जो मन को नियंत्रित कर ले वही श्रेष्ठ

रायपुर I राजिम महाकुंभ के मुख्य मंच पर आयोजित संत समागम में संतों ने श्रद्धालुओं पर अमृतवाणी की वर्षा करते हुए कहा कि जिस ने मन को नियंत्रित कर लिया वह श्रेष्ठ हो जाता है। हमारे सामने श्रेष्ठ रूप में भगवान् प्रभु राम है। जिन्होंने मानव रूप में अनगिनत कठिनाईयों का सामना करते हुए एक आदर्श प्रस्तुत किया है। इस अवसर पर प्रदेश के धर्मस्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने उपस्थित संतों का अभिनन्दन करते हुए कहा कि आप संतों की कृपा से छत्तीसगढ़ की इस धर्म नगरी राजिम में कुंभ ने एक बड़ा स्वरुप ले लिया है। हमारी भारतीय धर्म-संस्कृति और परम्पराओं की रक्षा की दिशा में यह आयोजन सफल होता दीखता है। इस अवसर पर उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए डॉ. दत्तत्रेय होस्केरे जी ने कहा कि मन को नियंत्रित कर लेने से सभी कार्य सुलभ हो जाते है। इसी गुण के कारण श्रीराम को पुरूषोत्तम कहा जाता है। चिंतानंद महाराज ने कहा कि प्रदेशवासियों के पुण्य का ही परिणाम है कि आज राजिम में कल्प कुंभ हो रहा है। उन्होंने कहा कि छोटे-छोटे सुख के साधन की खोज करने के लिए हम अपने लक्ष्य से भटक जाते है।आनंद का स्वरूप परमात्मा में है। साधन का सही उपयोग करें और परमेश्वर को प्राप्त करें । महामण्डलेश्वर रामानंद महाराज ने कहा कि परमात्मा का एक ही स्वरूप है। सद्कर्म करोगे तो परमात्मा आपके करीब ही दिखाई देगा। स्वामी गंगादास उदासीन ने शाकाहार पर अपनी बात कही। ब्रम्हकुमारी राखी जी ने कहा कि भागवत में कहा गया है जब जब धरती में अत्याचार बढेगा ईश्वर अवतार लेंगे। आज धरती पर ऐसा लक्षण दिखाई पड रहा है। गौमाता काटी जा रही है, बूढ़े मां-बाप का सम्मान नहीं हो रहा है। शांति ईश्वरी देवी ने कहा कि मनुष्य का मन चंचल होता है जो बाहरी चीजों को देखकर आकर्षित होती है। इसलिए सफल जीवन के लिए मन को नियंत्रित करना जरुरी है। गोपाल प्रसाद जी ने कहा कि जहा संतों के आगमन से सतसंग होता है वह स्थान चंदन हो जाता है। महामंडलेश्वर हेमा सरस्वती जी ने कहा कि मन को स्थिर करें तभी शिव प्राप्त होता है शिव कल्याणीकारी है। मन की बाते न सुनें मन को शिव में लगाए ताकि आपको शिव की प्राप्ति हो।
कुंभ शब्द पर आपत्ति और बृजमोहन का जवाब
धर्मस्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि इस कुंभ कल्प का सारा श्रेय साधू-संतों को जाता है जिनके आशीर्वाद से यह प्रतिवर्ष सफल रूप से हो रहा है । शास्त्रों में कहा जाता है कि जहां संत होते है वहां अमृत वर्षा होती है। कुछ संतों ने विरोध करते हुए कहा देश में चार कुंभ होते है, आपने पांचवा कुंभ शुरू क्यों किया। तब मैंने उनसे आग्रह स्वरुप कहा कि छत्तीसगढ़ की धर्मपरायण जनता आर्थिक कारणों वजह से इलाहाबाद, उज्जैन,नासिक, काशी नहीं जा पाती है इसलिए यहां के लोगों की स्थिति को ध्यान में रखते हुए ऐसा आयोजन कराने का प्रयास किया है। वर्ष प्रतिवर्ष दुनियां भर से लोग माता कौशल्या की इस पवित्र भूमि को नमन करने यहां पहुँच रहे है और आप संतों के आशीर्वाद से यह कुंभ अपनी भव्यता और दिव्यता की ओर बढ़ रहा है।