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यूनियन क्लब एवं छत्तीसगढ़ सिक्ख फोरम द्वारा आयोजित खेलों के समर कोचिंग कैम्प का हुआ समापन।

रायपुर/09/06/2018/ यूनियन क्लब एवं छत्तीसगढ़ सिक्ख फोरम द्वारा आयोजित विभिन्न खेलों का समर कोचिंग कैम्प 1 मार्च से 9 जून 2018 तक आयोजित था। जिसका आज समापन हुआ। समापन समारोह में मुख्य अतिथि की आसंदी से उपस्थित बच्चों एवं पालकों को संबोधित करते हुए प्रदेश के कृषि एवं सिंचाई मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि जीवन मे अनुशासन की महती आवश्यकता होती है। और यह अनुशासन की भावना खेलों के माध्यम से बच्चों को दिया जा सकता है। हमे यह समझना है कि केवल जीतना ही खेल नही है। हारना, उठना,आगे बढ़ना और जीतना, खेल है। इसलिए आवश्यकता है कि बगैर हार-जीत की चिंता किये बगैर अच्छा खेलने का प्रयास करते रहे तो सफलता निश्चित ही मिलती है।


बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि आज के समय में बच्चों को सम्हालना माता-पिता के लिये कठीन काम होता जा रहा है। गर्मी की छुट्टियों का सदुपयोग कैसे करें यह चिंता का विषय हो जाता है। ऐसे में खेलों के समर कैम्प एक बेहतर विकल्प के रूप में सामने रहता है। यहां हम बच्चों के टेलेंट को भी देखकर भविष्य की दिशा तय कर सकते है। उन्होंने कहा खेल से पर्सनालिटी डेवलपमेन्ट, जरनल नॉलेज भी बढ़ता है। कुछ नया सीखने की आदत भी खेल के मैदान से मिलती है। बृजमोहन ने कहा कि खेल जगत में छत्तीसगढ़ की विशिष्ट पहचान है। अंतराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम, अंतराष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम  सहित खेल के लिए अनेक सुविधाएं यहा है।


महापौर प्रमोद दुबे ने अंतराष्ट्रीय स्तर का स्विमिंग पूल यहां तैयार किया गया है। निगम के माध्यम से उद्यानों में ओपन जिम लगाए गये है। उन्होंने बच्चों से अपील करते हुए कहा कि व्हाट्स एप,फेसबुक से बाहर निकलकर खेल के मैदान में आये।
इस अवसर पर समर कैंप में अपनी सेवाएं देने वाले टेनिस कोच रोहित सिंह यादव, आर त्रिनाथ राव, बैडमिंटन कोच संजय मिश्रा,दर्शन ताम्रकार,राजीव सिंह,स्विमिंग कोच एसडी दास,पिंटू पंछी,गणेश यदु को  प्रतीक चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया गया वही विभिन्न खेलों की प्रतियोगिताओं के विजेता खिलाड़ियों को भी पुरस्कृत किया गया।


इस अवसर पर रायपुर उत्तर के विधायक श्रीचंद सुंदरानी,गुरुचरण सिंह होरा,ए.फरिस्ता,छत्तीसगढ़ कराते संघ के विजय अग्रवाल,वरिष्ठ भाजपा नेता ओमप्रकाश पुजारी आदि उपस्थित थे।


बचपन को किया याद..
बृजमोहन अग्रवाल ने अपने बचपन को याद करते हुए कहा कि क्लब जैसी सुविधा हमारी पहुंच से दूर थी। परीक्षाओं के बाद जब हमारी गर्मियों की छुटियाँ लगती थी तब हम रामसागर पारा की गलियों में खूब धूम मचाते थे। खेलने के लिए बैट न मिले तो कपड़ा धोने का कुटेला लेकर क्रिकेट खेलते थे।