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रायपुर/11/03/ 2018 केंद्रीय जल संसाधन मंत्री नितिन गडकरी ने राज्य के सिंचाई एवं कृषि मंत्री बृजमोहन अग्रवाल को पत्र लिखकर लक्ष्य भागीरथी अभियान को सफल रूप से आगे बढ़ाने के लिए बधाई एवं शुभकामनायें दी है। अपने पत्र में उन्होंने कहा है कि - "छत्तीसगढ़ सरकार ने काफी कम समय में लंबित पड़ी सिंचाई योजनाओं को पूर्ण कराते हुए शत-प्रतिशत सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के लिए लक्ष्य भागीरथी नामक कार्यक्रम प्रारंभ किया है। उल्लेखनीय है कि 2016-17 के दौरान 1लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधाओं का सृजन एवं 116 योजनाओं को पूर्ण किया गया है। यह अनुभव अन्य राज्यों के लिए अधिक सिंचाई सुविधाओं के सृजन में अत्यंत उपयोगी सिद्ध होंगे। छत्तीसगढ़ शासन के जल संसाधन विभाग और उसके नेतृत्वकर्ता बृजमोहन अग्रवाल बधाई के पात्र हैं। अभियान लक्ष्य भागीरथी के सभी लक्ष्यों को समयपूर्व संपन्न होने की कामना करता हूं।"

गौरतलब है कि हर किसान के खेत तक पानी पहुंचाने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सपने को छत्तीसगढ़ में साकार करने के उद्देश्य से प्रदेश के कृषि -सिंचाई मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने "लक्ष्य भागीरथी" अभियान की शुरुआत की थी। इसके तहत राज्य शासन द्वारा छत्तीसगढ़ में वर्षों से निर्माणाधीन और अधूरी सिंचाई योजनाओं को समय-सीमा में पूरा करके सिंचाई रकबा बढ़ाने के लिए एक वर्ष पहले शुरू किए गये इस अभियान को ऐतिहासिक सफलता मिली है। जल संसाधन विभाग के अंतर्गत एक अप्रैल 2016 से यह अभियान शुरू किया गया था। इसके बाद  31मार्च 2017 तक अर्थात् एक साल में ही लगभग एक लाख एक हजार 795 हेक्टेयर अतिरिक्त रकबे में सिंचाई सुविधा विकसित कर ली गई। 

इस योजना में सिंचाई सुविधाओं के विस्तार से संबंधित भू-अर्जन के300प्रकरणों का निराकरण करने में कामयाबी मिली है। किसानों को भू-अर्जन का मुआवजा देने500 करोड़ रूपए का भुगतान जिला कलेक्टरों को किया गया। सिंचाई मंत्री बृजमोहन अग्रवाल कहते है कि छत्तीसगढ़ में सैकड़ों सिंचाई योजनाओं के पूरा नही होने से किसानों को इन योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा था। इस योजना के तहत समयबद्ध कार्यक्रम बनाकर पूरा करने के लिए अभियान लक्ष्य भागीरथी प्रारंभ किया गया। अभियान के अंतर्गत विभाग द्वारा ऐसी 106 अपूर्ण सिंचाई योजनाएं चिन्हित की गई, जो किन्ही कारणों से प्रशासकीय स्वीकृति मिलने के बाद पूरी नही हो पा रही थी। इन कारणों में किसानों को भू-अर्जन का मुआवजा नही मिलना और वन भूमि से संबंधित मामले शामिल थे।

इन योजनाओं के आधी-अधूरी रहने के कारण स्वीकृत राशि की तीन चौथाई अथवा शत्-प्रतिशत राशि व्यय होने के बाद भी इनसे रूपांकित सिंचाई क्षमता के अनुरूप सिंचाई सुविधा विकसित नही हो पाई थी। कई योजनाएं तो ऐसी थी, जिनमें निर्धारित लागत की सम्पूर्ण राशि व्यय होने के बाद भी एक एकड़ रकबे में भी सिंचाई क्षमता सृजित नहीं हो पाई थी। इस संबंध में व्यापक सर्वेक्षण कराने के बाद यह बात सामने आयी कि इन योजनाओं के शीर्ष कार्य तो पूरे हो गए थे, परन्तु नहरों के कार्य भूमि संबंधी विवादों के चलते शुरू नही हो पाए थे।

उन्होंने बताया कि सिंचाई योजनाओं के अधूरे रहने के कारणों का अध्ययन करने के बाद इन्हें पूरा करने अभियान लक्ष्य भागीरथी के रूप में ठोस रणनीति बनाई गई।   उन्होंने बताया कि अभियान के तहत चिन्हित106पुरानी योजनाओं में से 70योजनाओं को वित्तीय वर्ष2016-17 में पूरा करने के साथ ही 46 नवीन योजनाओं को पूर्ण किया गया है। वर्ष 2017-18 के बजट में 116 योजनाये शामिल है जिनसे 55021हैक्टेयर सिंचाई क्षमता सृजन का लक्ष्य रखा गया है।

इस योजना को केंद्रीय जल संसाधन मंत्री नितिन गडकरी की सराहना मिलना निश्चित ही जल संसाधन विभाग के सचिव सोनमणि वोरा,एएनसी एचआर कुटारे, श्री भागवत सहित समस्त सीई,एसई,ईई, एसडीओ, सब इंजीनियर, विभाग के कर्मचारियों-अधिकारियों सहित हम सभी के लिए गौरव की बात है। यह सभी के अथक परिश्रम का ही सुकून देने वाला परिणाम है। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की हमारी सरकार किसान हित को सबसे ऊपर रखकर काम करती है इसी का परिणाम है कि गांव-गरीब और किसानों के हित में हम बेहतर काम कर पा रहे है। 

●बृजमोहन के नेतृत्व में बनी टास्क फोर्स ने की अनुशंसा पर देश के लिए बनी 77 हज़ार करोड़ की जल योजना● 

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना में केंद्रीय स्तर पर 1 वर्ष पहले जल संसाधन विभाग में बनाई गई टॉस्क फ़ोर्स की जिम्मेदारी बृजमोहन अग्रवाल ने सम्हाली थी। यह टास्क फोर्स प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत चयनित देश की चिन्हित 99  परियोजनाओं को समयबद्व तरीके से पूरा कराने की दिशा में काम कराने हेतु अनुसंशा की थी जिसे अमल में लाते हुए केन्द्र सरकार ने  लंबित परियोजनाओं के लिए रियायते देने के साथ साथ नाबार्ड के माध्यम से राशि भी उपलब्ध करायी है । लगभग 77 हजार करोड़ रूपये की इस योजना से देश में सिंचाई सुविधाओं में अभूतपूर्व वृद्धि होगी और किसानों को इसका व्यापक लाभ मिलेगा।  इस योजना में छत्तीसगढ़ की तीन परियोजनाओं को भी शामिल किया गया है। इस योजना के तहत छत्तीसगढ़ की तीन परियोजनाओं केलो, मनिहारी और खारंग को भी शामिल किया गया है।