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 आज जब दुष्कर्मों की आंधी चल रही है ऐसे में धन-नाम और वैभव कमाना आसान है पर अपनी संतान को योग्य व् संस्कारवान बनाना बहुत मुस्किल है.जिन लोगों के भाग्य में सुसंस्कारित - योग्य संताने आती है उनसे बड़ा धनवान दुनिया में कोई नहीं है.इसलिए प्रेम और परवरिश की ताकत लगाकर  ध्रुव,प्रहलाद और राम जैसी संतान तैयार करे |यह बात स्मरण में रखे की हमें अपनी संतान की आँख खुलने से लेकर अपनी आँख बंद होने तक उसे संस्कारित बनाने प्रयास करे. श्रीमद भागवत का सन्देश यही है. यह उद्गार पंडित विजय शंकर मेहता ने धर्मस्व एवं संस्कृति मंत्री बृजमोहन अग्रवाल के निवास पर आयोजित श्रीमद भागवत ज्ञान सप्ताह में व्यासपीठ से व्यक्त किये व्यक्त किये. श्रीमद भागवत कथा के इस पावन अवसर पर श्रोता के रूप में प्रदेश के मुखिया डॉ.रमन सिंह सपत्निक उपस्थित थे |

श्रीमद भागवत कथा के तीसरे दिन आज संतान सूत्र के साथ पंडित मेहता ने श्रीमद भागवत कथा आरम्भ की.कथा में आज उन्होंने जड़भरत, अजमिल, हिरण्यकश्यप-प्रहलाद के प्रसंग सुनाते हुए वर्तमान जीवन से जोड़ने का प्रयास किया |

उन्होंने हिरण्यकश्यप –प्रह्लाद प्रसंगसुनाते हुए कहा कि माताए सृजन करना जानती है इसका उदहारण यह कथा है ,बदले की भावना से चूर पति महाराज हिरण्यकश्यप की इच्छा के विपरीत जाकर कयाधू ने अपने बालक प्रहलाद में संस्कार के साथ दुनिया के पालनहार नारायण के भक्ति की सीख दी और मोक्ष का मार्ग प्रसस्त किया |

उन्होंने कहा की संताने माता-पिता को मोक्ष दिला सकती है पर संस्कारवान तैयार करने की जिम्मेदारी उउन्ही की है की है.उदाहरण देते हुए कहा की वर्तमान दौर की संताने निश्चित रूप से माता-पिता से ज्यादा बुद्धिमान हो सकते है पर उन्हें यह सीख मिलनी चाहिए कि परमात्मा यानी मंदिर,माता,पिता और गुरु के सामने अपनी योग्यता का प्रदर्शन न करे तो ही अच्छा क्योंकि इन सबो का सम्मान और  उनसे प्राप्त ज्ञान व्  उनके मातृत्व का भाव ही जीवन के सफलता की कुंजी |

 

उन्होंने अन्य प्रसंग में कहा कि धन के साथ दोष भी आते है इसलिए धन का दशांश दीं-दुखियों की सेवा में खर्च करें.आप सद्कर्म करे और आचरण अच्छे रखे तो आपको यही स्वर्ग की अनुभूति होगी. साथ ही कहा कि भगवान् भाव का भूखा है उन्हें मित्र के भाव या शत्रु के भाव जैसा स्मरण करोगें वैसे फल की प्राप्ति होगी.अच्छा पाने के लिए मन में सदा अच्छे भाव का संचार बनाये रखे |