को प्राप्त करने यह तो हम प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय प्रदेश भर के सभी कृषि विज्ञान केंद्रों में तथा संपन्न किसानों के खेतों में प्रदर्शन फसल लगाये । ताकि किसान ज्यादा से ज्यादा दलहन की तरफ आकर्षित हो सके। उन्होंने कहा कि शोध अब दलहन पर ज्यादा हो ताकि किसानों का भला हो सके। श्री अग्रवाल ने रवि समूह के सभी सदस्यों से कहा कि इस अवसर पर उन्होंने समूह के सदस्यों से कहा कि जिन दलहन फसलों पर केंद्र का समर्थन मूल्य नही मिलता उसके लिए भी वे अनुसंसा करें।

बैठक के दौरान दलहन पर आधारित शोध किताबों का विमोचन भी किया गया, इस बैठक की अध्यक्षता इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति एसके पाटिल, कृषि अनुसंधान परिषद के डॉ सोलंकी, डॉ संजीव गुप्ता, एसएस राव, संचालक कृषि विभाग एके केरकेट्टा आदि उपस्थित थे।